DM ऑफिस के अंदर टॉप 10 बकायेदारों के नाम का बोर्ड लगा

DM ऑफिस के अंदर टॉप 10 बकायेदारों के नाम का बोर्ड लगा

सुल्तानपुर डीएम ऑफिस के अंदर टॉप 10 बकायेदारों के नाम का बोर्ड लगा है. सभी पर 3 करोड़ 3 लाख 81 हजार रुपये बकाया है. सभी फरार हो गए हैं. ऋण चुकता करने से पहले यह फरार हो गए हैं. इनके विरूद्ध आरसी तक की कार्रवाई हो चुकी है. इसके बाद भी इनमें से किसी ने भी ऋण नहीं भरा.

मेसर्स श्री इंटरप्राइजेज के नाम 95.23 लाख का लोन बकाया
जिलाधिकारी कार्यालय में दस बकायेदारों में पहला नाम लंभुआ के जासापारा के मेसर्स श्री इंटरप्राइजेज का नाम दर्ज है. उन्होंने वाणिज्य कर विभाग से 95.23 लाख रुपये का लोन ले रखा है. इसके बाद इसी तहसील के मानापुर के रहने वाले राकेश का नाम लिखा है. राकेश ने प्रतिकर से 62.94 लाख का ऋण लिया है. तीसरे नंबर पर शहर के दरियापुर निवासी रजी अहमद पुत्र रफीउल्ला खान का नाम दर्ज है. रजी ने मोहम्मद रजी पोल्टी केयर नाम से अपनी फर्म के नाम बैंक से 22.55 लाख का लोन लिया लेकिन, भरा नहीं किया. बल्दीराय तहसील के हलियापुर निवासी कुंवर विष्णु कुमार सिंह ने HDFC बैंक से 22.55 लाख का लोन लिया है. इन्होंने भी वापस नहीं किया है.

​​​​​​​जल्द होगी रिकवरी की कार्रवाई
कलेक्ट्रेट में लगी सूची में 5वें नंबर पर सदर तहसील के रवनिया पश्चिम निवासी विभूति शंकर मिश्रा का नाम लिखा हुआ है. विभूति ने उप-श्रमायुक्त के यहां से 19.07 लाख रुपये का कर्जा लिया है. हुसैनगंज बंधुआकला के मेसर्स गणेश ट्रेडर्स के प्रोपाइटर त्रिभुवन नाथ ने वाणिज्य कर विभाग से 18.05 लाख रुपये का ऋण लिया है. लंभुआ तहसील के परसरामपुर के रहने वाले राकेश कुमार चतुर्वेदी ने प्रतिकर से 17.67 लाख, शहर के डिहवा शक्ति नगर निवासी जयकुमार मिश्रा ने मेसर्स शिवा कांसट्रक्शन कंपनी के नाम पर वाणिज्य कर से 17.62 लाख, धम्मौर के जैतापुर निवासी राजाराम ने बैंक से 16.95 लाख और शहर के शाहगंज बाधमंडी निवासी संजीव कुमार अग्रवाल ने आरएस ट्रेडर्स के नाम पर बैंक से 11.81 का लोन ले रखा है लेकिन उसे अदा नहीं किया. SDM सदर सीपी पाठक ने बताया कि सभी के रिकॉर्ड चेक कराए जा रहे हैं, जल्द ही रिकवरी कराई जाएगी. वापस नहीं करने पर इनके विरूद्ध कार्रवाई होगी.


अब दवाओं के साइड इफेक्ट को भी बतायेगा IIT कानपुर

अब दवाओं के साइड इफेक्ट को भी बतायेगा IIT कानपुर

हम लोग जो दवाइयां खाते है उनका शरीर, कोशिकाओं और अन्य हिस्सों में क्या असर होता है यह जानने के लिए अब हमें अन्य राष्ट्रों के भरोसे नहीं रहना पड़ेगा. अब यह सुविधा आईआईटी कानपुर में जल्द प्रारम्भ होने जा रही है. इस संस्थान ने राष्ट्र का सबसे बड़ा माइक्रोस्कोप आ गया है. इसे साइंस एंड इंजीनियरिंग रिसर्च बोर्ड के 30 करोड़ रुपये के योगदान से नीदरलैंड से मंगवाया गया है. यह स्कोप इतना बड़ा है कि इसके लिए नयी बिल्डिंग बनवाने की तैयारी भी पूरी की जा चुकी है. अभी माइक्रोस्कोप को संस्थान की हवाई पट्टी के पास एडवांस इमर्जिंग सेंटर में रखवाया गया है. यह माइक्रोस्कोप क्रायो इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप कहता है, जिसके माध्यम से प्रोटीन की सिग्नलिंग कराई जा सकती है.

दवाइयां बनाने की प्रोसेस होगी आसान
किडनी, लिवर, दिमाग, फेफड़े, दिल आदि में परेशानी होने पर प्रोटीन की सिग्नलिंग प्रभावित हो जाती है. कई बार इसकी रफ्तार काफी तेज हो सकती है. जानकारों के अनुसार कोशिकाओं के अंदर एक प्रोटीन से दूसरे प्रोटीन को संदेश देना या रासायनिक बदलाव कराने से परफेक्ट दवाएं बनाई जा सकेगी. ऐसे दवाइयां बनाने की प्रोसेस राष्ट्र में काफी आसान हो सकेगी.

10 हजार किलो वजन है
स्कोप आईआईटी के बायोलॉजिकल साइंस एंड बायो इंजीनियरिंग के प्रो अरुण कुमार शुक्ला ने बताया कि, क्रायो इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप में (-180) डिग्री सेल्सियस तक का तापमान रखने की सुविधा है. इसका वजन करीब 10 हजार किलो है. अभी पैकिंग खोली नहीं गई है. इसके लिए नयी बिल्डिंग बनाई जा रही है, जिसमें जब यह स्कोप चले तो वाइब्रेशन एकदम भी न हो.

देश भर के संस्थान ले सकेंगे सहयोग
स्टार्टअप इनोवेशन इंक्यूबेशन सेंटर के इंचार्ज प्रो अमिताभ बंद्योपाध्याय ने बताया कि, संस्थान में सुविधा मिलने के बाद नया सेंटर खोलने की प्लानिंग है, जिसका लाभ राष्ट्र भर के संस्थान ले सकेंगे. क्रायो इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप की सुविधा उन्हें मिल सकेगी. नयी दवाएं खोजने में काफी सरलता होगी. यह काफी सस्ती होंगी. अभी ज्यादातर फार्मूले विदेशी कंपनियों के हैं, उन्होंने उसका पेटेंट करा रखा है