दर्शकों के नहीं होने से खेलों में रोमांच नहीं रहा

दर्शकों के नहीं होने से खेलों में रोमांच नहीं रहा

कोरोनावायरस का खेलों पर भी गहरा प्रभाव पड़ा है. मैदान सूने हो गए हैं. खेल नहीं हैं तो दर्शक भी नहीं हैं व दर्शकों के न होने से खेलों का रोमांच भी नहीं रहा है. क्रिकेट भी इससे अछूता नहीं रहा है. दुनिया टेस्ट चैम्पियनशिप स्थगित कर दी गई है. अब नजर टी-20 वर्ल्ड कप पर है. यह इसी वर्ष अक्टूबर से नवंबर के बीच ऑस्ट्रेलिया में होना है. लेकिन जिस तरह से दुनियाभर में कोरोना के मुद्दे बढ़ रहे हैं, इस पर भी सवालिया निशान लग गया है.

दो टीमों के बीच सीमित संख्या में मुकाबले अलग बात है, जैसा कि इंग्लैंड-वेस्टइंडीज सीरीज के साथ है. लेकिन कई सारे भिन्न-भिन्न वेन्यूज पर 16 टीमों, उनके खिलाड़ियों व सपोर्टिंग स्टाफ के साथ किसी टूर्नामेंट का आयोजन बड़ा जोखिम भरा कार्य होने कि सम्भावना है. इसलिए इसकी आसार भी बहुत कम नजर आ रही है. पुराने शेड्यूल के अनुसार तो इस टूर्नामेंट के तुरंत बाद हिंदुस्तान को ऑस्ट्रेलिया में ही रुककर ऑस्ट्रेलिया के विरूद्ध चार टेस्ट मैचों व तीन वन डे मैचों की शृंखला भी खेलनी है. लेकिन अगर दुनिया कप निरस्त होता है या आगे बढ़ता है तो जाहिर सी बात है उसके बाद की शृंखला पर भी इसका प्रभाव होना तय है.

किस तरह होगा नुकसान?

  • अगर ऑस्ट्रेलिया में टी-20 वर्ल्ड कप व हिंदुस्तान के साथ होने वाली सीरिज नहीं होती है तो उससे अकेले ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट बोर्ड को ही 17.4 करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (करीब 910 करोड़ रुपए) का नुकसान होना तय है. यह तो वह पैसा है जो ऑस्ट्रेलियाई बोर्ड को मिलना था. जब भी कोई बड़ा आयोजन होता है तो उसके जुड़ी कई आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है. इससे ऑस्ट्रेलिया वंचित होने कि सम्भावना है.
  • बीसीसीआई की आर्थिक ताकत का सबसे बड़ा स्रोत आईपीएल रहा है. अगर इस वर्ष आईपीएल नहीं हुआ तो बीसीसीआई भी आर्थिक तंगहाली में फंस जाएगा जिसकी आंच दुनियाभर के क्रिकेट खेलने वाले राष्ट्रों तक पहुंचेगी. क्रिकबज़ की एक रिपोर्ट के अनुसार आईपीएल नहीं होने पर बीसीसीआई को सीधे-सीधे 4000 करोड़ रुपए का नुकसान होने कि सम्भावना है.

घरेलू क्रिकेट के लिए भी चुनौती
बीसीसीआई व आईपीएल फ्रेंचाइजी अपने खिलाड़ी की वार्षिक फीस का 20 प्रतिशत उस घरेलू क्रिकेट एसोसिएशन को देता है जिसका वह अगुवाई करता है. अकेले आईपीएल के कारण ही खेलों की अर्थव्यवस्था में हर वर्ष 1100 करोड़ रुपए आते हैं. यह बहुत बड़ी रकम है जिससे देश में क्रिकेट संगठनों, खिलाड़ियों व आधारभूत ढांचे को मजबूत बनाने में बड़ी मदद मिलती है. लेकिन कोरोना ने सबकुछ तहस-नहस कर दिया है.

कमाई बढ़ाने की पहल भी
सभी क्रिकेट बोर्ड्स की कमाई का एक बड़ा स्रोत प्रायोजक होते हैं. क्रिकेट बोर्ड्स की कुछ कमाई बढ़ सके, इसके लिए इंटरेनशनल क्रिकेट काउंसिल (अाईसीसी) ने नियमों में एक बड़ा परिवर्तन किया है. अब तक टेस्ट मैच में किसी भी खिलाड़ी की टी-शर्ट व स्वेटर के सामने वाले हिस्से पर लोगो लगाने की अनुमति नहीं होती थी. लेकिन अब आईसीसी ने अगले एक वर्ष तक टेस्ट मैचों में भी सीने पर लोगो लगाने की अनुमति दे दी है.

क्रिकेट व पैसा

  • 2100 करोड़ रुपए का रेवेन्यू मिला था 2019 के आईपीएल मैचों के टीवी पर प्रसारण से स्टार इंडिया को
  • 448 करोड़ रुपए की स्पान्सर फीस है साल 2017 से 2022 तक के पांच वर्ष के टूर्नामेंट के दौरान. इसका स्पान्सर वीवो है
  • 51160 करोड़ रुपए आंकी गई थी आईपीएल टूर्नामेंट की ब्रांड वैल्यू 2019 के सीजन के दौरान डफ एंड फेल्प्स फर्म के द्वारा

बायो-सिक्योर क्रिकेट!
क्रिकेट ने कई नए शब्द व उनके विशेष अर्थ दिए है. कोरोना काल में क्रिकेट एक नए शब्द को लोकप्रिय बना रहा है व यह शब्द है- बायो-सिक्योर. यह शब्दावली इंग्लिश एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड ने दी है. जैसा कि नाम से साफ है, इसमें क्रिकेट सुरक्षित माहौल में खेला जाएगा. यह शब्दावली इंग्लैंड व वेस्टइंडीज के बीच खेली जा रही सीरीज में प्रयोग की गई है. इस सीरीज को बायोसेक्योर बनाने के लिए खिलाड़ियों के मूवमेंट को न्यूनतम रखा गया है. टेस्ट मैच उन स्टेडियमों पर रखे गए हैं, जहां स्टेडियम के साथ ही होटल सुविधाएं भी हैं. इससे खिलाड़ी व सपोर्टिंग स्टाफ बसों के प्रतिदिन के सफर व अनावश्यक थकान से बचेंगे.

गेम चेंजिंग बदलाव!
आईसीसी ने कोरोना काल में घरेलू अम्पायर ही रखने, अलावा डीआरएस रिव्यू लेने की अनुमति देने सहित कई परिवर्तन किए हैं, लेकिन सबसे जरूरी परिवर्तन यह है कि गेंदबाज गेंद चमकाने के लिए लार का प्रयोग नहीं कर सकेंगे. हालांकि वेस्टइंडीज के अपने जमाने के तेज गेंदबाज माइकल होल्डिंग ने लार लगाने को प्रतिबंधित करके गेंदबाजों के खास हथियार को कुंद करने पर कड़ी असहमति जताई है.