चंद्रयान-2 : सात दिनों से घर-परिवार छोड़कर मिशन में जुटी वैज्ञानिकों की टीम, ऐसे मिली सफलता

चंद्रयान-2 : सात दिनों से घर-परिवार छोड़कर मिशन में जुटी वैज्ञानिकों की टीम, ऐसे मिली सफलता

चंद्रयान-2 के पास प्रक्षेपण से हिंदुस्तान ने आसमान में लंबी छलांग लगाई है। प्रक्षेपण के 17 मिनट बाद ही चंद्रयान सफलतापूर्वक पृथ्वी की कक्षा में पहुंच गया। अब ये 48वें दिन चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतरेगा। इसरो के साइंटिस्ट पल-पल पर नजर बनाए हुए हैं। ये मिशन वैज्ञानिकों की कड़ी मेहनत का नतीजा है।

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चंद्रयान-2 की कामयाबी पर अपनी टीम को शुभकामना देते हुए इसरो के चेयरमैन के सिवन भावुक हो गए। उन्होंने बोला कि ये हिंदुस्तान के लिए एतिहासिक दिन है। मिशन में जुटे वैज्ञानिकों की कड़ी मेहनत के बारे में बात करते हुए उनका गला भर आया। उन्होंने बोला कि चंद्रयान-2 की टीम सात दिनों से घर-परिवार छोड़कर मिशन में जुटी रही। अपने पारिवारिक कामों को छोड़कर, अपने महत्वपूर्ण चीजों को नजरअंदा कर ये टीम दिनरात कार्य में जुटी रही। करीब 100 वैज्ञानिकों की टीम ने एक सप्ताह तक अपने घर फोन तक नहीं किया। के सिवन ने बोला कि वो ऐसी टीम को सलाम करते हैं।

सिर्फ 5 दिन में दूर की खामी

चंद्रयान-2 में आई एक तकनीकी खामी को महज 5 दिन में दूर कर लिया गया। इसरो के चेयरमैन के सिवन ने सिर्फ 5 दिन में तकनीकी खामी को समाप्त करने के लिए टीम का आभार जताया। 15 जुलाई को क्रायोजेनिक इंजन में लीकेज की वजह से लॉन्चिंग टाल दिया गया था। इसके बाद 22 जुलाई की तारीख तय हुई। आकस्मित आई तकनीकी खामी को तुरंत अच्छा कर लिया गया। 5 दिन में दुरूस्त कर लॉन्चिंग की नयी तारीख तय हो गई। तकनीकी खामी की वजह से टाला गया 15 जुलाई का प्रक्षेपण

अगले डेढ़ महीने होंगे बेहद अहम

चंद्रयान-2 के चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने में अगले डेढ़ महीने बेहद अहम रहने वाले हैं। के सिवन ने बताया है कि अभी कार्य समाप्त नहीं हुआ है। यान को चांद के दक्षिणी ध्रुव पर सफलता से उतारने की चुनौती बड़ी है व इसमें कड़ी मेहनत करनी होगी। के सिवन ने बताया है कि चंद्रयान-2 को प्रक्षेपित करने वाले जीएसएलवी मार्क-3 जिसे बाहुबली बोला जा रहा है, उसकी क्षमता 15 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ा दी गई है। उन्होंने बोला कि लैंडर विक्रम व रोवर प्रज्ञान जैसी तकनीक हिंदुस्तान में पहली बार विकसित की गई है। सारी चीजें सफल होने के बाद अब करीब डेढ़ महीने बाद वो 15 मिनट बेहद अहम रहने वाले हैं, जब लैंडर विक्रम चांद की सतह पर उतरेगा।
चंद्रयान-2 को चांद के करीब पहुंचने में करीब डेढ़ महीने का वक्त लगेगा। इस दौरान चंद्रयान-2 कई चरणों से होकर गुजरेगा। उसके बाद वो दिन आएगा, जब चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर यान को लैंड करवाया जाएगा। ये सबसे जटिल चरण होगा। वैज्ञानिकों को भरोसा है कि ये जटिल चरण भी कामयाबी से पूरा होगा। चंद्रयान-2 के चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने में लगेगा डेढ़ महीने का वक्त

विज्ञान के साथ भगवान पर भी भरोसा

इसरो के वैज्ञानिक लॉन्चिंग से पहले पूजा पाठ भी करते हैं। किसी भी लॉन्चिंग से पहले आंध्र प्रदेश के तिरुमाला में मशहूर भगवान वेंकटेश्वर की पूजा होती है। वहां रॉकेट का छोटा मॉडल भी चढ़ाते हैं। ऐसा नहीं है कि इस तरह के पूजा पाठ सिर्फ इसरो के वैज्ञानिक ही करते हैं। नासा व रुसी वैज्ञानिक भी अपने मिशन से पहले धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। इसरो के सभी मशीनों व यंत्रों पर कुमकुम से त्रिपुंड बना होता है। उसी तरह से जैसा भगवान शिव के माथे पर बना होता है। परंपरा के मुताबिक रॉकेट लॉन्चिंग के दिन प्रोजेक्ट का प्रमुख नयी शर्ट पहनता है।