खेल के दौरान कोई खिलाड़ी नर्वस महसूस ना करे, इसके लिये यह करती है इंग्लैंड की टीम

खेल के दौरान कोई खिलाड़ी नर्वस महसूस ना करे, इसके लिये यह करती है इंग्लैंड की टीम

ऑस्ट्रेलिया के विरूद्ध सेमीफाइनल से एक दिन पहले की बात है. प्रातः काल के 9:30 बजे हमारी पूरी टीम व सपोर्ट स्टाफ प्रैक्टिस के बाद मैदान पर थी. सबके जेहन में एक ही बात थी- कल सेमीफाइनल है. कैप्टन इयान मॉर्गन व कोच ट्रेविस बेलिस ने खिलाड़ियों से एक ही बात कही- "हमें इस पर ज्यादा नहीं सोचना है कि कल कैसे खेलना है.हमें ये सोचना है कि हम कैसा खेलकर यहां तक पहुंचे हैं. जिस खेल ने हमें वनडे में नंबर-1 बनाया, जो खेल हमें वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल तक लेकर आया, वैसा ही खेल हमें कल भी जिताएगा.”

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‘क्रिकेट में मानसिक स्थिरता जरूरी’
हमारी जिंदगी के सबसे अहम मैच से पहले बस इतनी सी प्लानिंग हुई. हर खिलाड़ी शांत, रिलैक्स. यही शांत माहौल हमारी इस इंग्लैंड टीम की बड़ी ताकत है. क्रिकेट के ड्रेसिंग रूम वरग्बी, फुटबॉल जैसे खेलों के ड्रेसिंग रूम में यही अंतर होता है. वो सारे खेल फिजिकल हैं. यानी खिलाड़ी को शारीरिक रूप से पंप-अप रहने की आवश्यकता होती है. उनके ड्रेसिंग रूम बहुत ज्यादा शोर-गुल वाले व लाउड होते हैं. जबकि क्रिकेट माइंड गेम है. यहां ड्रेसिंग रूम में हर खिलाड़ी को स्पेस चाहिए, ताकि वो मानसिक स्थिर रह सके.

‘वर्ल्ड कप में सभी खिलाड़ी साथ हैं’
इतने बड़े मैच से पहले कोई खिलाड़ी नर्वस महसूस ना करे, इसकी जिम्मेदारी पूरी टीम की रहती है. हमें साथ रहना पसंद है. दिलचस्प बात बताता हूं. सामान्य तौर पर जब हम इंग्लैंड में ही खेल रहे हों तो कई बार होटल से मैदान आने-जाने के लिए कई खिलाड़ी अपनी ही कार का प्रयोग करना पसंद करते हैं. लेकिन वर्ल्ड कप के लिए हमने निर्णय किया था कि सारे खिलाड़ी टीम बस से ही सफर करेंगे.