The Hindu Temple

Mandal Puja Significance: सबरीमाला में मंडला पूजा, आस्था, तपस्या और आत्मिक शुद्धि का दिव्य पर्व

Mandal Puja Significance: सबरीमाला अयप्पा मंदिर में मनाई जाने वाली मंडला पूजा केरल की सबसे पवित्र और अनुशासित धार्मिक परंपराओं Disciplined religious traditions में से एक मानी जाती है। यह पूजा भगवान अयप्पा के भक्तों द्वारा की जाने वाली 41 दिनों की कठोर तपस्या की पूर्णता का प्रतीक है। वर्ष 2025 में मंडला पूजा शनिवार, 27 दिसंबर को पूरे विधि-विधान और आध्यात्मिक वातावरण के साथ संपन्न होगी। इस अवसर पर देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु सबरीमाला पहुंचते हैं और सामूहिक रूप से भक्ति, संयम और विश्वास का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करते हैं।

Mandal puja significance

मलयालम कैलेंडर और मंडला पूजा की तिथि

मलयालम पंचांग के अनुसार मंडला Mandala according to the Malayalam calendar पूजा धनु मास के 11वें या 12वें दिन मनाई जाती है। यह मास सामान्यतः ग्रेगोरियन कैलेंडर के दिसंबर और जनवरी के बीच आता है। इस समय सबरीमाला का वातावरण पूर्णतः आध्यात्मिक हो जाता है और पूरा क्षेत्र भक्तिमय ऊर्जा से भर जाता है।

मंडला पूजा की 41 दिवसीय तैयारी

मंडला पूजा की तैयारी वृश्चिकम मास के पहले दिन से आरंभ होती है। यही वह दिन होता है जब भक्त औपचारिक रूप से तपस्या की प्रतिज्ञा लेते हैं। इस अवधि को अयप्पा व्रतम कहा जाता है, जो शारीरिक अनुशासन के साथ-साथ मानसिक और आत्मिक शुद्धि पर भी केंद्रित होता है।

तपस्या काल के प्रमुख नियम

इन 41 दिनों में भक्त कई सख्त नियमों का पालन Devotees follow many strict rules करते हैं। वे पूर्ण रूप से शाकाहारी भोजन ग्रहण करते हैं और किसी भी प्रकार के नशे से दूरी बनाए रखते हैं। ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए वे सांसारिक सुख-सुविधाओं से दूर रहते हैं। अधिकतर भक्त काले, नीले या केसरिया वस्त्र धारण करते हैं, जो विनम्रता और समर्पण का प्रतीक माने जाते हैं। इस दौरान नंगे पैर चलना, नियमित मंदिर दर्शन करना और भगवान अयप्पा के नाम का जप करना दैनिक जीवन का हिस्सा बन जाता है।

सबरीमाला तीर्थयात्रा का आध्यात्मिक अनुभव

यह तपस्या केवल नियमों का पालन नहीं, बल्कि एक गहरी आत्मिक यात्रा होती है। भक्त स्वयं को भीतर से तैयार करते हैं ताकि वे सबरीमाला की कठिन चढ़ाई और मंदिर दर्शन को पूरी श्रद्धा और धैर्य के साथ कर सकें। यह यात्रा जीवन में अनुशासन और आत्मनियंत्रण के महत्व को भी सिखाती है।

मंडला पूजा के दिन होने वाले अनुष्ठान

मंडला पूजा के दिन सबरीमाला अयप्पा मंदिर में विशेष अनुष्ठानों Special rituals at the Sabarimala Ayyappa temple का आयोजन होता है। मंदिर को फूलों और दीपों से सजाया जाता है। विशेष पूजा, अभिषेक और मंत्रोच्चारण के साथ भगवान अयप्पा की आराधना की जाती है। हजारों दीपक प्रज्वलित किए जाते हैं, जिससे पूरा परिसर दिव्य प्रकाश से आलोकित हो उठता है। भक्त इरुमुडी केट्टू लेकर भगवान को चढ़ावा अर्पित करते हैं, जिसे उनकी तपस्या की पूर्णता का प्रतीक माना जाता है।

मंडला पूजा का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व

मंडला पूजा भक्तों को आत्मशुद्धि Mandala Puja devotees seek self-purification का अवसर देती है। 41 दिनों की साधना से मन और शरीर दोनों पवित्र होते हैं। माना जाता है कि सच्चे मन और पूर्ण विश्वास के साथ मंडला पूजा करने से भगवान अयप्पा की विशेष कृपा प्राप्त होती है, जिससे जीवन में शांति, संतुलन और सकारात्मकता आती है।

मंडला पूजा और मकर विलक्कू का संबंध

मंडला पूजा के बाद मकर विलक्कू का आयोजन होता है, जो सबरीमाला का एक और प्रमुख पर्व Another major festival of Sabarimala है। इन दोनों अवसरों के दौरान मंदिर लंबे समय तक श्रद्धालुओं के लिए खुला रहता है। यही कारण है कि इस अवधि में सबरीमाला विश्व के सबसे अधिक भीड़ वाले तीर्थस्थलों में शामिल हो जाता है।

आध्यात्मिक एकता का प्रतीक सबरीमाला

हरे-भरे जंगलों और पहाड़ियों से घिरा सबरीमाला मंदिर Sabarimala temple surrounded by hills जाति, वर्ग और भाषा से ऊपर उठकर सभी को एक समान भाव से स्वीकार करता है। मंडला पूजा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, अनुशासन और भक्ति की ऐसी यात्रा है जो भक्तों के जीवन को भीतर से बदल देती है।

Back to top button

AdBlock detected

Please disable your AdBlocker first, and then you can watch everything easily.