शाहनजफ इमामबाड़े की इमारत को मजबूत तरीका से संरक्षित करने का कर दिया है कार्य प्रारम्भ 

 शाहनजफ इमामबाड़े की  इमारत को मजबूत तरीका से संरक्षित करने का कर दिया है कार्य प्रारम्भ 

लखनऊ राजधानी के मशहूर पर्यटन स्थलियों में से एक सफेद गुम्बददार इमारत को लोग शाहनजफ इमामबाड़े के नाम से जानते हैं. यह सिकंदरबाग के पास व एनबीआरआई से सटा हुआ है । बदहाल हो रही इस इमारत की सूरत अब संवरने लगी है. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने इस इमारत को मजबूत तरीका से संरक्षित करने का कार्य प्रारम्भ कर दिया है. 

जिम्मेदारों के ध्यान नहीं दिये जाने की वजह से यहां परिसर के अंदर का प्लास्टर गिरने लगा था. जगह-जगह बिल्डंग में दरारें आ गई थीं व लम्बे समय से यह एतिहासिक स्मारक मरमत मांग रहा था. विभाग के सुपरीटेंडेंट इंदु प्रकाश ने बताया कि कुछ तकनीकी कारणों से संरक्षण का कार्य रुका हुआ था लेकिन इसको फिर से नए सिरे से प्रारम्भ करा दिया गया है. इसमें सबसे पहले इमारत की गुम्बद को फिर से पुराने रूप में लौटाने का कोशिश किया जा रहा है.

अवध के पांचवें नवाब ने बनवाया था
 अवध के पांचवें नवाब गाजीउद्दीन हैदर की ओर से राणा प्रताप मार्ग पर शाहनज़फ इमामबाड़ा बनवाया गया था. 1816-17 में उनके शव को यहीं दफन कर दिया गया था. उनकी ख़्वाहिश के अनुसार, उनकी तीनों पत्नियों सरफराज़ महल, मुमताज महल व मुबारक महल को उनके साथ इसी इमारत में दफन करवा दिया गया था. इस भव्य इमारत में सफेद गुंबद है जो चारो तरफ से एक दीवार से घिरा हुआ है व गोमती नदी के तट पर स्थित है.