स्टैमिना बढ़ाने के लिए ये काम जरूर करे

स्टैमिना बढ़ाने के लिए ये काम जरूर करे

स्‍टैमिना का मतलब केवल एक विस्तारित अवधि के लिए एक गतिविधि को करने के लिए शक्ति और ऊर्जा ही नहीं है, बल्कि यह बीमारी और तनावपूर्ण स्थितियों से लड़ने में मदद भी करता है। बच्‍चा अगर स्‍कूल से पढ़ कर आता है और तुरंत ही बिस्‍तर पर गिर जाता है तो यह सही बात नहीं है। क्‍या आपको नहीं लगता कि उसके अंदर को कोई कमी है या उसे ठीक तरह से पूरा पोषण नहीं मिल रहा है। भागती - दौड़ती जिंदगी में सबसे ज्‍यादा जरूरत होती है एनर्जी, पॉवर और स्‍टेमिना की। अगर आपके शरीर में स्‍टेमिना यानि ताकत की कमी है तो आप किसी भी काम को अच्‍छे से नहीं कर सकते। स्‍टैमिना बढ़ाने के के कुछ आसान उपाय  

# आपको यह देखने की भी जरूरत है कि आप क्या खा रहे हैं। अधिक मात्रा में फल और सब्जियां, बिना चर्बी के मांस, बहुत कम वसा वाले उत्पादों के साथ अच्छी तरह से संतुलित आहार शामिल करें। यह आपके शरीर को स्वस्थ रहने में और आपकी शारीरिक और मानसिक दोनों की सहनशक्ति को बढ़ाने में मदद करेगा।

# सभी प्रकार के आउटडोर खेल थकान को दूर करने और आपके स्‍टैमिना के स्तर को बढ़ावा देने के लिए सबसे अच्छे हैं, क्योंकि यह एरोबिक व्यायाम का एक रूप हैं। फुटबॉल, बास्केटबॉल और अन्य सभी बहुत तेज़ी से दौड़ने वाले खेल आपके दिल को मजबूत बनाने में मदद करेंगे।

# अगर आपने अभी-अभी स्‍टैमिना बढ़ाना शुरू किया है, तो शुरुआत में छोटे-छोटे स्‍टेप लें, न कि एकदम से बहुत कठिन और सख्‍त कार्यक्रम बनायें। आप स्टैमिना चाहते हैं, तो आपको काम के बीच आराम से बचना चहिए। लेकिन अगर आप तनाव महसूस कर रहे हैं, तो कुछ सेकंड के लिए आराम करें।

# अपने शरीर के लिए ऊर्जा की सतत आपूर्ति बनाए रखने के लिए नियमित अंतराल पर थोड़ा भोजन खाएं। आपके शरीर में पानी कम है, तो यह आपके रक्त को जमा देगा और इस प्रकार रक्त संचार धीमा हो जाएगा और आपकी कोशिकाओं में ऑक्सीजन की कमी कर देगा।

# हम सब में अच्छी आदतें और बुरी आदतें होती हैं, जिनके बारे में हम सब जानते हैं। दोनों की सूचि बनाये और खराब आदतों, जैसे धूम्रपान, अत्‍याधिक शराब पीना, जंक फूड की लत आदि से दूर रहें। इन आदतों को मार कर ही आप फिट रह सकते हैं और अपने स्‍टैमिना को बढ़ा सकते हैं।


दिल से जुड़ी बीमारियों का पता लगाने वाले कुछ कॉमन और पेनलेस टेस्ट

दिल से जुड़ी बीमारियों का पता लगाने वाले कुछ कॉमन और पेनलेस टेस्ट

हार्ट डिसीज भारत ही नहीं, दुनिया में मौतों के सबसे प्रमुख कारणों में से एक है। यह ऐसी बीमारी है, जिसके खतरे को अवेयरनेस से टाला जा सकता है या कम किया जा सकता है। वर्ल्ड हार्ट डे के मौके पर आज हम आपको इस बीमारी से जुड़े रिस्क फैक्टर्स, प्रिवेंशन और डायग्नोसिस से परिचित कराने जा रहे हैं।

हार्ट की एनाटॉमी

हार्ट एक मस्कुलर ऑर्गन है। यह एक पंप की तरह कार्य करता है। इसकी मदद से शरीर के सारे अंगों में ब्लड व ऑक्सीजन की सप्लाई होती है।

