80 के दशक जैसे 'टैंकर वार' की तरफ बढ़ रहे हैं अमरीका व ईरान

80 के दशक जैसे 'टैंकर वार' की तरफ बढ़ रहे हैं अमरीका व ईरान

अमरीका ( America ) व ईरान ( Iran ) के बीच बढ़ते तनाव का प्रभाव अब समूचे खाड़ी क्षेत्र में दिखाई देने लगा है. खाड़ी राष्ट्रों के वर्तमान परिस्थिति व एक के बाद एक ऑयल टैंकरों को निशाने बनाने की घटना 80 के दशक के ‘Tanker War’ की याद दिला रहा है. ऐसा लग रहा है कि एक बार फिर से खाड़ी राष्ट्रों में टैंकर वार छिड़ने वाला है व उसकी शुरूआत हो चुकी है.

अभी हाल ही के कुछ दिनों में दो बार ओमान की खाड़ी ( gulf of oman ) में ऑयल टैंकरों को निशाना बनाया गया है. इन दो घटनाओं के बाद से यह सवाल वाजिब हो गया है कि क्या खाड़ी देश एक बार फिर से ‘Tanker War’ की ओर बढ़ रहे हैं?

हाल में दोनों बार ऑयल टैंकरों पर हुए हमले के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है, हालांकि ईरान ने इन आरोपों से मना किया है.

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ईरान पर लगाया आरोप

अमरीका व ईरान के बीच तनाव के बाद बीते एक महीने के अंदर दो बार ओमान की खाड़ी में ऑयल टैंकरों को निशाना बनाया गया है. पहली बार चार ऑयल टैंकरों पर हमला किया गया, जबकि दूसरी बार दो ऑयल टैंकरों को निशाना बनाया गया. ऑयल टैंकरों पर हमले के बाद ऑयल के कच्चे ऑयल के दामों में चार प्रतिशत की बढ़ोतरी देखने को मिली थी.

तेल टैंकरों पर हमले को लेकर ईरान को जिम्मेदार ठहराया गया. सऊदी अरब ने बोला कि ईरानी सेना ने इन हमलों को अंजाम दिया है. अमरीका ने भी बीते दिनों एक वीडियो जारी करते हुए ईरान को जिम्मेदार ठहराया था. अमरीका ने बोला था कि ईरान की रिवॉल्यूशनरी सेना ने इस हमले को अंजाम दिया है.

इससे पहले सऊदी अरब ( Saudi Arabia ) के दो ऑयल प्रतिष्ठानों को निशाना बनाते हुए हमला किया गया था. इसके लिए ईरान समर्थित ओमान के हौती विद्रोहियों को जिम्मेदारी माना गया था.

सऊदी ने बदले की कार्रवाई करते हुए ओमान के कई इलाकों पर हवाई हमला कर हौती विद्रोहियों को निशाना बनाया था.

'Tanker Wars' की वापसी

दरअसल, 1980 के दशक में खाड़ी राष्ट्रों के बीच आपसी झगड़ों के कारण तथाकथित टैंकर युद्ध छिड़ गया था. अनुमान के मुताबिक 1980 के दशक के अंत तक ईरान ने 160 से अधिक जहाजों (तेल टैंकरों) पर हमला किया था.

इस क्षेत्र में ईरान की भूमिगत समुद्री सुरंगों ने ऑयल टैंकरों को नुकसान पहुंचाना प्रारम्भ कर दिया. ऑयल टैंकरों के बचाने के लिए अमरीका ने अपने नौसैनिक जहाजों को शामिल किया, जिसके बाद फारस की खाड़ी से कुवैती ऑयल टैंकरों को बचाया गया.

इसके बाद वाशिंगटन व तेहरान के बीच युद्ध छिड़ गया. एक दिन चले इस युद्ध में अमरीका ने गलती से ईरानी यात्री जेट को मार गिराया था, जिसमें 290 लोग मारे गए थे. इसके बाद यह युद्ध खत्म हुआ.