योग अपने शाब्दिक अर्थ के अनुसार सब को जोड़ता है, छोटे मन को बड़े मन से जोड़ता है

योग अपने शाब्दिक अर्थ के अनुसार सब को जोड़ता है, छोटे मन को बड़े मन से जोड़ता है

योग एक ऐसी तकनीक है, जो हमारे शरीर, मन व आत्मा को एक करती है. यह हमारे अंदर से तनाव व कुंठा को दूर करती है. जब हम सामान्य श्वास की तकनीकों, ध्यान, प्राणायाम वकसरतों को करते हैं, तो यह सब हमारे शरीर और मन को अंदर से खुश व अच्छा रहने के लिए प्रेरित करती हैं.

यदि आप प्रसन्न हैं, आप कभी हिंसक नहीं हो सकते. योग अपने शाब्दिक अर्थ के अनुसार सब को जोड़ता है, वह छोटे मन को बड़े मन से जोड़ता है. जब शरीर व मन एक साथ नहीं हों, तो वह योग नहीं है. योग में हम इनके मध्य सद्भाव लाते है.

यदि आप एक बच्चे को देखेंगे,तो पाएंगे कि जिस प्रकार बच्चे श्वास लेते हैं, वह वयस्क लोगों से अलग होता है. यह श्वास ही है, जो शरीर व भावनाओं के मध्य सेतु का काम करती है.यदि हम श्वास पर ध्यान दें, तो अपनी भावनाओं को भी नियंत्रित कर सकते हैं व नकारात्मकता से दूर रह सकते हैं. एक योगी होने की निशानी है कि हम फिर से बच्चा बन जाएं.

एक योगी की यह भी पहचान होती है कि वह अनंत से जुड़ा होता है व सभी लोगों से भी जुड़ा होता है. एक योगी वह है, जो निपुण व पर्याप्त लोचदार हो. कुछ लोगों के पास बहुत ही लोचदार शरीर होता है, परंतु मन बहुत ही जड़ होता है. एक जड़ आदमी कभी भी रोचक या रसदार नहीं होता है. योगी वही है, जो एक ओर तो जड़ नहीं होता है, दूसरी ओर निरर्थक भी नहीं होता. उसके अंदर एक मासूमियत भरी ज्ञान की पूंजी होती है. वह बच्चों की तरह होता है, लेकिन बच्चा नहीं होता है. सहजता के साथ उसके पास तीव्र बुद्धि होती है. योगी समझदार औरसंवेदनशील दोनों होते हैं. कई बार लोग समझते हैं कि वे समझदार है, परंतु वे संवेदनशील नहीं होते हैं. व जो संवेदनशील हैं, समझदार नहीं होते हैं. इन दोनों का मिलावट ही सर्वश्रेष्ठ आदमी का निर्माण करता है.

एक योगी का मन समता में रहता है. आप एक योगी में सारी चारित्रिक विशेषता पा सकते हैं, क्योंकि वह खुद के साथ संपूर्ण सृष्टि व सभी से जुड़ा रहता है. सिर्फ कोशिश व नियमित एक्सरसाइज किसी को भी योगी बना सकते हैं. यदि आप दुखी हैं, तो योग आपको दुख से बाहर लाता है. यह उस कौशल को भी पकड़ने में मदद करता है, जो आपके पास नहीं है. यह आपकी रिएक्शन ही है, जो आपको खुशी या दुख दे सकती है. यदि आप अपने कार्यों में कुशल हैं, तब आपके काम आपको खुशी ही देंगे. बस आवश्यकता है एक कदम योग की ओर बढ़ाने की.