पशुओं की हत्या का शव फैकने वाले आरोपियों की गाड़ी रामपुर से बरामद

पशुओं की हत्या का शव फैकने वाले आरोपियों की गाड़ी रामपुर से बरामद

विस्तार रुद्रपुर में हुए पशु हत्याकांड के खुलासे में जुटी जिले की पुलिस टीमों ने बुधवार को तीसरे दिन भी यूपी के रामपुर जिले में डेरा डाले रखा। जिले के पुलिस अधिकारी टीमों के संपर्क में रहे और उन्हें दिशा-निर्देश देते रहे। पुलिस ने पशु तस्करों की गाड़ी बरामद कर ली है। पुलिस का दावा है कि गुरुवार को आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। 



बीते सोमवार को रुद्रपुर के एक खाली प्लॉट में पशुओं की हत्या कर शव फेंके जाने के मामले में पुलिस ने रामपुर जिले के तीन आरोपियों को चिह्नित कर लिया है। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए जिले की एसओजी समेत करीब 10 टीमें गठित की गईं, लेकिन आरोपी तीसरे दिन भी पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ सके। उनकी तलाश में जिले की पुलिस टीमें और रामपुर पुलिस लगातार उनके संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है। रामपुर पुलिस के सहयोग से आरोपियों की घटना में प्रयुक्त गाड़ी बरामद कर ली गई है।
इसके साथ ही कई संदिग्धों से पूछताछ जारी है। इस घटना के खिलाफ लोगों के आक्रोश को देखते हुए पुलिस पर जल्द खुलासे को लेकर दबाव है। डीआईजी नीलेश आनंद भरणे ने बताया कि आरोपियों की गाड़ी रामपुर से बरामद कर सीज कर दी है। गुरुवार तक तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

कांग्रेस नेता अनिल शर्मा ने मांगी सुरक्षा
कांग्रेस नेता अनिल शर्मा ने भाजपा विधायक राजकुमार ठुकराल और उनके भाई संजय ठुकराल से जान का खतरा बताते हुए बुधवार को एसएसपी से सुरक्षा की मांग की। कांग्रेस कमेटी के नगर अध्यक्ष जगदीश तनेजा व अनिल शर्मा एसएसपी डीएस कुंवर से मिले। शर्मा ने कहा कि भविष्य में उन्हें जान का खतरा हो सकता है। इस पर एसएसपी ने उन्हें सुरक्षा के प्रति आश्वस्त किया।


क्या बिना मर्जी लगाया जा सकता है कोरोना का टीका? सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दिया जवाब

क्या बिना मर्जी लगाया जा सकता है कोरोना का टीका? सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दिया जवाब

नई दिल्ली: केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी कोविड-19 टीकाकरण दिशानिर्देशों में किसी व्यक्ति की सहमति के बिना उसका जबरन टीकाकरण कराने की बात नहीं की गई है। दिव्यांगजनों को टीकाकरण प्रमाणपत्र दिखाने से छूट देने के मामले पर केंद्र ने न्यायालय से कहा कि उसने ऐसी कोई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी नहीं की है, जो किसी मकसद के लिए टीकाकरण प्रमाणपत्र साथ रखने को अनिवार्य बनाती हो।

केंद्र ने गैर सरकारी संगठन एवारा फाउंडेशन की एक याचिका के जवाब में दायर अपने हलफनामे में यह बात कही। याचिका में घर-घर जाकर प्राथमिकता के आधार पर दिव्यांगजनों का टीकाकरण किए जाने का अनुरोध किया गया है। हलफनामे में कहा गया है कि भारत सरकार और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से जारी दिशानिर्देश संबंधित व्यक्ति की सहमति प्राप्त किए बिना जबरन टीकाकरण की बात नहीं कहते। केंद्र ने कहा कि किसी भी व्यक्ति की मर्जी के बिना उसका टीकाकरण नहीं किया जा सकता।