अडगड़ानन्द आश्रम में वर्चस्व की लड़ाई में चली गोली

अडगड़ानन्द आश्रम में वर्चस्व की लड़ाई में चली गोली

चुनार क्षेत्र स्थित अडगड़ानन्द महाराज का सक्तेशगढ़ आश्रम

चुनार थाना क्षेत्र के सक्तेशगढ़ आश्रम में वर्चस्व के चलते गोलीकांड हुआ. दो तमंचे के साथ आश्रम में पहुंचें जीवन बाबा अड़गड़ानंद उत्तराधिकारी बनने का स्वप्न देख रहे थे. आशीष बाबा का कद बढ़ता देख जीवन ने गुस्से में बदला लेने की योजना बना डाली. इसके लिए दो तमंचा लेकर बाबा जीवन आश्रम में पहुंचें थे. जिन्होंने आशीष बाबा को गोली मारकर स्वयं को गोली मार कर खुदकुशी कर लिया. बाबा जीवन साधु नही बल्कि ग्वालियर सेंट्रल कारागार से फरार जितेंद्र वैश उर्फ जीवन बाबा उर्फ जीतू निकले.

सक्तेशगढ़ आश्रम पर उमड़ी भक्तों की भीड़

कयास आशीष बाबा होंगे उत्तराधिकारी

करीब 98 साल के स्वामी अडगड़ानंद बाबा के प्रवचन समेत अनेक जिम्मेदारी इन दिनों जौनपुर निवासी आशीष बाबा ही सम्हाल रहें है. स्वामी अडगडानंद के प्रवचन के पूर्व बाबा आशीष ही भक्तों को धर्मोपदेश देते थे. इस कारण आश्रम में बाबा आशीष को ही स्वामी जी का उत्तराधिकारी बनने का चर्चा चल रही थी. जो बाबा जीवन को रास नहीं आ रहा था. एसपी नक्सल महेश अत्रि ने बताया कि जीवन बाबा का निष्कासन नहीं किया गया था. विभिन्न बिंदुओं पर जांच की जा रही हैं.

अडगड़ानन्द महाराज के परम शिष्य आशीष बाबा गोली लगने से घायल होने के बाद चंदौली में भर्ती हैं.

15 साल की उम्र में किया हत्या, मिला था जीवन भर कारावास

मध्य प्रदेश के शिवपुरी में एक सिपाही के पुत्र की मर्डर के आरोप में तबके जितेंद्र वैश पुत्र सीताराम को सुनवाई के बाद जीवन भर जेल की सजा मिली थी. दो वर्ष ग्वालियर सेंट्रल कारागार में रहने के बाद एक दिन कारागार से भाग निकले. मध्य प्रदेश पुलिस उनकी तलाश में जुटी रही कारागार से भागने के बाद कैदी जितेंद्र अडगडानंद के आश्रम में पहुंच कर बाबा जीवन बन गए .स्वयं को गोली मारकर दी जान" loading="lazy" class="e86bf44b">

जितेंद्र वैश उर्फ जीवन बाबा उर्फ जीत आश्रम में तमंचा लेकर पहुंचें आशीष बाबा को गोली मारी, फिर स्वयं को गोली मारकर दी जान

आश्रम पर लगा पुलिस का पहरा, टीम गठित

सक्तेशगढ़ आश्रम पर वारदात के बाद 2 दारोगा और 6 सिपाही तैनात किया गया है. आज से डेढ़ दर्जन पीएसी की तैनाती की गई है. एसपी सन्तोष कुमार मिश्र ने बताया कि जिला प्रशासन की ओर से एक टीम गठित की गई है. जिसमे एडीएम और पुलिस विभाग के अधिकारी शामिल हैं. जो सुरक्षा प्रबंध के लिए आश्रम के व्यवस्था कमेटी से तारतम्य बनाकर योजना को मूर्त रुप देने का काम टीम करेंगी .

यथार्थ गीता के प्रणेता अडगड़ानंद महाराज जिनके उत्तराधिकारी घोषित किए जाने के पूर्व आश्रम में चली गोली

आश्रम से नहीं मिला कोई सहयोग

वारदात की जानकारी मिलने पर पहुंची पुलिस को आश्रम की ओर से कोई योगदान नहीं मिला यह दर्द एसपी नक्सल महेश अत्रि ने व्यक्त किया. बताया कि वहा जाने पर सभी दाएं बाएं से निकल जा रहे थे. बाहर के लोगों से एक और बाबा के घायल होने की जानकारी मिली. अपने स्तर से खोजबीन में आशीष बाबा के चंदौली में भर्ती होने का पता लगा. बताया जाता है कि 8 साल की हालत में ही घर त्याग कर आशीष साधू संत की संगत में आ गए थे. जिन्हें स्वामी अडगड़ानन्द ने अपना प्रमुख सेवक बना लिया है.

कई प्रदेश से आते हैं भक्त

अड़गड़ानंद के आश्रम पर रोजाना हजारों की संख्या में भक्तगण आते हैं गुरु पूर्णिमा पर इनकी संख्या लाखों में पहुंच जाती है. इन सबके बीच गुरुवार को सुबह जीवन बाबा ने पहले आशीष बाबा पर हमला किया इसके बाद तमंचे से स्वयं गोली मारकर अपनी इहलीला खत्म कर ली .

आशीष बाबा के पेट से आपरेशन के दौरान निकाली गई गोली

गुस्सैल प्रजाति के थे बाबा जीवन

अशोक सिंहल के अनन्य सहयोगी रहें विश्व हिंदू परिषद के पूर्व प्रांतीय संगठन मंत्री बीजेपी प्रदेश कार्यसमिति सदस्य मनोज श्रीवास्तव ने बताया कि जीवन बाबा गुस्सैल प्रजाति के थे. स्वामी अडगड़ानंद के कक्ष में सिंहल जी बुलाने पर जाते थे. उस समय वह भी उनके साथ जाते थे. जिस पर जीवन बाबा ने सिंघल जी के साथ जानें पर टोका था. यह बात महाराज जी के पास पहुंची तो जीवन बाबा को डांट पड़ा था.