इन 5 कारणों की वजह से किसी भी महिला को रिश्ते में 'समझौता' करने के लिए मजबूर होना पड़ता है

इन 5 कारणों की वजह से किसी भी महिला को रिश्ते में 'समझौता' करने के लिए मजबूर होना पड़ता है

कहते हैं जोड़ियां आसमान में बनती हैं और रिश्ता धरती पर निभाया जाता है. लेकिन स्वर्ग में बनी इन जोड़ियों में अगर आपसी तालमेल और प्यार की कमी हो तो ये रिश्ता ज्यादा देर नहीं टिका रह सकता है. ऐसे में उनके टूटते हुए रिश्ते को बचाने के लिए महिलाओं के ऊपर जाने-अनजाने एक प्रेशर बना होता है. आइए जानते हैं आखिर कौन से हैं वो 5 कारण जो किसी भी महिला को रिश्ते में 'समझौता' करने के लिए मजबूर करते हैं.

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कन्फ़्यूजन-

मनोवैज्ञानिकों की मानें तो शारीरिक और मानसिक उत्पीड़ना झेलना के बावजूद कई बार महिलाएं अपने रिश्ते को लेकर कन्फ़्यूज रहती हैं. वह अपने साथ होने वाले दुर्व्यवहार के लिए खुद को ही दोषी मानने लगती हैं. जिसकी वजह से धीरे-धीरे उनके भीतर छिपा आत्मसम्मान कहीं खो जाता है और उन्हें लगने लगता है कि उनका जीवन अर्थहीन हो गया है.

समाज का डर-

कई बार महिलाएं समाज के डर से भी कि 'लोग क्या कहेंगे' ये सोचकर अपने हिंसक रिश्ते से बाहर नहीं निकल पाती हैं. इतना ही नहीं कई बार तो वो अपने साथ होने वाले दुर्व्यवहार के बारे में दूसरों से बात करने में भी डरती हैं.

पार्टनर के सुधरने की उम्मीद-

ऐसा नहीं है कि इस तरह के रिश्ते में सिर्फ कम पढी लिखी महिलाएं ही फंसी होती हैं. कामकाजी और पढी लिखी महिलाएं भी कई बार ऐसे रिश्तों को मजबूरी में निभाती हैं. इसके पीछे उन्हें अपने पार्टनर के भविष्य में सुधरने की उम्मींद छिपी होती हैं. उन्हें लगता है कि अगर वो अपने पार्टनर को छोड़कर चली जाएंगी तो उनका पार्टनर टूटकर बिखर जाएगा. भावनाओं में बहकर वो सालों साल इस घुटन भरे रिश्ते को निभाती रहती हैं.