भार- 7-15 आउंस (200-425 ग्राम)

साइज- बंद मुट्ठी के बराबर

पोजीशन

यह चेस्ट कैविटी के अंदर होता है जोकि ब्रेस्टबोन के बाई ओर होती है और पेरिकार्डियम से घिरी रहती है।कॉर्डियोवेस्कुलर सिस्टम

यह शरीर के अंदर नसों का एक जटिल नेटवर्क होता है। इसकी मदद से ब्लड को बॉडी का सभी ऑर्गन्स, टिश्यूज और सेल्स में ट्रांसपोर्ट होता है।


1,00,000 हार्टबीट्स प्रति दिन

2,000 गैलन (7571 लीटर) ब्लड प्रति दिन

यह चार चैंबर में डिवाइड होता है।

इलेक्ट्रिकल पेसमेकर सेल्स

इसकी मदद से हार्ट सिकुड़ता है। साथ ही ब्लड को पंप भी करता है।

पारस हॉस्पिटल, पंचकुला के कार्डिएक साइंस, चेयरमैन डॉ. हरिंदर के. बाली ने बताया कि, हाल के सालों में ऐसा देखा जा रहा है कि भारत में युवाओें में हार्ट की बीमारी ज्यादा हो रही है। भारत के लोगों में हार्ट की बीमारी पश्चिमी देशों के नागरिकों की तुलना में 10 या 15 साल पहले हो रही है। ऐसा पहले भी होता था लेकिन अब यह ज्यादा हो रहा है। चूंकि हाल ही ने एक जवां सेलिब्रिटी की हार्ट अटैक से मौत होने पर इस समस्या के प्रति लोगों का ध्यान आकर्षित हुआ है। हार्ट की बीमारी को पहचानने के लिए काफ़ी टेस्ट होते हैं और हम उन लोगों को हार्ट की जांच कराने के लिए पहले सलाह देते थे जो 40 साल से ज्यादा होते थे लेकिन अब हम 35 साल से ज्यादा उम्र वालों को भी हार्ट की जांच कराने की सलाह दे रहे हैं ख़ासकर उनको जिनके परिवार में किसी को हार्ट की समस्या हो चुकी हो। हमें अपने ब्लड टेस्ट की जांच कराके हार्ट के हेल्थ के बारे में पता करते रहना चाहिए। इसके अलावा हार्ट की कंप्रेहेसिव जांच भी करानी चाहिए।'


हार्ट डिसीज डायग्नोसिस के लिए कॉमन टेस्ट

ईसीजी (इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम)

बेहद सिंपल और पेनलेस टेस्ट है, जो बताता है कि आपका दिल कितनी तेजी से धड़क रहा है और इसका रिदम (निरंतर या इररेगुलर) है।

होल्टर मॉनीटरिंग

एक पोर्टेबल डिवाइस के जरिए ईसीजी की निरंतरता को 24 से 72 घंटे में रिकॉर्ड किया जाता है। ईसीजी में हार्ट रिदम इररेगुलैरिटीज डिटेक्ट नहीं हो पाती तो इस टेस्ट का इस्तेमाल किया जाता है।

स्ट्रेस टेस्टिंग

इसके जरिए देखा जाता है कि हार्ट एबनॉर्मल रिदम या इस्कीमिया (हार्ट मसल्स तक ब्लड फ्लो न पहुंचना) के डेवलप होने से पहले कितना स्ट्रेस मैनेज कर सकता है।

इकोकार्डियोग्राफी (ईको)

इसका इस्तेमाल हार्ट के खराब ब्लड फ्लो एरिया की साउंड वेव्स को देखने के लिए किया जाता है।

चेस्ट एक्सरे

ऑर्गन्स और चेस्ट के अंदर के स्ट्रक्चर (हार्ट, लंग्स और ब्लड वेसेल्स) की पिक्चर ली जाती है। यह हार्ट फेल्योर के कारणों से अवगत कराती है।

एंजियोप्लास्टी

यह एक नॉनसर्जिकल प्रोसीजर है, जिसके जरिए सर्जन ब्लॉक या नैरो कोरोनरी आर्टिरीज को खोलते हैं।

सीएबीजी

यह सर्जरी का एक प्रकार है, जिसमें सर्जन ब्लॉक आर्टिरीज और वेन्स को हटाकर उन्हें सीधे बाईपास कर देता है।