वृद्धावस्था पेंशन देने में जमकर मनमानी ,इसका खुलासा आधार सत्यापन के दौरान

वृद्धावस्था पेंशन देने में जमकर मनमानी ,इसका खुलासा आधार सत्यापन के दौरान

यूपी के मैनपुरी जिले में वृद्धावस्था पेंशन देने में जमकर मनमानी की गई है. इसका खुलासा आधार सत्यापन के दौरान हो रहा है. 25 जून तक आधार सत्यापन का काम पूरा किया जाना है. 97 हजार से अधिक लोगों को वृद्धावस्था पेंशन दी जा रही है. आश्चर्य की बात यह है कि सत्यापन के दौरान 4400 से अधिक लोग अब तक मृतक मिले हैं, यानि ये लोग मर चुके थे लेकिन पेंशन ले रहे थे. एक दिन पहले ही इस मुद्दे में समाज कल्याण अधिकारी को हटाया गया है.

वृद्धावस्था पेंशन में मुर्दों को पेंशन देने की कहानी विकास भवन में चर्चा का विषय बनी हुई है. खास बात यह है कि पेंशनधारकों का सत्यापन हर वर्ष कराया जाता है जिसमें अपात्रों के नाम हटा दिए जाते हैं. मृतकों के खाते में पेंशन भेजनी बंद की जाती है लेकिन हाल ही में आधार सत्यापन प्रारम्भ कराया गया तो मामला चौंकाने वाला सामने आया.

97 हजार में से 50 फीसदी सत्यापन का काम पूरा हो गया है, मृतकों की संख्या बढ़ती जा रही है. सीडीओ विनोद कुमार का बोलना है कि जो लोग मृतक निकल रहे हैं, उनके खातों में पेंशन भेजने का काम बंद करा दिया गया है. मुर्दों को पेंशन दिए जाने के मुद्दे में जो कमेटी बनाई गई है उसकी जांच रिपोर्ट का इन्तजार है, इसके बाद रिकवरी कराई जाएगी.

ब्लॉक          लाभार्थी          मृतक
सुल्तानगंज     10245           472
बरनाहल        8020            423
कुरावली        10074           510
जागीर            6062            404
बेवर              14957           516
घिरोर             6677            395
किशनी           8557            510
करहल           10522           479
मैनपुरी            14752          493
कुल                89336          4216
नौ निकाय        8037            227
कुल                97923          4443


अब दवाओं के साइड इफेक्ट को भी बतायेगा IIT कानपुर

अब दवाओं के साइड इफेक्ट को भी बतायेगा IIT कानपुर

हम लोग जो दवाइयां खाते है उनका शरीर, कोशिकाओं और अन्य हिस्सों में क्या असर होता है यह जानने के लिए अब हमें अन्य राष्ट्रों के भरोसे नहीं रहना पड़ेगा. अब यह सुविधा आईआईटी कानपुर में जल्द प्रारम्भ होने जा रही है. इस संस्थान ने राष्ट्र का सबसे बड़ा माइक्रोस्कोप आ गया है. इसे साइंस एंड इंजीनियरिंग रिसर्च बोर्ड के 30 करोड़ रुपये के योगदान से नीदरलैंड से मंगवाया गया है. यह स्कोप इतना बड़ा है कि इसके लिए नयी बिल्डिंग बनवाने की तैयारी भी पूरी की जा चुकी है. अभी माइक्रोस्कोप को संस्थान की हवाई पट्टी के पास एडवांस इमर्जिंग सेंटर में रखवाया गया है. यह माइक्रोस्कोप क्रायो इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप कहता है, जिसके माध्यम से प्रोटीन की सिग्नलिंग कराई जा सकती है.

दवाइयां बनाने की प्रोसेस होगी आसान
किडनी, लिवर, दिमाग, फेफड़े, दिल आदि में परेशानी होने पर प्रोटीन की सिग्नलिंग प्रभावित हो जाती है. कई बार इसकी रफ्तार काफी तेज हो सकती है. जानकारों के अनुसार कोशिकाओं के अंदर एक प्रोटीन से दूसरे प्रोटीन को संदेश देना या रासायनिक बदलाव कराने से परफेक्ट दवाएं बनाई जा सकेगी. ऐसे दवाइयां बनाने की प्रोसेस राष्ट्र में काफी आसान हो सकेगी.

10 हजार किलो वजन है
स्कोप आईआईटी के बायोलॉजिकल साइंस एंड बायो इंजीनियरिंग के प्रो अरुण कुमार शुक्ला ने बताया कि, क्रायो इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप में (-180) डिग्री सेल्सियस तक का तापमान रखने की सुविधा है. इसका वजन करीब 10 हजार किलो है. अभी पैकिंग खोली नहीं गई है. इसके लिए नयी बिल्डिंग बनाई जा रही है, जिसमें जब यह स्कोप चले तो वाइब्रेशन एकदम भी न हो.

देश भर के संस्थान ले सकेंगे सहयोग
स्टार्टअप इनोवेशन इंक्यूबेशन सेंटर के इंचार्ज प्रो अमिताभ बंद्योपाध्याय ने बताया कि, संस्थान में सुविधा मिलने के बाद नया सेंटर खोलने की प्लानिंग है, जिसका लाभ राष्ट्र भर के संस्थान ले सकेंगे. क्रायो इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप की सुविधा उन्हें मिल सकेगी. नयी दवाएं खोजने में काफी सरलता होगी. यह काफी सस्ती होंगी. अभी ज्यादातर फार्मूले विदेशी कंपनियों के हैं, उन्होंने उसका पेटेंट करा रखा है