Putana And Krishna Story: बाल कृष्ण और पूतना वध की दिव्य कथा, आस्था, भय और धर्म की विजय
Putana And Krishna Story: भगवान कृष्ण का जन्म केवल एक धार्मिक घटना नहीं था, बल्कि यह अन्याय, अत्याचार But this injustice, oppression और भय से भरे समय में आशा की पहली किरण बनकर आया। यह कथा न सिर्फ आस्था से जुड़ी है, बल्कि इसमें जीवन, नीति और धर्म के गहरे अर्थ छिपे हैं। कृष्ण का बाल्यकाल ही यह सिद्ध कर देता है कि जब अधर्म अपनी चरम सीमा पर पहुँच जाता है, तब ईश्वर स्वयं किसी न किसी रूप में हस्तक्षेप करता है।

कृष्ण जन्म की पृष्ठभूमि और मथुरा का भय
मथुरा नगरी उस समय राजा कंस के अत्याचारी शासन से त्रस्त थी। कंस सत्ता के नशे में इतना अंधा हो चुका था कि उसे अपने ही परिवार से खतरा महसूस होने लगा। एक आकाशवाणी ने यह घोषणा All India Radio made this announcement कर दी थी कि उसकी बहन देवकी का आठवाँ पुत्र उसका वध करेगा। यही भविष्यवाणी कंस के भय का कारण बन गई। सत्ता बचाने के लिए उसने अपनी ही बहन और बहनोई वासुदेव को कारागार में बंद कर दिया।
देवकी के पहले छह पुत्रों की हत्या कंस ने निर्दयता से कर दी। यह केवल एक राजा की क्रूरता नहीं थी, बल्कि उस समय के सामाजिक और नैतिक पतन का भी प्रतीक थी। मथुरा में भय का ऐसा वातावरण था जहाँ लोग खुलकर सांस भी नहीं ले पाते थे।
दिव्य योजना और बलराम का आगमन
जब देवकी ने सातवें पुत्र को गर्भ धारण किया, तब दिव्य शक्ति When Devaki conceived her seventh son, a divine power intervened ने हस्तक्षेप किया। योगमाया ने उस भ्रूण को रोहिणी के गर्भ में स्थानांतरित कर दिया। यही बालक आगे चलकर बलराम के नाम से प्रसिद्ध हुए। यह घटना यह दर्शाती है कि जब परिस्थितियाँ अत्यंत कठिन हो जाती हैं, तब दैवीय शक्तियाँ स्वयं संतुलन बनाने आती हैं।
कारागार में हुआ कृष्ण का चमत्कारी जन्म
अष्टमी की अंधेरी रात, मूसलाधार वर्षा और जेल की मोटी दीवारों Torrential rain and thick prison walls के बीच कृष्ण का जन्म हुआ। यह जन्म साधारण नहीं था। जैसे ही कृष्ण ने धरती पर अवतार लिया, कारागार के ताले स्वयं खुल गए और पहरेदार गहरी नींद में सो गए। वासुदेव ने शिशु कृष्ण को लेकर यमुना पार की और गोकुल में नंद और यशोदा के घर पहुँचा दिया। यह घटना इस बात का संकेत थी कि ईश्वर का कार्य कोई भी शक्ति नहीं रोक सकती।
कंस का क्रोध और शिशु हत्या का आदेश
जब कंस को यह पता चला कि उसका भय अभी भी जीवित है, तो उसका क्रोध और बढ़ गया। उसने मथुरा और आसपास के क्षेत्रों में सभी नवजात शिशुओं की हत्या Killing of newborn babies का आदेश दे दिया। यह आदेश मानवता के विरुद्ध था, लेकिन कंस के लिए सत्ता सर्वोपरि थी। उसे लगने लगा कि साधारण उपायों से उसका भय समाप्त नहीं होगा।
पूतना का गोकुल आगमन
कंस ने पूतना नामक राक्षसी की सहायता With the help of the demoness named Putana ली, जो अपने विषैले दूध से बच्चों को मारने के लिए कुख्यात थी। पूतना ने एक सुंदर स्त्री का रूप धारण किया और गोकुल पहुँची। उसकी चालाकी इतनी गहरी थी कि किसी को उस पर संदेह नहीं हुआ। गोकुल की सरल जीवनशैली और लोगों की निष्कपटता का उसने लाभ उठाया।
माँ यशोदा का विश्वास और पूतना की चाल
यशोदा माँ के लिए हर अतिथि सम्माननीय था। पूतना ने स्वयं को एक साधारण महिला के रूप में प्रस्तुत किया और कृष्ण को गोद में लेने की अनुमति माँगी। यशोदा को उसके इरादों Yashoda knew his intentions का कोई आभास नहीं था। यह दृश्य यह दिखाता है कि मासूमियत कभी-कभी खतरे को पहचान नहीं पाती।
बाल कृष्ण की दिव्य चेतना
शिशु कृष्ण भले ही बालक थे, लेकिन वे सर्वज्ञ थे। जैसे ही पूतना ने उन्हें विषैला दूध पिलाने की कोशिश Attempting to feed poisoned milk की, कृष्ण ने उसकी जीवन शक्ति को ही सोख लिया। यह कोई हिंसक प्रतिशोध नहीं था, बल्कि अधर्म का स्वाभाविक अंत था। पूतना का असली राक्षसी रूप प्रकट हो गया और उसकी मृत्यु हो गई।
गोकुल में भय और आश्चर्य
जब पूतना का विशाल राक्षसी शरीर धरती A gigantic, monstrous body on the earth पर गिरा, तो गोकुल के लोग भयभीत हो गए। लेकिन जल्द ही उन्हें यह समझ में आया कि यह कोई सामान्य घटना नहीं थी। यह बाल कृष्ण की पहली बड़ी लीला थी, जिसने यह स्पष्ट कर दिया कि वे साधारण बालक नहीं हैं।
पूतना वध का आध्यात्मिक संदेश
इस घटना का गहरा अर्थ है। पूतना को मोक्ष मिला, क्योंकि Putana attained salvation because उसने अनजाने में ही कृष्ण को माता का दूध पिलाया था। यह दर्शाता है कि ईश्वर की शरण में आने से, चाहे भावना शुद्ध हो या नहीं, अंततः उद्धार संभव है। यह कथा धर्म, करुणा और सत्य की विजय का प्रतीक है।
कृष्ण लीला का समाज पर प्रभाव
पूतना वध की कथा पीढ़ियों The story of Putana’s slaying has been passed down through generations से लोगों को यह सिखाती आई है कि बुराई कितनी भी चालाक क्यों न हो, अंततः सत्य के सामने टिक नहीं सकती। यह कहानी बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, सभी को नैतिक साहस और विश्वास की प्रेरणा देती है।

