60 वर्ष में पहली बार एशियाई इकोनॉमी में गिरावट, भारतीय अर्थव्यवथा को बड़ा छटका

60 वर्ष में पहली बार एशियाई इकोनॉमी में गिरावट, भारतीय अर्थव्यवथा  को बड़ा छटका

नई दिल्ली: एशियन डेवलपमेंट बैंक ने एशियाई डेवलपमेंट आउटलुक 2020 ( ADB Outlook 2020 ) में एशियाई इकोनॉमी को लेकर बड़ी रिपोर्ट जारी की है. मंगलवार यानी आज जारी हुई इस रिपोर्ट में बोला गया है कि 60 वर्ष में पहली बार एशियाई इकोनॉमी में गिरावट देखने को मिल सकती है. वहीं भारतीय अर्थव्यवस्था पर रिपोर्ट में एडीबी ने बोला है कि वित्त साल 2020-21 में 9 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिल सकती है, जो कि हिंदुस्तान के लिए बड़ा झटका है. आपकी जानकारी के लिए बताते चलें कि इस वर्ष कोरोना वायरस की वजह से भारतीय इकोनॉमी जून तिमाही में 0 से करीब 23 प्रतिशत नीचे चली गई है. एशिया में भारतीय इकोनॉमी का एक अहम भूमिका निभाती है. संभव है कि भारतीय इकोनॉमी में गिरावट की वजह से एशियाई इकोनॉमी में गिरावट का अनुमान लगाया गया हो.

60 वर्ष में पहली बार गिर सकती है एशिया की इकोनॉमी
एशियाई विकास बैंक द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार इस वर्ष एशिया-पेसेफिक के 45 राष्ट्रों में आर्थिक ग्रोथ में 0.7 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिल सकती है. ऐसा 60 वर्ष में पहली बार होने का अनुमान लगाया गया है. एडीबी की चीफ इकोनॉमिस्ट यसूयूकी सवादा ने बोला कि कोविड-19 महामारी से उत्पन्न आर्थिक खतरा प्रबल बना हुआ है, क्योंकि पहले की वेव का प्रकोप आने वाले दिनों व भी बढ़ सकता है. उन्होंने बोला विकासशील एशिया में मंदी पिछले संकटों की तुलना में अधिक व्यापक है. मौजूदा वर्ष में इस क्षेत्र की तीन-चौथाई अर्थव्यवस्थाएं सिकुड़ गई हैं.

भारतीय इकोनॉमी में 9 प्रतिशत की गिरावट
वहीं दूसरी ओर एशियाई विकास बैंक ने मौजूदा वित्त साल 2020-21 में भारतीय अर्थव्यवस्था में 9 प्रतिशत की गिरावट का अनुमान लगाया है. एडीबी के अनुसार हिंदुस्तान में कोरोना वायरस की वजह से आर्थिक गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित हुई हैं. रिपोर्ट के अनुसार हिंदुस्तान में इसका प्रभाव कंज्यूमर परसेप्शन पर भी देखने को मिला है. जिसकी वजह से चालू वित्त साल में सकल घरेलू उत्पाद में 9 प्रतिशत की गिरावट आएगी.

भारत की इकोनॉमी अलगे साल होगी इतनी
वहीं एडीबी ने भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए वित्त साल 2021-22 में जीडीपी का भी अनुमान लगाया है. एडीबी के अनुसार आवाजाही तथा कारोबारी गतिविधियां खुलने से अगले वित्त साल में हिंदुस्तान की आर्थिक वृद्धि दर आठ प्रतिशत की तेजी देखने को मिलेगी. यसूयूकी सवादा ने बोला कि अगले वित्त साल व उससे आगे अर्थव्यवस्था की वृद्धि के लिए महामारी पर रोक के उपाय, जांच, निगरानी व उपचार की क्षमता का विस्तार जरूरी है. इन तरीकों को प्रभावी ढंग से कार्यान्वित करने की आवश्यकता है, तभी अर्थव्यवस्था आगे उबर पाएगी.