बच्चों के स्वभाव में असुरक्षा और बदलाव देखें तो हो जाए सतर्क, मानसिक दबाव हो सकता है इसका मुख्य कारण

बच्चों के स्वभाव में असुरक्षा और बदलाव देखें तो हो जाए सतर्क, मानसिक दबाव हो सकता है इसका मुख्य कारण

अगर आपको लगता है कि बच्‍चे हर चिंता से मुक्‍त होते हैं, तो आप गलत सोच रहे हैं। समाज में बढ़ते अपराध, परिवारों में बढ़ती कलह और बदहे हुए लाइफ स्‍टाइल के कारण छोटे बच्‍चे भी कई तरह की चिंताओं के शिकार हो रहे हैं। कुछ तो इतने ज्‍यादा तनाव में हैं कि उन्‍हें अपनी सुरक्षा का डर सताने लगा है। जिससे ग्रस्‍त होकर वे आत्‍महत्‍या जैसा कदम उठाने की भी कोशिश कर रहे हैं। बचपन पर छाए संकट के इस बादल को छांटना हम सब की जिम्‍मेदारी है। इसलिए अपने बच्‍चे में अगर आप किसी भी तरह की असुरक्षा और बदलाव देखें तो सतर्क हो जाएं। यह मानसिक रोग की दस्‍तक हो सकती है।

बढ़ रहा है मानसिक दबाव

मानसिक बीमारी उम्र, लिंग, नस्ल, पृष्ठभूमि आदि की परवाह किए बिना किसी को भी प्रभावित कर सकती है। इसका मतलब यह है कि मानसिक समस्‍या का अनुभव टीन एज और बच्चे कर सकते हैं जैसे कि चिंता, अवसाद, ध्यान का अभाव या हाइपर एक्टिविटी डिसऑर्डर (ADHD), ईटिंग डिसऑर्डर, आत्महत्या आदि। कनाडा में किए गए एक नए अध्ययन में पाया गया कि ओंटारियो के प्रत्येडक पांच बच्चों और युवाओं में से एक मानसिक विकार से पीड़ित है।

मानसिक सेहत पर किया गया अध्‍ययन

कनाडा में किए गए एक नए अध्ययन में पाया गया कि ओंटारियो के प्रत्‍येक पांच बच्चों और युवाओं में से एक मानसिक विकार से पीड़ित है। हालांकि, अध्ययन के मुताबिक, एक तिहाई लोगों में ये पाया गया कि वो मेंटल हेल्‍थ की जांच करा रहे थे। ओंटारियो चाइल्ड हेल्थ स्टडी (OCHS) के निष्कर्षों से यह भी पता चला है कि 4 से 11 वर्ष की आयु के लड़कों में हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर 1983 में 9 प्रतिशत थी जो कि 2014 में 16 प्रतिशत हो गई।

आत्‍महत्‍या की प्रवृत्ति

हालांकि, शोधकर्ताओं ने 12 से 16 वर्ष की उम्र के बीच विघटनकारी व्यवहार (disruptive behaviour) में 10 से 3 प्रतिशत की गिरावट देखी। कनाडाई जर्नल ऑफ साइकेट्री में प्रकाशित अध्ययन में यह भी पाया गया कि 8 प्रतिशत से अधिक युवाओं ने आत्महत्या के बारे में सोचा, और 4 प्रतिशत ने पिछले वर्ष में आत्महत्या के प्रयास भी किए।

बाधित करती है विकास

मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं आजकल बच्चों में बहुत ही आम हो गई है, जो उनके सीखने, व्यवहार की भावनाओं को काफी हद तक प्रभावित करती हैं। वास्तव में, यह पाया गया है कि बच्चे और किशोर मानसिक स्वास्थ्य कठिनाइयों के लिए कुछ निश्चित परेशानियों से जूझते हैं और इसके लिए सहायता प्राप्त करने के लिए अतिरिक्त बाधाओं का भी सामना करते हैं।

नहीं पहचान पाते अभिभावक

शायद, ऐसा इस लिए होता है क्‍योंकि माता-पिता बच्चों में मानसिक बीमारी की पहचान करने में असमर्थ होते हैं। कई बच्चे जिन्‍हें उपचार से लाभ मिल सकता है लेकिन सहायता न मिल पाने की वजह से चीजें खराब हो जाती हैं। इसलिए, माता-पिता के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वे बच्चों में मानसिक समस्याओं के चेतावनी संकेतों को समझें और वे अपने बच्चे की मदद करें।

बच्‍चों में मानसिक समस्‍याओं के लक्षण और संकेत

मानसिक बीमारी वाले बच्चे एक विशेष स्थिति के लक्षणों को विकसित कर सकते हैं, हालांकि, नीचे कुछ सामान्य संकेत दिए गए हैं जो आपके बच्चे के मानसिक स्वास्थ्य का संकेत दे सकते हैं:

मूड में बदलाव- जैसे उदासी की भावनाएं जो दो सप्ताह के लिए हो सकती हैं

डर का अनुभव

जोखिम भरा व्यवहार – जैसे कि अपनी सुरक्षा के लिए कम चिंता दिखाना या दूसरों को चोट पहुंचाने की इच्छा व्यक्त करना।

ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई

वजन का कम होने लगना

शारीरिक लक्षण- जैसे सिरदर्द और पेट दर्द के बजाए घबराहट या उदासी

यदि आपका बच्चा इनमें से कोई भी बदलाव दिखा रहा है, खासकर यदि यह उनके दैनिक जीवन को प्रभावित कर रहा है, तो आपको अपने बच्चे के डॉक्टर या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श ले सकते हैं, जो यह निर्धारित करने में मदद कर सकता है कि आपके बच्चे के लिए सबसे अच्छा काम क्या हो सकता है। उचित उपचार और समर्थन के साथ, आप अपने बच्चे को शारीरिक और भावनात्मक दोनों तरह से पनपने में मदद कर सकते हैं।