आपके पाचन तंत्र वाली अग्नि को सुधार सकता अधिक गुणों वाले खाद्य पदार्थो का सेवन

आपके पाचन तंत्र वाली अग्नि को सुधार सकता अधिक गुणों वाले खाद्य पदार्थो का सेवन

पाचन क्रिया हमारे शरीर के जरूरी हिस्सों में से एक है. यह हमारे शरीर में गए खाने को पचाती है व हमें ऊर्जा प्रदान करती है. एक स्वस्थ पाचन क्रिया शरीर में गए खाने को पचाके हमे उस में से अधिकतम पोषक तत्वों को शरीर के हर हिस्से तक पहुंचाती है. परन्तु हम सबको किसी न किसी मौके पर बुरी पाचन क्रिया का अनुभव हुआ है. पाचन तंत्र के अंदर उपस्थितअच्छे व बुरे बैक्टीरिया के असंतुलन से हमें ऐसा अनुभव होता है. यह संतुलन निद्रा, दवाइयां ज्यादा मात्रा में मीठा लेना व शराब के सेवन से बिगड़ जाता है.

स्वस्थ व एकाग्र होकर रहना
आजकल की जीवनशैली में हर इंसान एक साथ कई कार्य करने की सोचता है व यहीं से समस्याए प्रारम्भ होती है. आयुर्वेद हमेशा एकाग्र होकर खाने का सुझाव देता है. ऐसा करने से हमारे मस्तिष्क को हमारे खाने के बारे में ठीक जानकारी मिलती है. हल्का, सादा खाना, सुपाच्य खाना एवं सा्त्विवक खाना आपकी अग्नि को ऊर्जावान रहने में सबसे ज्यादा सहायक है.

अग्नि को बुझाने वाले पदार्थो से परहेज
बुरे तरल पदार्थ आपकी अग्नि को बुझा सकते हैं. अधिक मात्रा में तरल पदार्थ जैसे कि कोल्ड ड्रिंक्स आदि का सेवन आपके पाचन तंत्र को असंतुलित कर सकता है. ज्यादा सोना, ज्यादा खाना भी आपकी अग्नि का अस्तित्व मुसीबत में डालते हैं.

अपनी अग्नि को सुधारना
हम अपनी अग्नि को पहले से सुधार सकते हैं जिससे कि वो अधिक अच्छे परिणाम दे. खाने से पहले हल्का टहलना अपनी अग्नि को सुधरने का एक आसान व लाभकारी सुझाव है.प्रातः काल उठते ही 2 गिलास पानी पीना भी अपने पाचन तंत्र को चरम सीमा पर रखेगा.

अधिक गुणों वाले खाद्य पदार्थो का सेवन करना
दिनचर्या में गुणवान खाद्य पदार्थो का आहार सेवन करना आपके पाचन तंत्र वाली अग्नि को सुधार सकता है. आपके आहार में पर्याप्त मात्रा में सब्जियां एवं फल होना आपके पाचन तंत्र के लिए आवश्यक है. इस तरह का आहार आपको पाचन में होने वाली बिमारियों से बचा सकता है.

रोज एक ही समय पर खाना
यह आदत अपनाने में थोड़ी कठिन है पर इस आदत के फायदे भरपूर हैं. रोज एक ही समय पर खाना आपके पाचन तंत्र को चरमसीमा पर रखकर उसकी उत्पादकता बढ़ाता है.

ध्यान लगाना
अपनी फिक्रों व तनावों को दूर रखने का ध्यान लगाने से बेहतर तरीका शायद ही कोई होगा. हर रोज केवल पांच मिनट एकाग्रता से ध्यान लगाना आपको असंख्य फायदा दे सकता है.

विषहरण क्रिया
आयुर्वेद पाचन तंत्र को विषहरण क्रिया से साफ रखने की सलाह भी देता है. विषहरण क्रिया हर एक इंसान के लिए अलग हो सकती है. विषहरण क्रिया से आप अपनी अग्नि को एक ताकतवर ढंग से फिरसे प्रारम्भ कर सकते हैं. विषहरण क्रिया से आप अपनी अंदरूनी प्रणाली की मरम्मत कर उसे उसकी उच्चतम उत्पादकता पर पहुंचा सकते हैं. विषहरण क्रिया फलों के जूस के सेवन से लेकर पंचकर्म र्थेरेपी तक विस्तारित है. पाचन तंत्र में संतुलन बनाए रखना एक स्वस्थ एवं लम्बी जिंदगी को बढ़ावा देता है.

सही मात्रा में पानी का सेवन
रोज ठीक मात्रा में पानी पीना आपके पाचन तंत्र के लिए सबसे ज्यादा लाभदायक होता है. पानी न केवल पाचनतंत्र के अंदर उपस्थित बैक्टीरिया में संतुलन बनाये रखता है बल्कि सारेशरीर में खाने से मिले पोषक तत्वों को पहुंचाने में सहायक रहता है.

ताजी हवा व कुछ आसन
जैसे अग्नि को जलने के लिए हवा की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार आपके पाचन तंत्र की अग्नि को भी बरकरार रखने के लिए ताजी हवा की आवश्यकता होती है. प्रातः काल घूमने जाना या फिर लंबी पैदल यात्रा करना आपको ताजी हवा के सेवन का अनुभव करा सकती है.

वर्जिश जरूरी है
बहुत ज्यादा समय तक एक ही स्थान पर बैठके कार्य करना व् पढ़ना आपके शरीर की पाचन क्रिया को धीमा कर देता है. आयुर्वेद हमेशा ठीक प्रकार की वर्जिश करने की सलाह देता है जिससे की आपका पाचन तंत्र एवं शरीर दोनों ही उच्चतम बने रहे.