आप भी जान लीजिए विटामिन डी की कमी से होने वाली ये बीमारियां

आप भी जान लीजिए विटामिन डी की कमी से होने वाली ये बीमारियां

ये बात सच है कि विटामिन डी और बी-12 हड्डियों के लिए बहुत जरूरी हैं । अगर ये कम हो तो आस्टियोपोरोसिस जैसी गंभीर बीमारियों हो सकती हैं। लेकिन विटामिन डी की कमी से केवल इतना ही नहीं होता बल्कि इसकी कमी से कैंसर और डिप्रेशन जैसी बीमारी होने का खतरा बना रहता है। डायबिटीज और दिल की बीमारी का कारण भी विटामिन डी की कमी बन सकती है।

एक्सपर्ट्स के मुताबिक विटामिन डी की कमी हड्डियों की मजबूती को ही इफेक्ट नहीं करता बल्कि इसकी कमी से हार्ट अटैक, हार्ट फेल्योर और डायबिटीज जैसे गंभीर रोग भी हो सकते हैं। खराब लाइफस्टाइल के कारण अब विटामिन डी लोगों में माइनस में होता जा रहा है। यही कारण है कि युवाओं में भी हार्ट डिजीज और डायबिटीज की दिक्कत ज्यादा देखी जा रही है।

विटामिन डी कैल्शियम के अवशोषण के लिए जरूरी होता है। अगर विटामिन डी कम हो तो शरीर हड्डियों से कैल्शियम लेना शुरू कर देता है और इस कारण आस्टियोपोरोसिस की दिक्कत शुरू हो जाती है। वहीं, विटामिन डी की कमी से टाइप 2 डायबिटीज होने का खतरा बढ़ जाता है। विटामिन डी की कमी से शरीर में ग्लूकोज प्रतिरोधकता पर असर पड़ता है।

अस्थमा और हार्ट अटैक
विटामिन डी की कमी से अस्थमा की शिकायत हो सकती है। विटामिन डी की कमी और फेफड़ों की कार्यक्षमता में सीधा संबंध होता है। विटामिन डी सूजन पैदा करने वाले प्रोटीन को फेफड़ों से दूर रखने का काम करता है। अगर इस विटामिन की कमी होती है तो सूजन बढ़ने लगती है और अस्थमा की दिक्कत हो सकती है। विटामिन डी की कमी से ब्लड प्रेशर बढ़ने का खतरा होता है। विटामिन डी की कमी से हार्ट अटैक तक आ सकता है।

सूजन- जलन और कोलेस्ट्रॉल की समस्या
विटामिन डी की कमी का सीधा संबंध सूजन संबंधी बीमारियों से है। शरीर में अगर प्रचुर मात्रा में विटामिन डी न हो तो रहेयूमेटॉयड अर्थराइटिस, लुपस, इंफ्लेमेटरी बॉउल डिजीज (आईबीडी) और टाइप वन डायबिटीज होने का खतरा बढ़ जाता है। जब शरीर को धूप नहीं मिलती तो विटामिन डी बनाने वाले तत्व कोलेस्ट्रॉल में बदल जाते हैं। विटामिन डी का स्तर कम होने से इम्यून सिस्टम तेजी से कम होने लगता है। इससे सर्दी व जुकाम और संक्रमण और बीमारियों की शिकायत बढ़ जाती है।

इनमें भरा है विटामिन डी का खजाना

  • मछली: सालमोन और ट्यूना 'विटामिन डी' का खजाना हैं। सालमोन से विटामिन डी की हमारी रोजाना जरूरत का एक तिहाई हिस्सा पूरा हो सकता है।
  • दूध: दूध से रोजाना के विटामिन डी का 20 फीसदी हिस्सा पूरा हो जाता है।
  • अंडे: अंडे की जर्दी में सफेदी से ज्यादा विटामिन डी पाया जाता है।
  • संतरे का रस: दूध की तरह ही संतरे का रस भी विटामिन डी से भरपूर होता है। संतरे के जूस को अपने आहार का में शामिल करें।
  • मशरूम: मशरूम में भी विटामिन डी प्रचुर मात्रा में होता है। शीटेक मशरूम में सफेद मशरूम के तुलना में अधिक विटामिन डी होता है। अगर आप अपने आहार में विटामिन डी को जोड़ना चाहते है तो उसमें शीटेक मशरूम को शामिल करें।
  • पनीर: पनीर के सभी प्रकार में विटामिन डी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। रिकोटा चीज में अन्य पनीर की तुलना में ज्यादा विटामिन डी होता है।
  • कॉड लिवर ऑयल: कॉड लिवर ऑयल विटामिन डी का सबसे अच्छा स्रोत है। इसमें मौजूद विटामिन ए और डी का काफी उच्च स्तर होता है।