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Saphala Ekadashi 2025 Date And Subh Samay: सफलता, समृद्धि और आत्मिक शुद्धि का पावन पर्व

Saphala Ekadashi 2025 Date And Subh Samay: सफला एकादशी हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र और फलदायी व्रत मानी जाती है। यह एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित होती है और इसका उद्देश्य जीवन में success, prosperity और inner peace की प्राप्ति करना है। मान्यता है कि जो भक्त श्रद्धा और नियमपूर्वक इस व्रत का पालन करते हैं, उनके जीवन में fame, achievement और positive energy का संचार होता है। यह व्रत न केवल सांसारिक उन्नति देता है, बल्कि आत्मिक शुद्धि का मार्ग भी प्रशस्त करता है।

Saphala ekadashi 2025 date and subh samay
Saphala ekadashi 2025 date and subh samay

सफला एकादशी का धार्मिक महत्व

हिंदू पंचांग के अनुसार यह एकादशी पौष मास के कृष्ण पक्ष में आती है, जो आमतौर पर December और January के बीच पड़ती है। इस व्रत का उल्लेख प्राचीन ग्रंथ Brahmanda Purana में मिलता है, जहां भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं इसके महत्व को धर्मराज युधिष्ठिर को समझाया था। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से past sins का नाश होता है और व्यक्ति spiritual growth की ओर अग्रसर होता है। यह एकादशी जीवन में stability और divine blessings लाने वाली मानी जाती है।

सफला एकादशी से जुड़ी पौराणिक कथा

प्राचीन समय में एक शक्तिशाली राजा हुआ करता था, जिसके चार पुत्र थे। राजा और उसका परिवार भगवान विष्णु के परम भक्त थे, लेकिन उसका एक पुत्र लुंबक ईश्वर के अस्तित्व पर विश्वास नहीं करता था। उसके नास्तिक व्यवहार और अनुशासनहीनता से परेशान होकर राजा ने उसे राज्य से निष्कासित कर दिया। लुंबक जंगल में रहने लगा और हिंसक जीवन जीने लगा।

एक बार वह गंभीर रूप से बीमार पड़ा और पूरे दिन कुछ भी खाने-पीने में असमर्थ रहा। वह रातभर भूखा और जागता रहा। अगले दिन जब उसकी तबीयत सुधरी तो उसे अपने भीतर एक अजीब शांति और संतोष का अनुभव हुआ। इस रहस्य को जानने के लिए वह एक ऋषि के पास गया। ऋषि ने बताया कि उस दिन अनजाने में उसने Safala Ekadashi का व्रत कर लिया था, जिसके प्रभाव से उसे भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त हुआ। इस घटना के बाद लुंबक का हृदय परिवर्तन हो गया, वह अपने पिता के पास लौटा, क्षमा मांगी और धर्म के मार्ग पर चलकर सुखी जीवन जीने लगा।

सफला एकादशी 2025 की तिथि और शुभ समय

साल 2025 में Safala Ekadashi 15 दिसंबर, सोमवार को मनाई जाएगी।
एकादशी तिथि का आरंभ 14 दिसंबर 2025 को शाम 06:49 बजे होगा और समापन 15 दिसंबर 2025 को रात 09:19 बजे होगा।
व्रत का पारण 16 दिसंबर को सुबह 7:07 AM से 9:11 AM के बीच किया जाएगा। द्वादशी तिथि का अंत रात 11:57 PM पर होगा।

सफला एकादशी पर जप किया जाने वाला मंत्र

इस दिन एक विशेष श्लोक का जप करने का विधान है, जो एकादशी व्रत की महिमा को दर्शाता है। शास्त्रों के अनुसार, यह व्रत Ashwamedha Yagna और Rajsuya Yagna जैसे महान यज्ञों से भी अधिक फल देने वाला माना गया है। यह मंत्र व्यक्ति को spiritual merit और divine grace प्रदान करता है।

सफला एकादशी की व्रत विधि और नियम

व्रत की शुरुआत एकादशी की सुबह स्नान और पूजा स्थल की शुद्धि से होती है। भक्त भगवान विष्णु के समक्ष व्रत का संकल्प लेते हैं और पूरे दिन सात्विक जीवन शैली अपनाते हैं। इस दिन rice का सेवन वर्जित माना गया है। वैष्णव परंपरा में भगवान विष्णु की पूजा में Tulsi leaves का विशेष महत्व होता है।

पूजा में incense sticks, diya, flowers, sweets और sacred items अर्पित किए जाते हैं। शाम के समय Vishnu Aarti की जाती है और परिवार के साथ प्रसाद वितरित किया जाता है। कई भक्त पूरी रात जागरण करते हैं, जिसमें bhajan, kirtan और mantra chanting की जाती है। माना जाता है कि यह रात्रि जागरण negative karma को नष्ट करता है।

दान और पुण्य का महत्व

सफला एकादशी के दिन charity और compassion का विशेष महत्व होता है। गरीबों और जरूरतमंदों को food donation, clothes और daily essentials देना अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। यह कार्य व्यक्ति के जीवन में positivity और संतुलन लाता है।

सफला एकादशी केवल एक व्रत नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाला आध्यात्मिक अवसर है, जो faith, discipline और devotion के माध्यम से जीवन को सफल बनाता है।

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