पीरियड्स में पेट फूलने की समस्या से हैं परेशान तो अपनाए ये उपचार

पीरियड्स में पेट फूलने की समस्या से हैं परेशान तो अपनाए ये उपचार

औसतन हर महिला (Women) के जीवनकाल में करीब 450 पीरियड्स (Periods) होते हैं। मासिक धर्म (Menstrual Cycle) के इस चक्र के साथ स्त्रियों को हर महीने दर्द (Pain) के अतिरिक्त कई व तकलीफों का भी सामना करना पड़ता है जैसे- पेट में गैस की समस्या व पेट फूलने की परेशानी या ब्लोटिंग। इनमें से ज्यादातर समस्याएं शरीर में होने वाले हॉर्मोनल (Hormones) परिवर्तन के कारण होती हैं। मासिक धर्म के दौरान शरीर में क्या-क्या होता है, पहले ये जान लेते हैं।


  1. पीरियड्स के पहले फेज में शरीर में एस्ट्रोजेन हॉर्मोन का लेवल बढ़ने लगता है.। एस्ट्रोजेन, फर्टिलाइजेशन के लिए अंडों को तैयार कर उन्हें रिलीज करने का कार्य करता है। दूसरे फेज में प्रोजेस्टेरॉन हॉर्मोन का लेवल बढ़ने लगता है जो गर्भाशय की दीवार को इम्प्लांटेशन के लिए तैयार करता है। जब गर्भाशय से बाहर आया अंडा (ओवम) फर्टिलाइज नहीं होता तब पीरियड्स आते है। इसके बाद शरीर में प्रोजेस्टेरॉन व एस्ट्रोजेन का लेवल आकस्मित से कम होने लगता है।

  2. रिसर्च में यह बात साबित हो चुकी है कि फीमेल संभोग हार्मोन शरीर के तरल पदार्थों व इलेक्ट्रोलाइट के संतुलन को प्रभावित करता है। शरीर में पानी व नमक के अवरोधण के कारण ही पीरियड्स के दौरान पेट फूलने (ब्लोटिंग) की समस्या होती है।

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मासिक धर्म में पेट फूलने के लक्षण
पेट की गड़बड़ी व पेट फूलना ये कुछ ऐसे सामान्य इशारा हैं, जिससे पता चलता है कि आपका पीरियड्स जल्द प्रारम्भ होने वाला है। पेट फूलने के लक्षणों में ये बातें भी शामिल हैं :


  • पेट में भारीपन महसूस होना

  • पेट में कड़ापन या खिंचाव महसूस होना

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18 से 55 वर्ष के बीच की 156 स्वस्थ स्त्रियों पर की गई छोटी सी स्टडी में 62% स्त्रियों को मासिक धर्म से पहले पेट फूलने की समस्या का सामना करना पड़ा व 51% स्त्रियों को पीरियड के दौरान ब्लोटिंग की परेशानी हुई।

पीरियड्स के दौरान पेट फूलने का कारण
पीरियड्स के दौरान शरीर में पानी व नमक का असंतुलन व पेट की गतिविधियों में परिवर्तन के ये कारण हैं :


  • हार्मोन्स से जुड़े परिवर्तन : शरीर में एस्ट्रोजेन व प्रोजेस्टेरॉन में हुआ बदलाव, तरल पदार्थों व इलेक्ट्रोलाइट के संतुलन को प्रभावित करता है. इस कारण शरीर में वॉटर रिटेंशन होने लगता है।

  • आंत की प्रक्रिया का धीमा होना : मासिक धर्म के दौरान, कुछ स्त्रियों के शरीर में पेट व आंत की प्रक्रिया धीमी हो जाती है। इस कारण पेट में भारीपन व कब्ज की भी परेशानी हो सकती है।

  • सिकुड़न में बढ़ोतरी : आंत की मांसपेशियों में होने वाली सिकुड़न की वजह से खाना, आंत में इधर से उधर गतिशील होने लगता है। मासिक धर्म के दौरान, गर्भाशय से प्रोस्टाग्लानडिस का उत्पादन होता है, जिसकी वजह से आंत में सिकुड़न बढ़ने लगती है व इसी कारण बहुत सी स्त्रियों को पीरियड्स में दस्त या डायरिया का भी अनुभव होता है

पीरियड्स में पेट फूलने की समस्या से कैसे बचें
पेट फूलने की समस्या कई बार बेहद तकलीफदेह हो सकती है. हालांकि, कई सरल उपायों से इस हालात से छुटकारा पाया जा सकता है :


  • हेल्दी डाइट लें : कम नमक व फाइबर से भरपूर डाइट का सेवन करें, क्योंकि इसकी मदद से आपके पेट व आंत की गतिविधियां बेहतर होने लगती हैं व शरीर में वॉटर रिटेंशन कम करने में मदद मिलती है. साथ ही साथ खूब सारा पानी पिएं।

  • मैग्नीशियम से भरपूर चीजें खाएं : पर्याप्त मात्रा में मैग्नीशियम का सेवन करने से मांसपेशियों को आराम मिलता है व प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम (पीएमएस) के लक्षणों को कम करने में मदद मिलती है। बादाम, मूंगफली, काजू, दलिया व सोया मिल्क मैग्नीशियम से भरपूर खाद्य पदार्थ हैं।

  • पोटैशियम से भरपूर चीजें खाएं : पोटैशियम, खून में सोडियम की मात्रा को संतुलित करता है व इससे पेट फूलना कम होता है। नमक-पानी का अवरोधन भी कम होता है. पालक, केला व ऐवकाडो खाएं, इसमें पोटैशियम भरपूर मात्रा में होता है।

  • एक्सरसाइज करें : थोड़ी बहुत अभ्यास करने से तनाव कम होता है व पीएमएस के लक्षण जैसे - क्रैम्प्स को कम करने में मदद मिलती है। आप चाहें तो पीरियड्स के दौरान योग, स्विमिंग आदि कर सकती हैं।

  • प्रोबायोटिक सप्लिमेंट : अगर आपकी आंत (गट) स्वस्थ है तो वह हार्मोन्स के लेवल में होने वाले परिवर्तन को सरलता से सह पाएगा। लिहाजा अपनी डाइट में प्रोबायोटिक चीजों को शामिल करें. इससे आंत में गुड बैक्टीरिया का विकास बढ़ता है व पेट फूलने के लक्षण कम होते हैं।

  • घरेलू तरीका : आप चाहें तो पीरियड्स में पेट फूलने की समस्या से बचने के लिए घरेलू तरीकों को भी आजमा सकती हैं। गर्म पानी में एक चौथाई चम्मच शाही जीरा डालकर पिएं।