RBI का कोरोना से बचाव के लिए नया फैसला, न करें नोटों का लेन देन

RBI का कोरोना से बचाव के लिए नया फैसला, न करें नोटों का लेन देन

कानपुर:एक तरफ बढ़ रहा कोरोना का कहर अब इतना बढ़ चुका है। कि हर तरफ केवल तवाही का मंज़र देखने को मिल रहा है। जंहा अब तक इस वायरस से मरने वालों कि संख्या 5500 से अधिक हो चुकी है। वहीं अभी भी लोगों में इस वायरस का खौफ फैला हुआ है। वहीं इस बीमारी से लड़ने के लिए अब भी चिकित्सक उपचार खोज रहे है। वहीं इस बीमारी से खुद व लोगों को बचाने के लिए स्त्रियों ने एक नयी प्रक्रिया प्रारम्भ कर दी है। वहीं रिजर्व बैंक ने कोरोना वायरस से बचाव के लिए नोटों (नकदी) से दूर रहने की सलाह दी है। रिजर्व बैंक ने सोमवार को स्पष्ट कर दिया कि नोटों को संक्रमण से बचाने का कोई उपाय नहीं है। लोगों को नोटों के सम्पर्क से खुद ही बचना होगा। डिजिटल लेनदेन इसका सबसे बेहतर उपाय है।

मिली जानकारी के अनुसार चीन, इटली व जापान में बैंक से निकले नोटों से भी कोरोना वायरस फैलने के बाद दुनिया स्वास्थ्य संगठन ने संसार भर के केंद्रीय बैंकों को एडवायजरी जारी की है। इसे रिजर्व बैंक ने भी गंभीरता से लिया है। केंद्रीय बैंक ने सभी बैंकों को जनता को गैर-नकद डिजिटल भुगतान विकल्प के लिए प्रेरित करने को बोला है। इस महामारी को रोकने के प्रयासों के तहत सार्वजनिक स्थानों पर जाने से बचने के लिए मोबाइल बैंकिंग, इंटरनेट बैंकिंग, कार्ड आदि जैसे औनलाइन चैनलों के माध्यम से घरों से डिजिटल भुगतान ही बेहतर विकल्प है। इससे नकदी को बार-बार छूने से बचा जा सकता है।

नोटों से हाथों में पहुंच रहा संक्रमण: वहीं यह भी बोला जा रहा है कि इंस्टीट्यूट ऑफ जेनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी की रिपोर्ट में भी करेंसी नोटों से होने वाली गंभीर बीमारियों का जिक्र किया है। रिपोर्ट में बोला गया है कि नकदी के लेनदेन से वायरस एक जगह से दूसरे जगह पर व एक आदमी से दूसरे आदमी में स्थानांतरित हो रहे हैं। 120 करेंसी नोटों की जाँच में 86.4 प्रतिशत नोट संक्रमित पाए गए। ये नोट समाज के हर वर्ग के पास से एकत्र किए गए थे।