दिल्ली : ग्राहक बनकर जेवर चुराने वाली मां-बेटी गिरफ्तार, डीयू से बीकॉम कर रही है युवती

दिल्ली : ग्राहक बनकर जेवर चुराने वाली मां-बेटी गिरफ्तार, डीयू से बीकॉम कर रही है युवती

विस्तार जाफराबाद पुलिस ने मां-बेटी के एक ऐसे गैंग का खुलासा किया है जो ग्राहक के रूप में दुकानों पर जाकर जेवर चोरी कर लेती थीं। पुलिस ने अंबेडकर निवासी आरोपी मां-बेटी को गिरफ्तार कर लिया, जिनके पास चोरी के कुछ जेवर भी बरामद हुए। बेटी डीयू के एक कॉलेज में बीकॉम फाइनल इयर की छात्रा है


उत्तर-पूर्वी जिला पुलिस उपायुक्त संजय कुमार सैन ने बताया कि 31 दिसंबर को जाफराबाद के एक ज्वेलर ने दुकान में टॉप्स के बॉक्स चोरी होने की शिकायत दी थी। उन्होंने बताया कि उनकी दुकान पर दो महिलाएं आई थीं। वह दूसरे ग्राहकों को जेवर दिखाते रहे उसी दौरान दोनों महिलाएं टॉप्स का बॉक्स चोरी करके ले गईं। 

पुलिस ने मामला दर्ज कर आसपास लगे सीसी टीवी कैमरों की फुटेज देखी। फुटेज में दोनों महिलाएं एक स्कूटी पर सवार होकर वहां पहुंचती दिखीं। पुलिस ने स्कूटी के नंबर की जांच की तो अंबेडकर नगर का निकला। पुलिस टीम ने अंबेडकर नगर जाकर बुधवार दोपहर आरोपी महिलाओं को दबोच लिया, जो आपस में मां-बेटी हैं। उनके पास चोरी के सात जोड़ी टॉप्स बरामद हुए। बेटी डीयू के एक कॉलेज में बीकॉम की छात्रा है। महिला अपने पति से अलग रहती है।

पूछताछ के दौरान मां-बेटी ने अपना गुनाह कबूल कर लिया। महिला ने बताया कि दोनों बढ़िया कपड़े पहनकर दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में वारदात को अंजाम देती थीं। आरोपी महिला के खिलाफ पहले से चोरी के तीन और उसकी बेटी पर दो मामले दर्ज हैं। 


क्या बिना मर्जी लगाया जा सकता है कोरोना का टीका? सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दिया जवाब

क्या बिना मर्जी लगाया जा सकता है कोरोना का टीका? सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दिया जवाब

नई दिल्ली: केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी कोविड-19 टीकाकरण दिशानिर्देशों में किसी व्यक्ति की सहमति के बिना उसका जबरन टीकाकरण कराने की बात नहीं की गई है। दिव्यांगजनों को टीकाकरण प्रमाणपत्र दिखाने से छूट देने के मामले पर केंद्र ने न्यायालय से कहा कि उसने ऐसी कोई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी नहीं की है, जो किसी मकसद के लिए टीकाकरण प्रमाणपत्र साथ रखने को अनिवार्य बनाती हो।

केंद्र ने गैर सरकारी संगठन एवारा फाउंडेशन की एक याचिका के जवाब में दायर अपने हलफनामे में यह बात कही। याचिका में घर-घर जाकर प्राथमिकता के आधार पर दिव्यांगजनों का टीकाकरण किए जाने का अनुरोध किया गया है। हलफनामे में कहा गया है कि भारत सरकार और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से जारी दिशानिर्देश संबंधित व्यक्ति की सहमति प्राप्त किए बिना जबरन टीकाकरण की बात नहीं कहते। केंद्र ने कहा कि किसी भी व्यक्ति की मर्जी के बिना उसका टीकाकरण नहीं किया जा सकता।