जानिए क्या होती है ब्लड प्रेशर रीडिंग

जानिए क्या होती है ब्लड प्रेशर रीडिंग

जब कभी व्यक्ति की तबियत खराब होती है और वह डॉक्टर के पास जाता है तो डॉक्टर सबसे पहले उसका ब्लड प्रेशर अवश्य नापते हैं। आपने भी कई बार ब्लड प्रेशर रीडिंग करवाई होगी। हाई ब्लड प्रेशर के बारे में पता लगाने के लिए भी ब्लड प्रेशर रीडिंग का बेहद महत्व होता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ब्लड प्रेशर रीडिंग को किस तरह मापा जाता है और इसकी मदद से कैसे ब्लड प्रेशर के हाई या लो होने का पता चलता है। अगर नहीं तो आज इस लेख में हम आपको ब्लड प्रेशर रीडिंग के बारे में विस्तृत जानकारी दे रहे हैं−

नंबरों का अर्थ

कार्डियोलॉजिस्ट अर्थात् हृदय रोग विशेषज्ञ बताते हैं कि ब्लड प्रेशर रीडिंग को दो संख्याओं के साथ माप के रूप में व्यक्त किया जाता है। जिसमें एक संख्या शीर्ष पर और एक बॉटम पर होती है। उदाहरण के लिए, 120/80 मिमी एचजी। शीर्ष संख्या आपके हृदय की मांसपेशियों के संकुचन के दौरान आपकी धमनियों में दबाव की मात्रा को संदर्भित करती है। इसे सिस्टोलिक प्रेशर कहते हैं। वहीं, नीचे की संख्या आपके रक्तचाप को संदर्भित करती है जब आपके दिल की मांसपेशी धड़कनों के बीच होती है। इसे डायस्टोलिक दबाव कहा जाता है। दोनों संख्याएं आपके हृदय स्वास्थ्य की स्थित किा निर्धारण करने में महत्वपूर्ण हैं। डॉक्टरों के अनुसार, अगर रीडिंग के दौरान आदर्श सीमा से अधिक संख्याएं हों तो इसका अर्थ है कि आपका दिल आपके शरीर के बाकी हिस्सों में रक्त पंप करने के लिए बहुत मेहनत कर रहा है।

रक्तचाप की श्रेणियां 

अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन द्वारा मान्यता प्राप्त पांच रक्तचाप रेंज हैं। ब्लड प्रेशर रीडिंग के दौरान नंबरों के आधार पर उसे अलग−अलग श्रेणी में रखा जा सकता है।

सामान्य

हृदय रोग विशेषज्ञ के अनुसार, 120/80 मिमी एचजी से कम रक्तचाप की संख्या को सामान्य सीमा के भीतर माना जाता है। यदि आपके परिणाम इस श्रेणी में आते हैं, तो इसका अर्थ है कि आपका हृदय स्वस्थ तरीके से काम कर रहा है। हालांकि डॉक्टर कहते हैं कि संतुलित आहार का पालन करने और नियमित व्यायाम करने जैसी हृदय−स्वस्थ आदतों को अपनाने से आप लंबे समय तक अपने हृदय को स्वस्थ्य रख सकते हैं।

एलिवेटिड

डॉक्टर बताते हैं कि यह स्थिति तब होती है, जब रीडिंग लगातार 120−129 सिस्टोलिक और 80 मिमी एचजी डायस्टोलिक से कम होती है। इस तरह की रीडिंग जिन लोगों में लगातार आती है, उन्हें उच्च रक्तचाप विकसित होने की संभावना रहती है। इस अवस्था में स्थिति को नियंत्रित करने के लिए समय पर कदम उठाना बेहद आवश्यक है।

उच्च रक्तचाप चरण 1

उच्च रक्तचाप चरण 1 तब होता है जब रक्तचाप लगातार 130−139 सिस्टोलिक या 80−89 मिमी एचजी डायस्टोलिक से होता है। उच्च रक्तचाप के इस स्तर पर, डॉक्टरों को जीवनशैली में बदलाव की संभावना होती है और साथ ही इस अवस्था में दिल के दौरे या स्ट्रोक जैसे हृदय रोग की संभावना अधिक होती है, इसलिए अधिकतर मामलों में डॉक्टर व्यक्ति को कुछ दवाएं लेने की सलाह भी देते हैं।

उच्च रक्तचाप स्टेज 2

उच्च रक्तचाप चरण 2 तब होता है जब रक्तचाप लगातार 140/90 मिमी एचजी या अधिक होता है। डॉक्टर बताते हैं कि उच्च रक्तचाप के इस स्तर पर, डॉक्टरों को रक्तचाप दवाओं के साथ−साथ जीवन शैली में बदलाव करने की आवश्यकता होती है।

आखिरी स्टेज

यह एक बेहद गंभीर चरण है। उच्च रक्तचाप के इस चरण में चिकित्सीय इलाज की जरूरत पड़ती है। कार्डियोलॉजिस्ट के अनुसार, यदि आपका रक्तचाप रीडिंग अचानक 180/120 मिमी एचजी से अधिक हो गया है, तो पांच मिनट प्रतीक्षा करें और फिर अपने रक्तचाप का परीक्षण करें। यदि आपकी रीडिंग असामान्य रूप से अधिक है, तो बिना देर किए तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करें। इस स्थिति में आप सीने में दर्द, सांस की तकलीफ, पीठ दर्द, सुन्नता/कमजोरी, दृष्टि में बदलाव या बोलने में कठिनाई हो सकती है। इस अवस्था में ब्लड प्रेशर के खुद ब खुद कम होने का इंतजार ना करें। तुरंत चिकित्सीय हेल्प लें।