भाजपा ने बनाई बड़े सियासी दुर्ग को भेदने की रणनीति

भाजपा ने बनाई बड़े सियासी दुर्ग को भेदने की रणनीति

भाजपा ने अपने मिशन 2024 में बड़े राजनीतिक दुर्ग को भेदने की रणनीति बनाई है. बीजेपी का टारगेट मुलायम और सोनिया गांधी की सीट मैनपुरी और रायबरेली है. वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने उत्तर प्रदेश में राजनीतिक किलों को ध्वस्त करने की जो आरंभ की थी, वो 2024 में जारी रहेगी.

भाजपा ने इस रणनीति के अनुसार आजमगढ़ और रामपुर जीत लिया है और अब बारी रायबरेली और मैनपुरी की है. कांग्रेस पार्टी और समाजवादी पार्टी के इस गढ़ को जीतने के लिए काम शुरु हो चुका है.

2019 में भी समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पार्टी की गढ़ में लगाई थी सेंध
साल 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने उत्तर प्रदेश के 80 सीटों में से 64 सीटों पर जीत हासिल की थी. इसमें अमेठी लोकसभा भी शामिल था. अमेठी में स्मृति ईरानी ने राहुल गांधी को करारी शिकस्त दी थी. बरसों से अमेठी को गांधी परिवार का अजेय दुर्ग बोला जाता था. जिसमें बीजेपी ने सेंध लगाई थी. ठीक इसी तरह सैफई परिवार के गढ़ कन्नौज मे डिंपल यादव और बदायूं में धर्मेद्र यादव को हराकर दोनों हाई-प्रोफाईल सीट पर भी जीत हासिल की थी.

मैनपुरी है मुलायम का गढ़
भाजपा के एजेंडे में सबसे ऊपर मुलायम सिंह का गढ़ मैनपुरी है. मैनपुरी लोकसभा सीट पर बीजेपी की नजर इस लिहाज से भी काफी जरूरी है क्योंकि इस सीट पर पिछले ढ़ाई दशकों में मुलायम और उनके परिवार का ही अतिक्रमण रहा है.पहली बार 1996 में मुलायम सिंह यादव ने इस सीट से जीत दर्ज की थी. इसके बाद 1998 और 1999 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर बलराम यादव सदन पहुंचे. लिहाजा 1996 से ही यह सीच सैफई परिवार के पास है. मैनपुरी लोकसभा में 1.73 लाख वोटर्स है जिसमें 45% यादव है. इसे बाद शाक्य ब्राह्मण, दलित और मुसलमान है. 5 विधानसभाओं वाले इस संसदीय सीट में जवंत नगर भी है, जहां शिवपाल यादव का अतिक्रमण है.

रायबरेली में है गांधी परिवार का कब्जा
अमेठी के बाद बीजेपी गांधी परिवार की इकलौती बची हुई रायबरेली सीट भी छीन लेना चाहती है. सोनिया गांधी इस सीट से पिछले 18 वर्षों से सांसद है. पहली बार 2004 में सोनिया गांधी यहां से सांसद बनी थी. इससे पहले भी यह सीट कांग्रेस पार्टी और गांधी परिवार के पास ही रही है. वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में ही बीजेपी ने यहां बड़ी सेंध लगा दी है. कांग्रेस पार्टी का गढ़ माने जाने वाले रायबरेली जिले में कांग्रेस पार्टी एक भी सीट नहीं जीत सकी है. जिले में समाजवादी पार्टी ने चार और बीजेपी ने दो सीटें जीती.