गुणों की खान है अंजीर, जानें 10 चमत्कारिक औषधीय गुण

गुणों की खान है अंजीर, जानें 10 चमत्कारिक औषधीय गुण

अंजीर के बारे में आज हम लोग जानेंगे की अंजीर क्यूं हमें खाना चाहिए। इसमे क्या ऐसा पाया जाता हैं और इसके क्या क्या फायदे हैं। यूनानी में अंजीर को गर्म फल मानते हैं, लेकिन आयुर्वेद में अंजीर को ठंडा औषधिये फल माना गया हैं। अंजीर में बहुत सारी औषधिये गुण पाए जाते हैं।

अंजीर हमारे शरीर की दुर्बलता को खत्म करता हैं, और शरीर को बलशाली बनाता हैं।

अंजीर को दूध में पका के लेने से किसी भी प्रकार की स्नायु दुर्बलता हो उसको कम करता हैं और स्नायु तंत्रिका को पुष्ट करता हैं।

शरीर के यौन शक्ति को बढाने के लिए अंजीर को दूध के साथ लेने से अधिक लाभ होता हैं।

अंजीर में ऐसे तत्व होते हैं जो निम्न रक्त चाप को नियंत्रित कर ह्रदय रक्त चाप को सुसंगठित करता हैं।

कभी कभी हमें अचानक से घबराहट होने लगती हैं। ऐसे स्थिति में अंजीर का सेवन ढूध के साथ करने से आराम या बहुत लाभ मिलता हैं।

शरीर अगर शिथिल पर जाये तो अंजीर का सेवन लाभदायक होता हैं। इससे शरीर को ताकत मिलती है, और शरीर स्फूर्ति महसूस करता हैं।

जिसे भी थकान महसूस होती रहती हो तो उन्हें भी अंजीर का सेवन जरुर करना चाहिए।

पेट की कोइ भी बिमारी हो तो अंजीर का सेवन लाभप्रद होता हैं।

अंजीर में वसा नहीं होता हैं, इसलिए इससे वजन कम करने में बहुत सहायता मिलती हैं।

प्रायः नारियों में स्तन कैंसर का ख़तरा बना रहता हैं। अगर इससे बचाव चाहिए तो अंजीर का सेवन लाभप्रद हैं।


मोबाइल पर ज्यादा समय बिताने से बच्चे हो रहे ओवर डेवलपमेंट का शिकार ; जानिए क्या हैं इससे बचने के तरीके

मोबाइल पर ज्यादा समय बिताने से बच्चे हो रहे ओवर डेवलपमेंट का शिकार ; जानिए क्या हैं इससे बचने के तरीके

आजकल बच्चे क्लास के अलावा असाइनमेंट, रिसर्च और एंटरटेनमेंट के लिए मोबाइल या लैपटॉप का इस्तेमाल करते हैं। इससे उनका स्क्रीन टाइम कहीं ज्यादा बढ़ गया है। बच्चों का मोबाइल के साथ ज्यादा वक्त बिताने से उन पर नेगेटिव असर हो रहा है।

मोबाइल का ज्यादा इस्तेमाल बच्चों की लाइफ स्टाइल में बदलाव ला रहा है जिससे उनमें मोटापा, भूख कम लगना, चिड़चिड़ेपन के अलावा बच्चों के ओवर डेवलपमेंट होने जैसी परेशानियां सामने आ रही हैं। ओवर डेवलपमेंट यानी बच्चे का अपनी उम्र के लिहाज से ज्यादा डेवलप होना। चूंकि बच्चे मोबाइल में कुछ भी देख सकते हैं, इसलिए उम्र के लिहाज से उन्हें जितनी इन्फॉर्मेशन लेनी चाहिए, वो उससे ज्यादा कन्ज्यूम कर रहे हैं।

ज्यादा समय वर्चुअल वर्ल्ड यानी स्क्रीन के सामने बिताने से बच्चे स्पोर्ट्स, फिजिकल एक्टिविटी, लोगों से इंटरैक्ट करने और लाइफ में काम आने वाली कई स्किल्स सीखने में ज्यादा समय नहीं देते, जिससे उनके ओवरऑल डेवेलपमेंट पर असर पड़ता है।