मई में 854 ट्रांसफार्मर हुए खराब, प्रभारी मंत्री भी बिजली विभाग को लगा चुके फटकार

मई में 854 ट्रांसफार्मर हुए खराब, प्रभारी मंत्री भी बिजली विभाग को लगा चुके फटकार

मई के महीने में बरेली में जिले में 373 ट्रांसफार्मर फुंक चुके हैं और 854 ट्रांसफार्मर खराब हुए .

बरेली में मई के महीने में अधिकतम तापमान के साथ ही ट्रांसफार्मर फुंकने का भी नया रिकार्ड बना डाला है. पिछले मई के महीने में बरेली में जिले में 373 ट्रांसफार्मर फुंक चुके हैं और 854 ट्रांसफार्मर खराब हुए हैं. जिससे जहां लोगों को परेशान हो रही है तो दूसरी तरफ प्रभारी मंत्री बृजेश पाठक तक बिजली विभाग के अफसरों को बैठक में फटकार लगा चुके है.

हाल यह है कि सांसद से लेकर सभी विधायकों तक ने बिजली विभाग की कार्य प्रणाली पर नाराजगी जता चुके हैं. वहीं बिजली विभाग के ट्रांसफार्मर फुंकने का रिकार्ड लेकर परेशान है. बिजली विभाग के अफसरों ने अब इसका ठिकरा ओवरलोडिंग, फाल्ट और लो वोल्टेज पर फोड़ा है. इतनी बड़ी संख्या में ट्रांसफार्मर फुंकने से विभाग के अफसर भी दंग होने के साथ परेशान हैं.

854 ट्रांसफार्मर हुए खराब
बिजली विभाग की माने तो एक ओर जहां मई के महीने में ट्रांसफार्मर फुंकने का रिकार्ड टूटा तो दूसरी तरफ सबसे अधिक ट्रांसफार्मर खराब होने के का भी रिकार्ड बना है. मई के महीने में 854 ट्रांसफार्मर खराब हुए हैं. इन सभी को बदला भी गया है. ट्रांसफार्मर खराब हाेने का भी मुख्य कारण ओवरलोडिंग ही है. जिसके चलते लाइट ट्रिप होती है तो फाल्ट भी होता है. बचीकुची कसर लो वोल्टेज कर देता है. जिसके चलते ट्रांसफार्मर खराब भी हो जा रहे हैं. जिसके चलते लोगों को बिजली समस्याओं से जूझना पड़ता है.

ट्रांसफार्मर फुंकने से लेकर खराब होने में देहात आगे
बिजली विभाग के अफसरों की माने तो इस बार गर्मी में पारे ने भी रिकार्ड तोड़ा है. जिसके चलते बिजली की मांग बढ़ी है. शहर के सापेक्ष देहात में बिजली की कठिनाई सबसे अधिक हुई. अफसरों ने बताया कि ट्रांसफार्मर फुंकने से लेकर खराब होने का जितने रिकार्ड है उसमें देहात सबसे आगे. 854 ट्रांसफार्मर जो खराब हुए उसमें से शहर में केवल 46 ट्रांसफार्मर ही खराब हुए हैं. बिजली चोरी की चलते ट्रांसफार्मर ओवरलोड हो रहें हैं जिससे लाइट ट्रिफ तो होती है फाल्ट भी बढ़ जाते हैं. जिसके चलते शहर की अपेक्षा देहात में बिजली की परेशानी अधिक होती है. बिजली विभाग के अफसरों की माने तो शहर से अधिक देहात में ओवरलोडिंग अधिक है.

डीएम की बैठक में प्रभारी मंत्री ने लगाई थी लताड़
बरेली में पड़ रही भयंकर गर्मी के चलते बिजली कटौती को लेकर होने वाला आम आदमी के दर्द को जन प्रतिनिधियों तक पहुंच चुका है. हाल यह है कि सांसद से लेकर विधायक तक से क्षेत्र के लोग नाराजगी जता चुके हैँ. यहां तक प्रभारी मंत्री द्वारा डीएम कार्यालय में हुई विकास कार्यों की बैठक में भी सांसद से लेकर विधायक तक ने बिजली विभाग के विरूद्ध मोर्चा खोला था. जिसके बाद प्रभारी मंत्री ने बैठक में ही बिजली विभाग के अफसरों से नाराजगी जाहिर करते हुए बिजली विभाग के अफसरों को प्रबंध पटरी पर लाने के निर्देश दिए थे.

