गाजियाबाद में बन रहा चिपियाना आरओबी

गाजियाबाद में बन रहा चिपियाना आरओबी

नई दिल्‍ली दिल्‍ली-मेरठ एक्‍सप्रेसवे (Delhi-Meerut Expressway) से दिल्‍ली से मेरठ की ओर जाने वाले हजारों गाड़ी चालकों का 15 अगस्‍त के बाद समय बचेगा गाजियाबाद में बन रहा चिपियाना आरओबी (Chipiyana ROB) तैयार हो जाएगा इसके बाद दिल्‍ली से मेरठ तक गाड़ी चालक सीधा फर्राटा भर सकेंगे, यानी बीच में कहीं भी उन्‍हें जाम में नहीं फंसना पड़ेगा एनएचएआई (NHAI) ने आरओबी से ट्रैफिक चलाने की डेडलाइन की घोषणा कर दी है

दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर एक अप्रैल 2021 से ही गाड़ी दौड़ने प्रारम्भ हो चुके हैं, लेकिन चिपियाना आरओबी का निर्माण पूरा नहीं हो पाया गाड़ी चालकों की सुविधा के लिए पूरा मेरठ एक्‍सप्रेसवे खोल दिया गया था एनएचएआई ने अब टोल वसूली भी प्रारम्भ कर दी है, इसलिए आरओबी का निर्माण जल्द से जल्द पूरा करने की प्रयास की जा रही है रेलवे से ट्रैफिक ब्लॉक मिलने के बाद एनएचएआई ने इस सप्‍ताह आरओबी का गर्डर रखने का काम पूरा कर लिया है यानी रेलवे ट्रैक के दोनों ओर बनाए गए पिलर्स पर गर्डर रख दिए गए

दिल्‍ली-एनसीआर के लोग ले सकेंगे रोपवे के यात्रा का मजा, गाजियाबाद के तीन अन्‍य रूटों पर भी रोपवे चलाने की तैयारी

एनएचएआई के प्रोजेक्‍ट डायरेक्‍टर अरविंद कुमार बताते हैं 15 जुलाई तक ढांचा रखने का काम पूरा कर लेने के बाद सड़क निर्माण प्रारम्भ करा दिया जाएगा चिपियाना आरओबी 15 अगस्त तक बनकर तैयार हो जाएगा अगस्त में इस पर गाड़ी फर्राटा भरने लगेंगे हाल ही में आरओबी का गर्डर लांच कर दिया गया है, अब 2385 टन वजनी लोहे का ढांचा इस पर रखा जाएगा हालांकि पिलर्स पर गर्डर रख दिए गए हैं लेकिन अभी लोहे का ढांचा रखना बाकी है इन गर्डर पर रखने का काम 26 जून को किया जाएगा

रोजाना गुजर रहे हैं 52 हजार से अधिक वाहन

एक्‍सप्रेस-वे से प्रतिदिन करीब 52000 से अधिक गाड़ी गुजर रहे हैं इसमें दिल्‍ली से मेरठ आने और जाने वाले गाड़ी चालक शामिल हैं चिपियाना आरओबी का काम पूरा होने के बाद गाड़ी वालकों को सुविधा होगी सामान्‍य दिनों में आफिस ऑवर में यहां पर गाड़ी चालकों का 10 मिनट मे का समय आरओबी निर्माण की वजह से बर्बाद होता था, जो बच सकेगा


अब दवाओं के साइड इफेक्ट को भी बतायेगा IIT कानपुर

अब दवाओं के साइड इफेक्ट को भी बतायेगा IIT कानपुर

हम लोग जो दवाइयां खाते है उनका शरीर, कोशिकाओं और अन्य हिस्सों में क्या असर होता है यह जानने के लिए अब हमें अन्य राष्ट्रों के भरोसे नहीं रहना पड़ेगा. अब यह सुविधा आईआईटी कानपुर में जल्द प्रारम्भ होने जा रही है. इस संस्थान ने राष्ट्र का सबसे बड़ा माइक्रोस्कोप आ गया है. इसे साइंस एंड इंजीनियरिंग रिसर्च बोर्ड के 30 करोड़ रुपये के योगदान से नीदरलैंड से मंगवाया गया है. यह स्कोप इतना बड़ा है कि इसके लिए नयी बिल्डिंग बनवाने की तैयारी भी पूरी की जा चुकी है. अभी माइक्रोस्कोप को संस्थान की हवाई पट्टी के पास एडवांस इमर्जिंग सेंटर में रखवाया गया है. यह माइक्रोस्कोप क्रायो इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप कहता है, जिसके माध्यम से प्रोटीन की सिग्नलिंग कराई जा सकती है.

दवाइयां बनाने की प्रोसेस होगी आसान
किडनी, लिवर, दिमाग, फेफड़े, दिल आदि में परेशानी होने पर प्रोटीन की सिग्नलिंग प्रभावित हो जाती है. कई बार इसकी रफ्तार काफी तेज हो सकती है. जानकारों के अनुसार कोशिकाओं के अंदर एक प्रोटीन से दूसरे प्रोटीन को संदेश देना या रासायनिक बदलाव कराने से परफेक्ट दवाएं बनाई जा सकेगी. ऐसे दवाइयां बनाने की प्रोसेस राष्ट्र में काफी आसान हो सकेगी.

10 हजार किलो वजन है
स्कोप आईआईटी के बायोलॉजिकल साइंस एंड बायो इंजीनियरिंग के प्रो अरुण कुमार शुक्ला ने बताया कि, क्रायो इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप में (-180) डिग्री सेल्सियस तक का तापमान रखने की सुविधा है. इसका वजन करीब 10 हजार किलो है. अभी पैकिंग खोली नहीं गई है. इसके लिए नयी बिल्डिंग बनाई जा रही है, जिसमें जब यह स्कोप चले तो वाइब्रेशन एकदम भी न हो.

देश भर के संस्थान ले सकेंगे सहयोग
स्टार्टअप इनोवेशन इंक्यूबेशन सेंटर के इंचार्ज प्रो अमिताभ बंद्योपाध्याय ने बताया कि, संस्थान में सुविधा मिलने के बाद नया सेंटर खोलने की प्लानिंग है, जिसका लाभ राष्ट्र भर के संस्थान ले सकेंगे. क्रायो इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप की सुविधा उन्हें मिल सकेगी. नयी दवाएं खोजने में काफी सरलता होगी. यह काफी सस्ती होंगी. अभी ज्यादातर फार्मूले विदेशी कंपनियों के हैं, उन्होंने उसका पेटेंट करा रखा है