सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस में इन जरूरी बातों का रखें ध्यान

सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस में इन जरूरी बातों का रखें ध्यान

आधुनिक जीवनशैली की कुछ प्रमुख बीमारियों में सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस भी है. योग की कुछ क्रियाओं से इसका पूरी तरह उपचार किया जा सकता है. जानकारी दे रहे हैं योगाचार्य कौशल कुमार

सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस गर्दन में स्थित रीढ़ की हड्डियों में लम्बे समय तक कड़ापन होने, गर्दन तथा कंधों में दर्द तथा जकड़न के साथ सिर में दर्द होने की स्थिति को कहते हैं. यह दर्द धीरे-धीरे कंधे से आगे बाहों तथा हाथों तक बढ़ जाता है.

क्या हैं कारण
आधुनिक जीवनशैली इस समस्या का सबसे प्रमुख कारण है. कंप्यूटर पर अधिक देर तक कार्य करना, गलत ढंग से बैठना, आरामतलब जिन्दगी, व्यायाम न करने की आदत तथा मानसिक तनाव इस समस्या के प्रमुख कारण हैं. योग के एक्सरसाइज से इस समस्या से मुक्ति पाने में सहायता मिलती है.

योग क्रियाएं
कुर्सी पर या जमीन पर रीढ़ को सीधी कर बैठ जाएं. चेहरे को दाएं कंधे की तरफ सुविधाजनक स्थिति तक ले जाएं. इसके बाद वापस पूर्व स्थिति में आ जाएं. इसके तुरन्त बाद चेहरे को बाएं कंधे की ओर ले जाएं. पांच सेकंड तक इस स्थिति में रुक कर वापस पूर्व स्थिति में आएं. अब सिर को पीछे की ओर आरामदायक स्थिति तक ले जाएं. थोड़ी देर इस स्थिति में रुकने के बाद पूर्व स्थिति में आएं. सिर को सामने की ओर न झुकने दें.

दोनों हाथों की उंगलियों को आपस में गूंथ कर हथेलियों को सिर के पीछे मेडुला पर रख कर हथेलियों से सिर को आगे की ओर तथा सिर से हाथों को पीछे की ओर सारे जोर के साथ इस प्रकार दबाव दें कि हाथ तथा सिर अपनी स्थान से हिलें-डुलें नहीं. इस स्थिति में कुछ समय तक दबाव रखते हुए वापस पूर्व स्थिति में आएं. इसके बाद हथेलियों को माथे पर रख कर दबाव डालें. अन्त में हथेलियों से ठुड्डी को सारे जोर के साथ दबाएं. इन्हें पांच-पांच बार दोहराएं.

आसन
ऐसे लोगों को गर्दन को आगे झुकाने वाले आसनों का एक्सरसाइज नहीं करना चाहिए. रोग की गंभीर स्थिति में सबसे पहले फिजियोथेरेपी का सहारा लेना चाहिए. जब थोड़ा आराम मिल जाए, तो वज्रासन, सर्पासन, मकरासन, भुजंगासन का एक्सरसाइज करना चाहिए. जब दर्द बहुत कम हो जाए तो योग्य मार्गदर्शन में मत्स्यासन, सुप्त वज्रासन, आसान धनुरासन आदि को एक्सरसाइज में जोड़ना चाहिए.

इन बातों का रखें ध्यान
गर्दन पर पट्टा बांधना लाभदायक होता है.
कड़े बिस्तर पर सोना चाहिए तथा अधिक वजन नहीं उठाना चाहिए.
सिर को आगे की ओर झुका कर कार्य नहीं करना चाहिए.