हिरासत में बाप-बेटे की मृत्यु का मुद्दा तमिलनाडु सरकार ने CBI को सौंपा

हिरासत में बाप-बेटे की मृत्यु का मुद्दा तमिलनाडु सरकार ने CBI को सौंपा

चेन्नई: तमिलनाडु के सीएम के पलानीस्वामी ( TN सीएम K Palaniswamy ) ने रविवार को हिरासत में बाप-बेटे की मृत्यु ( Custodial Death In Tamilnadu ) के मुद्दे में बड़ी घोषणा की. उन्होंने बोला कि तमिलनाडु सरकार ( tamil nadu govt ) ने पिता-पुत्र पी जयराज व जे बेनिक्स की कथित हिरासत में हुई मृत्यु ( jairaj and fenix case ) की जाँच केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) को सौंपने का निर्णय लिया है.

पलानीसवानी ने मुद्दे से जुड़ा घटनाक्रम बताते हुए कहा, "लॉकडाउन उल्लंघन ( Lockdown violations ) से संबंधित एक मुद्दे में पिता व पुत्र को गिरफ्तार किया गया था. उन्हें अगले दिन रिमांड पर लिया गया व बाद में उनकी मौत हो गई. मद्रास हाई कोर्ट ( Madras High Court ) ने इस मुद्दे को स्वतः संज्ञान में लेते हुई कार्यवाही की. प्रदेश सरकार ने CBI को जाँच स्थानांतरित करने का निर्णय किया है. हम मद्रास हाई कोर्ट के साथ आवश्यक सहमति व परामर्श के बाद यह करेंगे."

हिरासत में कथित मृत्यु का शिकार हुए जयराज (62) व बेनिक्स (32) के परिजनों ने बोला कि वे इस मुद्दे पर हुए किसी घटनाक्रम पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते हैं. परिजन मंगलवार को अगली सुनवाई का इंतजार करेंगे व देखेंगे कि उच्च न्यायालय क्या कह रहा है.

थूथूकुडी के पास सथानकुलम कस्बे में कथित रूप से हिरासत में प्रताड़ित किए जाने के कारण जयराज व बेनिक्स की मृत्यु ( Custodial Death In Tamilnadu ) से देशभर में हड़कंप मच गया था. इस मुद्दे में दो उप-निरीक्षकों सहित चार पुलिस अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया.

इस मुद्दे की जाँच में जुटे एक वरिष्ठ ऑफिसर ने बोला कि शुरुआती निष्कर्षों से पता चलता है कि दोनों को 19-20 जून की रात कपड़े उतार कर रात भर प्रताड़ित किया गया व उनके गुप्तांग में लाठी डाल दी गई. पिता की तुलना में बेटे बेनिक्स का बहुत ज्यादा खून बह गया. कथितरूप से पुलिसकर्मी उस पर इसलिए टूट पड़े क्योंकि उसने अपने पिता को पिटाई से बचाने की प्रयास की थी.

पीड़ित परिवारों ने न्यायिक मजिस्ट्रेट पर बिना किसी प्रक्रिया के रिमांड में भेजने का आरोप लगाया है. मजिस्ट्रेट पी सर्वानन ने जयराज व बेनिक्स को 20 जुलाई तक पुलिस हिरासत में भेज दिया था. दो दिन बाद वे मर गए थे.

जयराज की बहन जया के पति एस जोसेफ ने बोला कि जब जयराज व बेनिक्स को मजिस्ट्रेट की न्यायालय में पेश किया गया था, तो वे दोनों वहां उपस्थित थे. मजिस्ट्रेट अपने घर में प्रातः काल करीब 11.45 बजे कार्य कर रहे थे. जोसेफ के मुताबिक वो दोनों साफ तौर पर घायल थे व उनके कपड़ों से खून रिस रहा था. दोनों को गेट पर ही खड़ा रखा गया व सात-आठ पुलिसवालों ने उन्हें घेर रखा था. उन्हें अंदर नहीं ले जाया गया. मजिस्ट्रेट ने पहली मंजिल से ही पुलिसवालों की रिमांड पर मंजूरी दे दी.

मद्रास हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश के चंद्रू ने बोला कि अगर यह ठीक है तो यह न्यायिक कदाचार का एक स्पष्ट मुद्दा व गिरफ्तारी पर उच्चतम न्यायालय के दिशानिर्देशों का उल्लंघन था. आरोपियों की जाँच करना एक मजिस्ट्रेट का कर्तव्य है. उन्हें यह पूछना चाहिए था कि वे घायल क्यों थे व खून बह रहा था. प्राथमिक संवैधानिक अधिकारों को मजिस्ट्रेट द्वारा सुनिश्चित किया जाना चाहिए.