The Hindu Temple

Ancient Kaitha Shiva Temple: 300 साल पुराने इस पाषाण ढांचे के चमत्कारी जल में छिपा है कान के रोगों का इलाज

Ancient Kaitha Shiva Temple: झारखंड की पावन धरा पर रामगढ़ जिले में एक ऐसा देवालय स्थित है, जिसकी ख्याति केवल उसकी प्राचीनता के लिए नहीं, बल्कि वहां होने वाले विस्मयकारी उपचारों के लिए भी है। गोला रोड (NH-23) पर स्थित कैथा शिव मंदिर के बारे में यह विश्वास सदियों से कायम है कि यहां शिवलिंग पर अर्पित किया गया जल कान से जुड़ी असाध्य बीमारियों को जड़ से खत्म कर देता है। विज्ञान और (Miraculous Healing Waters) के बीच का यह संघर्ष आज भी शोधकर्ताओं के लिए कौतूहल का विषय बना हुआ है, क्योंकि दूर-दराज से लोग यहां कान के पुराने रोगों से मुक्ति पाने की आस में खिंचे चले आते हैं।

Ancient kaitha shiva temple
Ancient kaitha shiva temple

राजा दलेर सिंह की विरासत और ‘कैथा’ का नामकरण

इतिहास के पन्नों को पलटें तो पता चलता है कि हजारीबाग के तत्कालीन राजा दलेर सिंह ने रामगढ़ को अपनी राजधानी बनाने के बाद सन 1670 में इस भव्य मंदिर का निर्माण करवाया था। इस (Historical Temple Origins) का नामकरण बेहद दिलचस्प है; मंदिर के ठीक नीचे एक प्राचीन गुफा है जहां ‘मां कैथेश्वरी’ की शक्ति विद्यमान मानी जाती है। उन्हीं के नाम पर इस पावन स्थान को कैथा शिव मंदिर के रूप में ख्याति मिली। यह स्थान न केवल धार्मिक श्रद्धा का केंद्र है, बल्कि झारखंड के गौरवशाली शाही इतिहास का मूक गवाह भी है।

तीन संस्कृतियों का मिलन: स्थापत्य का बेजोड़ नमूना

कैथा शिव मंदिर की बनावट को देखकर पुरातत्वविद भी दंग रह जाते हैं, क्योंकि इसमें मुगल, बंगाली और राजपूत स्थापत्य कला का एक दुर्लभ समन्वय देखने को मिलता है। इस (Architectural Heritage India) का निर्माण लखौरी ईंटों, सुर्खी, चूना और दाल के विशेष मिश्रण से किया गया है, जो आज भी उतना ही मजबूत है जितना 300 साल पहले था। दो मंजिला इस ढांचे में ऊपर और नीचे जाने के लिए दो अलग सीढ़ियां बनी हैं, जिनके बगल में मौजूद बेलनाकार गुंबज उस दौर की सैन्य सुरक्षा रणनीति की ओर इशारा करते हैं।

दो शिवलिंगों की एक साथ पूजा का अनोखा विधान

आमतौर पर किसी भी शिवालय में एक ही मुख्य शिवलिंग की स्थापना होती है, लेकिन कैथा मंदिर इस मामले में भी अद्वितीय है। यहां एक साथ (Dual Shivalinga Worship) का विधान है, जिसमें से एक शिवलिंग स्थापना काल का बताया जाता है और दूसरा बाद में स्थापित किया गया। सावन के महीने में यहां जलाभिषेक करने वाले श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है, वहीं महाशिवरात्रि के अवसर पर होने वाले भव्य जागरण और मेले में हजारों की भीड़ उमड़ती है, जो इस स्थान की अपार आध्यात्मिक ऊर्जा को प्रमाणित करती है।

एक रात में निर्माण की वो रहस्यमयी किंवदंती

स्थानीय लोककथाओं में यह बात बहुत गहराई तक बसी हुई है कि इस विशाल और जटिल संरचना का निर्माण केवल एक ही रात में पूरा कर लिया गया था। हालांकि (Supernatural Construction Legends) पर आधुनिक युग में विश्वास करना कठिन है, लेकिन मंदिर की बनावट में छिपे रहस्य इस बात को बल देते हैं। मंदिर के नीचे बने तहखाने और बंद हो चुकी सुरंगों के पीछे का सच आज भी कोई नहीं जानता, जिससे यह स्थल किसी रोमांचक फंतासी कहानी जैसा प्रतीत होता है।

राजसी सुरंग और पाताल लोक का रहस्य

मंदिर के ठीक नीचे एक गहरी गुफा मौजूद है जिसका अंत कहां होता है, यह आज भी एक रहस्य बना हुआ है। पुराने समय में राजा और रानी पास के (Ancient Tunnel Mysteries) वाले तालाब में स्नान कर इसी गुप्त रास्ते से मंदिर तक पूजा करने पहुंचते थे। सुरक्षा कारणों से अब यह मार्ग बंद कर दिया गया है, लेकिन लोगों का मानना है कि इस गुफा के भीतर प्राचीन संपदा और रहस्यमयी शक्तियां आज भी सुरक्षित हैं, जो आम इंसान की पहुंच से कोसों दूर हैं।

गुफा के रक्षक: काले नाग का अद्भुत निवास

कैथा मंदिर की मान्यताओं में एक काला नाग भी शामिल है जिसे मंदिर की गुफा का रक्षक माना जाता है। कहा जाता है कि यह (Divine Serpent Folklore) आज भी मिट्टी के प्याले में अर्पित किए गए दूध और बताशों को ग्रहण करने आता है। कई स्थानीय ग्रामीणों ने इस दिव्य नाग को देखने का दावा किया है, जिससे लोगों के मन में इस मंदिर के प्रति श्रद्धा और भय का एक अनोखा मिश्रण पैदा होता है। नाग देवता का मंदिर की गुफा में निवास करना इसे एक तांत्रिक और जागृत स्थान बनाता है।

राष्ट्रीय धरोहर बनने की ओर बढ़ते कदम

आज इस ऐतिहासिक और आध्यात्मिक केंद्र के संरक्षण के लिए सरकार भी सजग हुई है। मंदिर की अद्भुत इंजीनियरिंग और ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए इसे (National Heritage Site status) देने की प्रक्रिया वर्तमान में जारी है। यदि इसे राष्ट्रीय धरोहर घोषित कर दिया जाता है, तो न केवल इस प्राचीन मंदिर का जीर्णोद्धार होगा, बल्कि वैश्विक पटल पर रामगढ़ के पर्यटन को एक नई पहचान मिलेगी। यह मंदिर हमें याद दिलाता है कि भारत की जड़ें कितनी गहरी और रहस्यमयी हैं।

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