मुआवजा कैंप के दौरान किसानों ने किया प्रदर्शन

मुआवजा कैंप के दौरान किसानों ने किया प्रदर्शन

मैनपुरी के 31 वर्ष से मुआवजे की मांग कर रहे किसानों को मुआवजा देने के लिए कैंप लगाया गया. अपर जिलाधिकारी (भूमि अधिग्रहण) आगरा के निर्देश पर अधिकारी मुआवजा देने पहुंचे. मौके पर पहुंचे किसानों ने पुराने सर्किल दर के हिसाब से मुआवजा लेने से मना कर दिया. किसान नए सर्किल दर के आधार पर मुआवजे की मांग कर प्रदर्शन करने लगे.

31 वर्षों से किसानों मुआवजे की मांग कर रहे हैं. 1990 में समान पक्षी विहार के लिए जमीन का अधिग्रहण किया गया था.

शिविर में पहुंचे आगरा एलएसी डेक्स इंचार्ज ने किसानों को बताया कि पुराने सर्किल दर के हिसाब पर ब्याज लगाकर 2305 वर्ग मीटर एक बीघा का 1 लाख 75 हजार रुपए देने का आदेश मिला है. मुआवजा मिलने वाली राशि को देने के लिए यह शिविर लगाया गया है. किसानों ने मुआवजा सुनते ही आरोप प्रत्यारोप का दौर प्रारम्भ कर दिया.

किशनी तहसील में मुआवजा देने के लिए कैंप लगाया गया था. इस दौरान किसान पुराने सर्किल दर से मुआवजा लेने के लिए मना कर दिया.

किसानों ने बोला हमारे यहां 810 वर्ग का एक बीघा है. किसानों ने ऑफिसरों को बताया यह मुआवजा तो तब देना था, जबकि 31 वर्ष पहले हम लोगों की जमीन अधिग्रहीत की गई थी. मुआवजा देना ही है तो आज के सर्किल दर में मिले, नहीं तो अभी न्यायालय में मामला विचाराधीन है.

शुरू हुआ तो हंगामा पहुंची पुलिस
नए सर्किल दर के हिसाब से मुआवजे की मांग पर अड़े किसानों ने पुराने सर्किल दर से मुआवजा लेना मना कर हंगामा प्रारम्भ कर दिया. हंगामा देख एसडीएम ने किसानों को समझाया जिसे लेना हो ले जिसे ना लेना हो वह चुपचाप घर जाए हंगामा क्यों कर रहे हो. किसान नहीं माने तो एसडीएम ने थाना पुलिस बुला हंगामा कर रहे लोगों को बैठक भवन से बाहर भेज दिया. किसान बाहर आकर हिंदुस्तान माता की जय बोल प्रदर्शन करने लगे.

समान पक्षी विहार के लिए अधिग्रहीत की गई थी जमीन
साल1990 में वन्य जंतु अधिनियम के अनुसार कटरा समान गांव क्षेत्र में पक्षी विहार बनाने की घोषणा की गई थी. इसके अनुसार तब सैकड़ों किसानों की 841.66 एकड़ कृषि योग्य भूमि, ग्राम समाज की 69.70 एकड़ भूमि और 365.05 एकड़ वन भूमि अधिग्रहीत की गई थी. 1276.41 एकड़ भूमि कुल अधिग्रहीत की गई.


अब दवाओं के साइड इफेक्ट को भी बतायेगा IIT कानपुर

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हम लोग जो दवाइयां खाते है उनका शरीर, कोशिकाओं और अन्य हिस्सों में क्या असर होता है यह जानने के लिए अब हमें अन्य राष्ट्रों के भरोसे नहीं रहना पड़ेगा. अब यह सुविधा आईआईटी कानपुर में जल्द प्रारम्भ होने जा रही है. इस संस्थान ने राष्ट्र का सबसे बड़ा माइक्रोस्कोप आ गया है. इसे साइंस एंड इंजीनियरिंग रिसर्च बोर्ड के 30 करोड़ रुपये के योगदान से नीदरलैंड से मंगवाया गया है. यह स्कोप इतना बड़ा है कि इसके लिए नयी बिल्डिंग बनवाने की तैयारी भी पूरी की जा चुकी है. अभी माइक्रोस्कोप को संस्थान की हवाई पट्टी के पास एडवांस इमर्जिंग सेंटर में रखवाया गया है. यह माइक्रोस्कोप क्रायो इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप कहता है, जिसके माध्यम से प्रोटीन की सिग्नलिंग कराई जा सकती है.

दवाइयां बनाने की प्रोसेस होगी आसान
किडनी, लिवर, दिमाग, फेफड़े, दिल आदि में परेशानी होने पर प्रोटीन की सिग्नलिंग प्रभावित हो जाती है. कई बार इसकी रफ्तार काफी तेज हो सकती है. जानकारों के अनुसार कोशिकाओं के अंदर एक प्रोटीन से दूसरे प्रोटीन को संदेश देना या रासायनिक बदलाव कराने से परफेक्ट दवाएं बनाई जा सकेगी. ऐसे दवाइयां बनाने की प्रोसेस राष्ट्र में काफी आसान हो सकेगी.

10 हजार किलो वजन है
स्कोप आईआईटी के बायोलॉजिकल साइंस एंड बायो इंजीनियरिंग के प्रो अरुण कुमार शुक्ला ने बताया कि, क्रायो इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप में (-180) डिग्री सेल्सियस तक का तापमान रखने की सुविधा है. इसका वजन करीब 10 हजार किलो है. अभी पैकिंग खोली नहीं गई है. इसके लिए नयी बिल्डिंग बनाई जा रही है, जिसमें जब यह स्कोप चले तो वाइब्रेशन एकदम भी न हो.

देश भर के संस्थान ले सकेंगे सहयोग
स्टार्टअप इनोवेशन इंक्यूबेशन सेंटर के इंचार्ज प्रो अमिताभ बंद्योपाध्याय ने बताया कि, संस्थान में सुविधा मिलने के बाद नया सेंटर खोलने की प्लानिंग है, जिसका लाभ राष्ट्र भर के संस्थान ले सकेंगे. क्रायो इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप की सुविधा उन्हें मिल सकेगी. नयी दवाएं खोजने में काफी सरलता होगी. यह काफी सस्ती होंगी. अभी ज्यादातर फार्मूले विदेशी कंपनियों के हैं, उन्होंने उसका पेटेंट करा रखा है