ऑफिस के तनाव को दूर करने के लिए अपनाए ये सालार टिप्स

ऑफिस के तनाव को दूर करने के लिए अपनाए ये सालार टिप्स

एक अध्ययन के अनुसार, इंडिया इंक का हर पांच में से एक कर्मचारी वर्कप्लेस डिप्रेशन से जूझ रहा है. कार्य का दबाव, दफ्तरों का माहौल, अनावश्यक राजनीति, घर व दफ्तर के बीच का कठिन तालमेल आदि ऐसे तमाम कारक हैं, जिनसे तनाव पैदा होता है. इस तनाव से बचें कैसे, इसके बारे में जानकारी दे रही हैं विनीता झा

आप जिस दफ्तर में दिन-रात कार्य कर रहे हैं, वहां के माहौल व रहन-सहन का मानसिक व शारीरिक, दोनों तरह के स्वास्थ्य पर बहुत प्रभाव पड़ता है, क्योंकि 24 घंटे में से कम से कम 8 घंटे सामान्य तौर पर दफ्तरों में गुजरते हैं, जो जीवनशैली का एक बड़ा भाग है. सामान्य तौर पर सारे दिन दफ्तर में लगातार बैठ कर कार्य करना, फिर कार्यालय या पब्लिक ट्रांस्पोर्ट में बैठकर घर आना, डिनर करना व सो जाना ही हमारी दिनचर्या का भाग बन जाता है. अगले दिन फिर इसी दिनचर्या का अनुसरण करना होता है. यही जीवनशैली सालों तक चलती है, जिसका परिणाम कई तरह की बीमारियों व मानसिक तनाव में निकलता है. इसका प्रबंधन किया जाना चाहिए.

सेहत को संतुलित रखना जरूरी-
कार्य के दबाव के बावजूद अपनी शारीरिक स्वास्थ्य को संतुलित करके रखा जाना महत्वपूर्ण है. धर्मशिला नारायणा सुपरस्पेशलिटी अस्पताल के कार्डियोलॉजी विभाग के डायरेक्टर डाक्टर आनंद पाण्डेय बताते हैं कि लगातार एक ही पॉस्चर में बैठे-बैठे कार्य करना, व फिर आकस्मित भूख लगने या तलब लगने पर खूब सारा फास्ट फूड खा लेना मोटापे व दिल रोग के खतरे को बढ़ा देता है. ऐसे में कुछ बातों का ध्यान रखना महत्वपूर्ण होता है.

नियमित व्यायाम की आदत डालें-
अकसर कार्य का हवाला देकर बहुत से युवा व्यायाम व अन्य शारीरिक गतिविधियों की आवश्यकता को नजरअंदाज करते हैं. सच्चाई यह है कि स्वस्थ शरीर के लिए खानपान के साथ-साथ व्यायाम का भी बहुत महत्व है. हल्का-फुल्का व्यायाम करते रहने से रक्तचाप सामान्य रहता है, शरीर से अलावा फैट निकलता है, इम्यूनिटी या रोग-प्रतिरोधक क्षमता विकसित होती है. ऐसे में यदि कार्य के अधिक तनाव से जूझ रहे हैं तो सावधानी महत्वपूर्ण है.
-योग आदि में कई तरह के ऐसे हल्के व्यायाम हैं, जिन्हें सरलता से किया जा सकता है. किसी विशेषज्ञ की सलाह लेकर इनको नियमित करें. 
-अपने मनपसंद खेल को धीरे-धीरे अपनी जीवनशैली में स्थान दें, क्योंकि ये न केवल आपकी शारीरिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक असर डालेंगे, बल्कि तनाव से भी बचाएंगे. 
-विशेषज्ञ की सलाह से वीकेंड या छुट्िटयों में कोई फिटनेस कोर्स जॉइन करें. 

थोड़ा-थोड़ा कई बार खाएं-
दफ्तरों में कार्य करने वाले लोग अकसर शिकायत करते हैं कि वे अपने स्वाद व खाने की तलब पर नियंत्रण नहीं रख पाते व ज्यादा खा लेते हैं, जिसका परिणाम मोटापे के रूप में सामने आता है. दरअसल इसके कई कारणों में से एक है, कार्य को समर्पित समय में करने की प्रयास में लंबे समय तक कुछ नहीं खाना व फिर आकस्मित ज्यादा खा लेना. ऐसा न करें व थोड़े-थोड़े अंतराल पर कुछ न कुछ पौष्टिक खाते रहें. इनमें फल, सलाद आदि को भी शामिल कर सकते हैं. 

बेड पर बैठकर लैपटॉप पर न करें काम-
व्यस्त कर्मचारी अकसर बहुत से कारणों से दफ्तर का कार्य घर पर भी लाते हैं. ऐसे में अगर आप लैपटॉप लेकर कार्य करने के लिए बेड पर बैठ जाते हैं तो इससे पूरा पॉस्चर गड़बड़ होने कि सम्भावना है. कार्य करने के लिए हमेशा टेबल-कुर्सी पर ही बैठें.  दफ्तर में हर घंटे में एक बार जरूर सीट से उठें व 3-4 मिनट की वॉक करें. 

इन बातों का रखें ध्यान-
’समय पर नींद न आने या नींद ज्यादा आने जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं तो बिना किसी हिचक के मनोचिकित्सक से परामर्श लें. ऐसे लक्षणों को सामान्य नहीं मानना चाहिए. 
-छुट्टियों में थोड़ा आराम करें, ताकि शरीर अपने आपको बेहतर कर सके. कुछ लोग कार्यालय से अलावा कार्य लेकर छुट्टियों के समय में भी कार्य करते रहते हैं. अगर आप भी ऐसा करते हैं तो शरीर को इसका नुकसान उठाना पड़ेगा.  
-ऑफिस में कई बार सहकर्मियों की वजह से भी तनाव होने कि सम्भावना है. अगर कार्य को लेकर कोई टकराव है तो उसे ठीक ढंग से सुलझाने की प्रयास की जानी चाहिए. यह भी ध्यान रखें कि आपके व्यवहार से किसी सहकर्मी को ठेस न पहुंचे. 
-अगर कार्यालय में लगातार तनाव बने रहने का कोई कारण समझ में आता है व उसके लिए कार्यालय में किसी से बात करने की आवश्यकता महसूस होती है, तो बात जरूर करें. इस बात का ध्यान रखें कि लगातार तनाव में रहकर आप अपने कार्य में बेहतर परिणाम नहीं दे सकते.
डाक्टर मृणमय कुमार दास, सीनियर कंसल्टेंट, डिपार्टमेंट ऑफ बिहेवियरल साइंसेज, जेपी अस्पताल, नोएडा