घरौनी के लाभार्थियों से पीएम मोदी ने की ‘मन की बात’

घरौनी के लाभार्थियों से पीएम मोदी ने की ‘मन की बात’

बाराबंकी: खेतों की तरह की घर का लिखा-पढ़ी में मालिकाना हक पाकर उत्साहित घरौनी के लाभार्थियों में भविष्य को लेकर तमाम डर अब पूरी तरह समाप्त हो चुका है। क्योंकि खेतों की खतौनी की तरह ही अब घर की घरौनी बनाई जा रही है। केन्द्र सरकार की इस स्वामित्व योजना के तहत बाराबंकी जिले को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चुना गया है और आज देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए बाराबंकी में घरौनी के दो लाभार्थियों से मन की बात भी की। लाभार्थियों में तहसील नवाबगंज के ग्राम मोहम्मदपुर चौकी निवासी रामरती और ग्राम मुरादाबाद मजरे नरगिसमऊ निवासी दिव्यांग राममिलन शामिल हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मन की बात में कहा

घर की जमीन के विवाद से मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करने वाली घरौनी से अब लोगों के जीवन में निश्चिंतता और आत्मनिर्भरता आ गई है। आज बाराबंकी कलेक्ट्रेट स्थित एनआइसी पहुंचे लाभार्थी रामरती और राममिलन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मन की बात में यही कहा। दोनों पीएम से बात करने के बाद बेहद रोमांचित दिख रहे थे। दरअसल केन्द्र सरकार की स्वामित्व योजना के पायलट प्रोजेक्ट के तहत बाराबंकी से घरौनी बनाने की शुरुआत हुई है। इस योजना के तहत ग्राम पंचायतों के आबादी वाले इलाकों में भी लोगों को स्वामित्व का प्रमाण पत्र मिलेगा।

इसी क्रम में घरौनी बनाने का काम बाराबंक जिले की नवाबगंज तहसील के 11 गांवों में तेजी से चल रहा है

इसी क्रम में घरौनी बनाने का काम बाराबंक जिले की नवाबगंज तहसील के 11 गांवों में तेजी से चल रहा है। लाभार्थियों में तहसील नवाबगंज के ग्राम मोहम्मदपुर चौकी निवासी रामरती और ग्राम मुरादाबाद मजरे नरगिसमऊ निवासी दिव्यांग राममिलन भी शामिल हैं। जिनसे आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए मन की बात की और उन्हें इसके फायदे बताए। प्रधानमंत्री से बात करने के बाद लाभार्थियों काफी उत्साहित दिखे और वह इसे अपने लिए विशेष उपल्ब्धि मान रहे हैं।

पति रामसेवक की मौत के बाद सब्जी और समोसा बेचकर परिवार की आजीविका चलाने वाली मोहम्मद चौकी निवासी रामरती ने बताया कि आज प्रधानमंत्री से बात करके वह बेहद खुश हैं और अपने आप को सौभाग्यशाली मान रहे हैं। उन्होंने बताया कि पति की मौत के बाद न तो घर को ठीक कराने की रकम थी और न ही कृषि योग्य भूमि ही थी, जिस पर ऋण लिया जा सके। घरौनी मिलने के बाद बीस हजार का ऋण स्वीकृत होने का पत्र मिल गया है। अब इसमें कुछ रकम से घर की मरम्मत कराऊंगी और शेष रकम से दुकान के कामकाज को आगे बढ़ाऊंगी। उम्मीद है अब जिंदगी की राह आसान होगी। इससे हर किसी की हद तय हो जाने से विवादों पर भी विराम लगेगा। अब कोई हमें घर से नहीं निकाल सकेगा।

मुरादाबाद मजरे नर्गिस के रहने वाले दिव्यांग राममिलन के नाम कोई कृषि योग्य भूमि नहीं है

वहीं मुरादाबाद मजरे नर्गिस के रहने वाले दिव्यांग राममिलन के नाम कोई कृषि योग्य भूमि नहीं है। पिता के पास कुछ कृषि योग्य जमीन है जोकि वही करते हैं। किराना की दुकान ही आजीविका चलाने का एक मात्र जरिया थी। ऋण हासिल करने के लिए कोई अतिरिक्त जरिया नहीं था। राममिलन ने बताया कि अब घरौनी मिलने के बाद जहां घर और नाली संबंधी विवादों पर विराम लगेगा, वहीं घर पर ऋण लेकर कामकाज को विस्तार दिया जा सकेगा।

घरौनी वितरण को लेकर सीडीओ मेधा रूपम ने बताया कि घरौनी ग्रामीण क्षेत्रों के निवासियों के लिए उनके घर का पक्का कागज है। जिससे उन्हें काफी लाभ मिलेगा। वहीं सांसद उपेंद्र सिंह रावत ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोच हमेशा गरीबों के लिए लाभकारी योजनाएं लाने की रही हैं, उन्होंने बाराबंकी को घरौनी बनाने के पायलट प्रोजेक्ट के लिए चुना जिसके लिए वह उन्हें धन्यवाद देते हैं।