2040 तक मीट जानवरों से नहीं बल्कि पेड़-पौधे से तैयार उत्पादों से मिलेगा : रिपोर्ट

2040 तक मीट जानवरों से नहीं बल्कि पेड़-पौधे से तैयार उत्पादों से मिलेगा : रिपोर्ट

2040 तक मीट जानवरों से नहीं मिलेगा. एक रिपोर्ट के अनुसार, 60% मीट पेड़-पौधे से तैयार उत्पादों से मिलेगा. इसका स्वाद भी बिल्कुल मीट की तरह ही होगा. ग्लोबल कंसल्टेंसी फर्म एटी केर्नी की यह रिपोर्ट विशेषज्ञों कीबातचीत पर आधारित है.

रिपोर्ट के मुताबिक, 2040 तक 35% मीट कल्चर्ड (कृत्रिम)जबकि 25% पेड़-पौधों से तैयार मीट होगा. हालांकि, मांस की तुलना में यह ज्यादा पौष्टिक होगा. कल्चर्ड व पेड़-पौधों से तैयार मीट में परंपरागत मांस की तुलना में ज्यादा कैलोरी होती है.

परंपरागत मीट की तरह ही सारी खूबियां मिलेंगी

रिपोर्ट में बोला गया है किपेड़-पौधों से तैयार मीट औरकल्चर्ड मीट में भी वे सारी खूबियां होंगी जो परंपरागत मीट में होती है. कल्चर्ड मीट जानवरों को बिना नुकसान पहुंचाएउनकीकोशिकाओं से तैयार किया जाताहै.परंपरागत मांस उद्योग के लिए लाखों जानवरों को पाला जाता है. इस उद्योग का टर्नओवर अरबों रुपएहै. वैज्ञानिक अध्ययनों में यह बात सामने आई है कि मांस उद्योग से पर्यावरण पर बुरा असर पड़ता है. इसकी वजह से कार्बन उत्सर्जन में भी बढ़ोतरी होती है.

परंपरागत मांस उद्योग से जलवायु संकट बढ़ रहा

पशु आहार की खेती के लिए जंगलों को भी काटा जा रहा है. इससे जलवायु संकट बढ़ रहाहै. नदियां व महासागर प्रदूषित हो रहे हैं. इसकी वजह से भी कंपनियां अब पेड़-पौधों पर आधारित मीट उत्पाद तैयार करने पर ध्यान देने लगी हैं. एटी केर्नी का अनुमान है कि इस तरह के शाकाहारी उत्पादों में एक बिलियन डॉलर का निवेश किया गया है. इसमें पारंपरिक मीट बाजार पर हावी कंपनियां भी शामिल हैं. कई कंपनियां जानवरों को बिना मारे या नुकसान पहुंचाए उनके कोशिकाओं से मांस तैयार करने में जुटी हैं.

काफी लोग अब शाकाहारी जीवनशैली अपना रहे

एटी केर्नी के एक सहयोगी केरन गेरहार्ट ने बोला कि बहुत सारे लोग अब शाकाहारी जीवनशैली अपना रहे हैं. लोग पर्यावरण व पशु कल्याण के प्रति अधिक सचेत हो रहे हैं. ज्यादा मांस खाने वाले लोगों को भी कल्चर्ड मीट में उसी प्रकार कीडाइट मिलेगी, जैसे परंपरागत मीट में मिलतीहै. इसमें न पर्यावरण को कोई नुकसान होगा, न ही जानवर मारे जाएंगे.