विदेशों में सबसे बेहतरीन गेंदबाजी करने वाले भारतीय क्रिकेटर 80 वर्ष के हुए

विदेशों में सबसे बेहतरीन गेंदबाजी करने वाले भारतीय क्रिकेटर 80 वर्ष के हुए

नयी दिल्ली: भारतीय क्रिकेट की ऐतिहासिक स्पिन चौकड़ी के एक मेम्बर व अपने समय के सबसे बेहतरीन ऑफ स्पिन गेंदबाजों में से एक ईरापल्ली प्रसन्ना (Erapalli Prasanna) आज अपना 80वां बर्थडे मना रहे हैं। प्रसन्ना भारतीय क्रिकेट के उस दौर के खिलाड़ी हैं, जब देशी भूमि हो या विदेशी हर स्थान भारतीय गेंदबाजी का झंडा बुलंद रखने की जिम्मेदारी स्पिनरों की ही होती थी। तेज गेंदबाजी के नाम पर टीम का कोई भी खिलाड़ी नयी गेंद लेकर 2-3 ओवर फेंकता था व उसके बाद पिच पर दोनों छोर से कमर कस लेते थे भारतीय स्पिनर। इसके बावजूद उस दौर में टीम इंडिया ने विदेशी भूमि पर अपने गेंदबाजों की बदौलत जो कुछ ऐतिहासिक जीत हासिल की थीं, उनमें से कई में प्रसन्ना का भी बेहतरीन सहयोग रहा था। शायद आपको पता न हो, लेकिन विदेशी भूमि पर किसी भी भारतीय गेंदबाज का एक पारी में सबसे बेहतरीन प्रदर्शन का रिकॉर्ड आज भी प्रसन्ना के ही नाम पर है।

न्यूजीलैंड के विरूद्ध किया था करिश्मा

प्रसन्ना ने न्यूजीलैंड के विरूद्ध ऑकलैंड के मैदान पर 24 से 28 जून 1976 तक खेले गए टेस्ट मैच में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए 11 विकेट चटकाए थे, जिसमें उन्होंने मैच की दूसरी पारी में महज 76 रन देकर 8 विकेट लेने का करिश्माई प्रदर्शन भी दिखाया था। प्रसन्ना का यह गेंदबाजी प्रदर्शन आज तक विदेशी भूमि पर किसी भी भारतीय गेंदबाज का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन है।

न्यूजीलैंड में अगला टेस्ट जीतने में लगे थे 33 साल

प्रसन्ना के इस प्रदर्शन की बदौलत टीम इंडिया ने 1976 के उस टेस्ट मैच को 8 विकेट से जीता था, जो उस समय न्यूजीलैंड की भूमि पर हिंदुस्तान की पिछले 5 टेस्ट मैच में चौथी जीत थी। लेकिन टीम इंडिया की यह जीत न्यूजीलैंड की भूमि पर उसकी 20वीं सदी की आखिरी जीत भी साबित हुई थी। टीम इंडिया ने कीवी टीम के विरूद्ध उसी के घर में अगला मैच 33 वर्ष बाद 2009 में जीता था, जब महेंद्र सिंह धौनी की कप्तानी में सचिन तेंदुलकर के बेहतरीन 160 रन व हरभजन सिंह के पारी में 6 विकेट की बदौलत टीम इंडिया ने हैमिल्टन टेस्ट में कीवी टीम को 10 विकेट से पीटा था।

ये रहे हैं टीम इंडिया के लिए विदेश में बेस्ट गेंदबाजी प्रदर्शन

प्रसन्ना के अतिरिक्त टीम इंडिया के लिए विदेशी भूमि पर बेहतरीन गेंदबाजी प्रदर्शन करने वाले गेंदबाजों में कपिल देव (85 रन पर 8 विकेट, बनाम पाकिस्तान, लाहौर टेस्ट, 1983) का नाम दूसरे नंबर पर है। तीसरे नंबर पर अनिल कुंबले (141 रन देकर 8 विकेट, बनाम ऑस्ट्रेलिया, सिडनी टेस्ट, 2004) व चौथे नंबर पर इरफान पठान (59 रन देकर 7 विकेट, बनाम जिंबाब्वे, हरारे टेस्ट, 2005) आते हैं। इस कड़ी में 5वां जगह इशांत शर्मा (83 रन देकर 7 विकेट, बनाम वेस्टइंडीज, नार्थ साउंड एंटिगा, 2016) के नाम पर है।

भज्जी से पहले था सबसे ज्यादा ऑफ स्पिन विकेट का रिकॉर्ड

प्रसन्ना ने अपने करियर के दौरान 49 टेस्ट मैच खेलकर 189 विकेट चटकाए थे, जो कई दशक तक किसी भारतीय ऑफ स्पिनर के सबसे ज्यादा विकेट का रिकॉर्ड रहा था। बाद में हरभजन सिंह ने उनका रिकॉर्ड तोड़ा था। अब भी प्रसन्ना का नाम सबसे ज्यादा विकेट वाले भारतीय ऑफ स्पिनरों में भज्जी व रविचंद्रन अश्विन के बाद तीसरे नंबर पर आता है।

वेंकटराघवन के साथ खेलने का हुआ नुकसान

प्रसन्ना का दुर्भाग्य कहिए या सौभाग्य, यदि वे स्पिन चौकड़ी यानी खुद प्रसन्ना, बिशन सिंह बेदी, भगवत चंद्रशेखर व आर। वेंकटराघवन के युग में पैदा नहीं होते तो उनके खाते में दोगुने विकेट होते। वे व वेंकटराघवन दोनों ही वर्ल्ड क्लास ऑफ स्पिनर थे व इस कारण आमतौर पर उन्हें एक साथ मैच खेलने का मौका नहीं मिलता था। इसका नुकसान दोनों ही गेंदबाजों को करियर में कम टेस्ट व कम विकेट के तौर पर भुगतना पड़ा। इसके अतिरिक्त कई बार बेदी व चंद्रशेखर की बेहतरीन गेंदबाजी के चलते भी प्रसन्ना को कम विकेट पर संतोष करना पड़ा।