प्रभारी मंत्री की फटकार के बाद हाल बेहाल
बरेली विकास कार्यों की समीक्षा के दौरान बिजली को लेकर प्रभारी मंत्री की फटकार के बाद भी बिजली प्रबंध पटरी पर नहीं आ पा रही है. हाल यह है कि अभी भी लोगों को भयंकर बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है. अफसरों की माने तो जिले में 630 KVA, 400 KVA, 250 KVA, 160 KVA, 100 KVA, 63 KVA, 25KVA और 10 KVA के 45,267 ट्रासंफार्मरों से घरों में बिजली आपूर्ति की जा रही है. जिसमें बीते तहीने में बिजली विभाग के अफसरों के अनुसार जिले में ओवरलोडिंग की वजह से ट्रांसफार्मर डैमेज हुए.

एक्सईएन वर्कशाप विवेक कुमार ने का बोलना है कि गर्मी के दौरान ट्रांसफार्मर अन्य दिनों की अपेक्षा अधिक डैमेज होते हैं. स्थिति से निपटने के लिए 400 ट्रांसफार्मर पहले से तैयार रहते हैं. जहां भी ट्रांसफार्मर फुंकता है प्रयास होती है कि जल्द से जल्द बदला जाए. इस बार मई की गर्मी में ट्रांसफार्मर ज्यारा ही फुंके हैं.


अब दवाओं के साइड इफेक्ट को भी बतायेगा IIT कानपुर

अब दवाओं के साइड इफेक्ट को भी बतायेगा IIT कानपुर

हम लोग जो दवाइयां खाते है उनका शरीर, कोशिकाओं और अन्य हिस्सों में क्या असर होता है यह जानने के लिए अब हमें अन्य राष्ट्रों के भरोसे नहीं रहना पड़ेगा. अब यह सुविधा आईआईटी कानपुर में जल्द प्रारम्भ होने जा रही है. इस संस्थान ने राष्ट्र का सबसे बड़ा माइक्रोस्कोप आ गया है. इसे साइंस एंड इंजीनियरिंग रिसर्च बोर्ड के 30 करोड़ रुपये के योगदान से नीदरलैंड से मंगवाया गया है. यह स्कोप इतना बड़ा है कि इसके लिए नयी बिल्डिंग बनवाने की तैयारी भी पूरी की जा चुकी है. अभी माइक्रोस्कोप को संस्थान की हवाई पट्टी के पास एडवांस इमर्जिंग सेंटर में रखवाया गया है. यह माइक्रोस्कोप क्रायो इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप कहता है, जिसके माध्यम से प्रोटीन की सिग्नलिंग कराई जा सकती है.

दवाइयां बनाने की प्रोसेस होगी आसान
किडनी, लिवर, दिमाग, फेफड़े, दिल आदि में परेशानी होने पर प्रोटीन की सिग्नलिंग प्रभावित हो जाती है. कई बार इसकी रफ्तार काफी तेज हो सकती है. जानकारों के अनुसार कोशिकाओं के अंदर एक प्रोटीन से दूसरे प्रोटीन को संदेश देना या रासायनिक बदलाव कराने से परफेक्ट दवाएं बनाई जा सकेगी. ऐसे दवाइयां बनाने की प्रोसेस राष्ट्र में काफी आसान हो सकेगी.

10 हजार किलो वजन है
स्कोप आईआईटी के बायोलॉजिकल साइंस एंड बायो इंजीनियरिंग के प्रो अरुण कुमार शुक्ला ने बताया कि, क्रायो इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप में (-180) डिग्री सेल्सियस तक का तापमान रखने की सुविधा है. इसका वजन करीब 10 हजार किलो है. अभी पैकिंग खोली नहीं गई है. इसके लिए नयी बिल्डिंग बनाई जा रही है, जिसमें जब यह स्कोप चले तो वाइब्रेशन एकदम भी न हो.

देश भर के संस्थान ले सकेंगे सहयोग
स्टार्टअप इनोवेशन इंक्यूबेशन सेंटर के इंचार्ज प्रो अमिताभ बंद्योपाध्याय ने बताया कि, संस्थान में सुविधा मिलने के बाद नया सेंटर खोलने की प्लानिंग है, जिसका लाभ राष्ट्र भर के संस्थान ले सकेंगे. क्रायो इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप की सुविधा उन्हें मिल सकेगी. नयी दवाएं खोजने में काफी सरलता होगी. यह काफी सस्ती होंगी. अभी ज्यादातर फार्मूले विदेशी कंपनियों के हैं, उन्होंने उसका पेटेंट करा रखा है