पंजाब विधानसभा चुनाव 2022 के बारे में वो हर जानकारी जो आपके लिए है ज़रूरी

पंजाब विधानसभा चुनाव 2022 के बारे में वो हर जानकारी जो आपके लिए है ज़रूरी

विस्तार पंजाब के विधानसभा चुनाव के लिए पिछले कुछ दिन से अकाली दल का प्रचार धीमा पड़ा हुआ था, कारण था पार्टी के सीनियर नेता बिक्रम मजीठिया पर ड्रग्स केस में  दर्ज एफआईआर। लेकिन पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट से मजीठिया को अंतरिम जमानत मिलने के बाद अब बादल परिवार फिर पूरे उत्साह के साथ मैदान में दिखेगा।



सूत्रों के अनुसार, मजीठिया को हाईकोर्ट से राहत मिलने से उत्साहित सांसद सुखबीर बादल बठिंडा देहाती और सांसद हरसिमरत कौर बादल बठिंडा शहरी से चुनाव प्रचार की शुरुआत कर सकती हैं। वैसे चुनाव आयोग के आदेशों के अनुसार पंजाब में रैलियों पर 15 जनवरी तक पाबंदी है। 9 जनवरी को चुनाव आचार संहिता लागू हई थी और मजीठिया पर करीब एक माह पहले केस दर्ज हुआ था। 

राजनीतिक गलियारों में चर्चा थी कि जैसे ही मजीठिया पर केस दर्ज हुआ तो शिअद के बडे़ नेताओं ने बादल परिवार को लोगों के बीच जाकर चुनाव प्रचार न करने की सलाह दी थी। इसी कारण बादल परिवार ने पूरी तरह चुनाव प्रचार से दूरी बनाएं रखी थी। अब मजीठिया को जमानत मिलने के बाद बादल परिवार पूरी ताकत के साथ चुनाव मैदान में उतरेगा। सबसे पहले शिअद अध्यक्ष सुखबीर बादल और सांसद हरसिमरत कौर बादल मैदान में उतरेंगे। पूर्व मुख्य मंत्री प्रकाश सिंह बादल भी पूरी तरह से शांत रहे। उन्होंने अपने विस हल्के लंबी के वोटरों से भी पूरी तरह दूरी बनाई रखी।  15 जनवरी के बाद शिअद नेता होंगे एक्टिव  शिअद सूत्रों से पता चला है कि 15 जनवरी के बाद पूर्व मुख्य मंत्री प्रकाश सिंह बादल, सुखबीर सिंह बादल और हरसिमरत कौर बादल के निशाने पर पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष नवजोत सिद्धू और मुख्यमंत्री चरणजीत चन्नी होंगे। बादल परिवार समेत सभी अकाली नेता मजीठिया पर दर्ज हुए केस को राजनीतिक रंजिश से प्रेरित बता रहे हैं।


क्या बिना मर्जी लगाया जा सकता है कोरोना का टीका? सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दिया जवाब

क्या बिना मर्जी लगाया जा सकता है कोरोना का टीका? सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दिया जवाब

नई दिल्ली: केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी कोविड-19 टीकाकरण दिशानिर्देशों में किसी व्यक्ति की सहमति के बिना उसका जबरन टीकाकरण कराने की बात नहीं की गई है। दिव्यांगजनों को टीकाकरण प्रमाणपत्र दिखाने से छूट देने के मामले पर केंद्र ने न्यायालय से कहा कि उसने ऐसी कोई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी नहीं की है, जो किसी मकसद के लिए टीकाकरण प्रमाणपत्र साथ रखने को अनिवार्य बनाती हो।

केंद्र ने गैर सरकारी संगठन एवारा फाउंडेशन की एक याचिका के जवाब में दायर अपने हलफनामे में यह बात कही। याचिका में घर-घर जाकर प्राथमिकता के आधार पर दिव्यांगजनों का टीकाकरण किए जाने का अनुरोध किया गया है। हलफनामे में कहा गया है कि भारत सरकार और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से जारी दिशानिर्देश संबंधित व्यक्ति की सहमति प्राप्त किए बिना जबरन टीकाकरण की बात नहीं कहते। केंद्र ने कहा कि किसी भी व्यक्ति की मर्जी के बिना उसका टीकाकरण नहीं किया जा सकता।