The Hindu Temple

Kainchi dham fair: कैंची धाम में आस्था का महासंगम, 61वें स्थापना दिवस पर उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब

Kainchi dham fair: उत्तराखंड के नैनीताल जनपद में स्थित विश्व प्रसिद्ध कैंची धाम आज गहरी आस्था, श्रद्धा और भक्ति के रंग में रंगा नजर आया। अवसर था नीम करोली बाबा के कैंची धाम के 61वें स्थापना दिवस का। हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी 15 जून को आयोजित होने वाले कैंची मेले में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु बाबा के दर्शन के लिए पहुंचे। सुबह से ही मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिली। बारिश की फुहारों के बावजूद श्रद्धालुओं के उत्साह और विश्वास में कोई कमी नहीं दिखी।

Kainchi dham
Kainchi dham

कैंची धाम का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व
कैंची धाम केवल एक मंदिर नहीं बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। नीम करोली बाबा को हनुमान जी का परम भक्त माना जाता है और कई मान्यताओं के अनुसार उन्हें कलियुग में हनुमान जी का अवतार भी कहा जाता है। बाबा की कृपा और चमत्कारों की कथाएं देश ही नहीं बल्कि विदेशों तक फैली हुई हैं। यही कारण है कि बीते कुछ वर्षों में यह धाम वैश्विक स्तर पर प्रसिद्ध हुआ है और विदेशी श्रद्धालु भी बड़ी संख्या में यहां पहुंचते हैं।

स्थापना दिवस पर विशेष आयोजन
61वें स्थापना दिवस के अवसर पर मंदिर समिति द्वारा विशेष धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया। सुबह करीब पांच बजे बाबा नीम करोली महाराज को विधिवत भोग अर्पित किया गया। इसके बाद परंपरा के अनुसार मालपुआ प्रसाद का वितरण शुरू हुआ। प्रसाद ग्रहण करने के लिए श्रद्धालु घंटों तक कतार में खड़े रहे, लेकिन बाबा के दर्शन की अनुभूति ने उनकी सारी थकान दूर कर दी।

श्रद्धालुओं की रिकॉर्ड भीड़
इस वर्ष कैंची मेला ऐतिहासिक माना जा रहा है। मेले से एक दिन पहले ही शुक्रवार शाम तक करीब दस हजार से अधिक श्रद्धालु कैंची धाम पहुंच चुके थे। शनिवार रात तक यह संख्या बढ़कर बीस हजार से अधिक हो गई। श्रद्धालुओं ने रातभर मंदिर परिसर में हनुमान चालीसा का पाठ किया और भजन-कीर्तन में भाग लिया। पूरे क्षेत्र में बाबा के जयकारों की गूंज सुनाई देती रही।

भोजन और व्यवस्थाओं का सराहनीय प्रबंध
मंदिर समिति की ओर से श्रद्धालुओं के लिए भोजन, पानी और अन्य आवश्यक सुविधाओं का विशेष प्रबंध किया गया था। एक अनुमान के अनुसार दस हजार से अधिक भक्तों को नि:शुल्क भोजन कराया गया। स्वयंसेवकों और प्रशासन की टीम ने मिलकर भीड़ को नियंत्रित करने और श्रद्धालुओं को सुरक्षित दर्शन कराने में अहम भूमिका निभाई।

दर्शन के लिए लंबी कतारें
स्थापना दिवस की सुबह करीब 4:45 बजे से ही कैंची धाम में दर्शन के लिए लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई थीं। बताया जा रहा है कि कतार की लंबाई लगभग चार किलोमीटर तक पहुंच गई थी। भवाली, अल्मोड़ा, हल्द्वानी और आसपास के क्षेत्रों से आए भक्त बाबा के जयकारे लगाते हुए धैर्यपूर्वक अपनी बारी का इंतजार करते रहे। घंटों प्रतीक्षा के बाद जब उन्हें बाबा के दर्शन मिले तो उनके चेहरे पर अद्भुत शांति और संतोष झलक रहा था।

बारिश में भी नहीं डिगी श्रद्धा
स्थापना दिवस के दौरान हल्की से मध्यम बारिश होती रही, लेकिन इससे श्रद्धालुओं की आस्था पर कोई असर नहीं पड़ा। कई भक्त भीगते हुए, नंगे पांव मंदिर तक पहुंचे और बाबा के चरणों में शीश नवाया। यह दृश्य यह दर्शाता है कि नीम करोली बाबा के प्रति लोगों का विश्वास कितना गहरा और अटूट है।

नीम करोली बाबा का जीवन परिचय
नीम करोली बाबा का जन्म उत्तर प्रदेश के अकबरपुर क्षेत्र में वर्ष 1900 के आसपास माना जाता है। उनका बचपन का नाम लक्ष्मण नारायण शर्मा था। वे एक संपन्न ब्राह्मण परिवार से थे, लेकिन सांसारिक सुखों से दूर रहकर उन्होंने संन्यास का मार्ग अपनाया। बाबा को लक्ष्मण दास, तिकोनिया वाले बाबा और तलैया बाबा जैसे नामों से भी जाना जाता है। वे बजरंगबली के परम भक्त थे और उनका संपूर्ण जीवन सेवा, भक्ति और साधना में व्यतीत हुआ।

आज भी नीम करोली बाबा के अनुयायी मानते हैं कि उनकी कृपा से असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं। कैंची धाम में आयोजित 61वें स्थापना दिवस का यह भव्य आयोजन इसी अटूट विश्वास और श्रद्धा का सजीव प्रमाण है।

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