इस वजह के चलते अकेले बैठ घंटो रोया करता था यह ऑस्ट्रेलियाई कप्तान

इस वजह के चलते अकेले बैठ घंटो रोया करता था यह ऑस्ट्रेलियाई कप्तान

नई दिल्ली: ऑस्ट्रेलिया के टेस्ट कैप्टन टिम पेन (Tim Paine) ने ऐसे समय में टीम की कमान संभाली थी जब वह मुश्किलों के दौर से गुजर रही थी। पेन (Tim Paine) ने कभी कप्तानी के बारे में नहीं सोचा था लेकिन जब उन्हें यह जिम्मेदारी मिली तो उन्होंने इसे बखूबी निभाया। पेन के ज़िंदगी में ऐसा समय भी आया था जब गंभीर चोट लगने के कारण वह डिप्रेशन में चले गए थे। वह ‘क्रिकेट से नफरत’ करने लगे थे व ‘रोने’ लगे थे। उन्होंने बोला कि खेल मनोवैज्ञानिक की मदद से उन्हें इससे छुटकारा मिला।

चैरिटी मैच में पेन को लगी थी बड़ी चोट
दक्षिण अफ्रीका में गेंद से छेड़छाड़ प्रकरण के बाद स्टीव स्मिथ की स्थान टेस्ट टीम के कैप्टन बनाये गये पेन को 2010 में यह चोट एक चैरिटी मैच में लगी थी। डर्क नानेस की गेंद पर उनके दाएं हाथ की अंगुली टूट गई थी। चोट से उबरने के लिए पेन को सात बार सर्जरी करनी पड़ी जिसमें उन्हें आठ पिन, धातु की एक प्लेट व कूल्हे की हड्डी के एक टुकड़े का सहारा लेना पड़ा था। इसके कारण वह दो सत्र तक क्रिकेट से दूर रहे।

पेन के मन में बैठ गया था डर

पेन ने ‘बाउंस बैक पोडकास्ट’ पर कहा, ‘‘जब मैंने फिर से खेलना व प्रशिक्षण प्रारम्भ किया तो मैं बहुत बुरा नहीं कर रहा था। जब मैंने तेज गेंदबाजों का सामना करना शुरु किया तब मेरा ध्यान गेंद को मारने से ज्यादा अंगुली को बचाने पर रहता था। जब गेंदबाज रनअप प्रारम्भ करते थे तब मैं प्रार्थना करता था, ‘ईसा मसीह (जीसस क्राइस्ट) मुझे उम्मीद है कि वह मुझे अंगुली पर नहीं मारेंगे। ’ उन्होंने कहा, ‘यहां से मेरे खेल में गिरावट आने लगी। मैंने बिल्कुल आत्मविश्वास खो दिया था। मैंने इसके बारे में किसी को नहीं बताया। सच्चाई यह है कि मैं चोटिल होने से भय रहा था व मुझे नहीं पता था कि मैं क्या करने जा रहा हूं। ’

अकेले बैठकर रोया करते थे टिम पेन
पैंतीस वर्ष के इस विकेटकीपर बल्लेबाज ने बोला कि इस प्रयत्न ने उनके व्यक्तिगत ज़िंदगी को भी प्रभावित किया। विकेटकीपर बल्लेबाज ने कहा, ‘मुझे नींद नहीं आ रही थी, मैं अच्छा से खा नहीं पा रहा था। मैं खेल से पहले इतना घबरा गया था, मुझ में कोई ऊर्जा नहीं थी। इसके साथ जीना बहुत ज्यादा भयानक था। मैं हमेशा गुस्से में रहता था व उसे दूसरे पर निकालता था। ’ उन्होंने कहा, ‘किसी को मेरे प्रयत्न के बारे में पता नहीं था। मेरी पार्टनर को भी नहीं, जो अब मेरी पत्नी भी है। ऐसा भी समय था कि जब वह मेरे साथ नहीं थी तब मैं काउच पर बैठ कर रोता था। यह अजीब व भयावह था। ’

मनोवैज्ञानिक से मिली मदद
इसके बाद उन्होंने क्रिकेट तस्मानिया में एक खेल मनोवैज्ञानिक से सम्पर्क किया जिसका सकारात्मक प्रभाव पड़ा। पेन ने कहा, ‘पहली बार मैं उसके साथ केवल 20 मिनट के लिए बैठा व मुझे याद है कि उस कमरे से बाहर निकलना तो मैं बेहतर महसूस कर रहा था। ’ उन्होंने कहा, ‘इससे उबरने का पहला कदम यही था कि मुझे अहसास हुआ कि मुझे मदद की आवश्यकता है। इसके छह महीने बाद मैं पूरी तरह अच्छा हो गया था। ’