शायद आप नहीं जानते होंगे नदी में सिक्के डालने की ये खास वजह

शायद आप नहीं जानते होंगे नदी में सिक्के डालने की ये खास वजह

हमारे यहां कई खास बातें हैं जिन्हें हम देखकर भी अनदेखा कर देते है। लेकिन कुछ बातें हैं जो बेहद परेशान करती है कि आखिर ऐसा क्यों किया जाता है। आज हम आपको एक ऐसे ही रहस्य के बारे में बताने जा रहे है। हम जहां पर भी कोई तालाब या अन्य किसी जल का स्त्रोत देखें तो तुरंत इसमें एक सिक्का डाल दें। ऐसा करना गुड लक माना जाता है। 

नदी में सिक्के डालने की ये खास वजह

इस रिवाज के पीछे एक वजह छिपी हुई है। दरअसल जिस समय नदी में सिक्का डालने की ये प्रथा शुरू हुई थी एस समय तांबे के सिक्के चला करते थे। तांबा पानी का प्यूरीफिकेशन करने में काम आता है इसलिए लोग जब भी नदी या किसी तालाब के आसपास से गुजरते थे तो उसमें तांबे का सिक्का डाल दिया करते थे।


ज्योतिष में भी कहा गया है कि लोगों को अगर किसी तरह का दोष दूर करना हो तो उसके लिए वो जल में सिक्के और कुछ पूजा की सामग्री को प्रवाहित करे। इसके साथ ही ज्योतिष में ये भी कहा गया है कि अगर बहते पानी में चांदी का सिक्का डाला जाए तो उससे दोष खत्म होता है। 


इस मंदिर में बोलती हैं मूर्तियां, रात में आती है बात करने की आवाज

इस मंदिर में बोलती हैं मूर्तियां, रात में आती है बात करने की आवाज

भारतवर्ष में ऐसे कई मंदिर हैं जो अपनी रहस्यमयी कारणों से चर्चा में है और दूर-दूर तक प्रसिद्ध है। आज हम आपको बताएँगे एक ऐसे मंदिर के बारे में बता रहे हैं जहां की मूर्तियां साक्षात इंसानों की तरह बातें करती हैं। इस मंदिर परिसर में किसी के भी नहीं होने पर शब्द गूंजते रहते हैं।

मंदिर में बोलती हैं मूर्तियां

तंत्र साधना के लिए प्रसिद्ध बिहार के इकलौते राज राजेश्वरी त्रिपुर सुंदरी मंदिर में साधकों की हर मनोकामना पूरी होती है। इस मंदिर की सबसे अनोखी मान्यता यह है कि निस्तब्ध निशा में यहां स्थापित मूर्तियों से बोलने की आवाजें आती हैं।

रात में आती है आवाज

मध्य-रात्रि में जब लोग यहां से गुजरते हैं तो उन्हें आवाजें सुनाई पड़ती हैं। मंदिर के इस बात की पुष्टि भी करते हैं। नगर के कई लोगों ने भी रात में मंदिर से बुदबुदाने की आवाज सुनने की बात कही है। ऐसा लगता है मानो मूर्तियां आपस में बातें करती हैं। इस बात को जांचने के लिए वैज्ञानिकों के एक दल ने वहां रिसर्च किया, जिसमें यह निकलकर आया कि वहां कोई भी नहीं होने पर शब्द गूंजते रहते हैं।