एनआईए न्यायालय ने एल्गार परिषद के आरोपी महेश राउत की जमानत याचिका की खारिज

एनआईए न्यायालय ने एल्गार परिषद के आरोपी महेश राउत की जमानत याचिका की खारिज

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) की विशेष न्यायालय ने गुरुवार को एल्गार परिषद मुद्दे में अरैस्ट वन अधिकार अधिनियम कार्यकर्ता महेश राउत की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है. महेश राउत पर कथित तौर पर नक्सली विचारधारा और अवैध गतिविधियों को बढ़ावा देने का आरोप है.

राउत के एडवोकेट विजय हिरेमठ ने न्यायालय को बताया कि वन अधिकार कार्यकर्ता ने नागपुर और नासिको में पढ़ाई की है. इसके बाद 2011 में टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS) से पास आउट हुआ. वह गोवा में पढ़ा रहे थे और संघर्ष क्षेत्रों पर फेलोशिप भी किया है. इसके अतिरिक्त वह ग्रामीण विकास मंत्रालय के प्रतिष्ठित पीएम ग्रामीण विकास प्रोग्राम का भी भाग रहा है और गढ़चिरौली कलेक्टर हिरेमठ के साथ भी कार्य किया है.

बता दें कि राउत पर आरोप है कि राउत ने प्रतिबंधित संगठनों को धन उपलब्ध कराया था और कुछ विद्यार्थियों को माओवादी आंदोलन में शामिल होने के लिए जंगल में भेज था. हालांकि, राउत के एडवोकेट ने दावा किया कि अभियोजन पक्ष एक भी नाम सबूत के तौर पर नहीं बता सका है. विजय हिरेमठ ने ये भी बोला कि फंडिंग को लेकर रिकार्ड में भी कोई जानकारी नहीं है. न ही चार्जशीट में ऐसा कोई दावा है कि राउत माओवादी आंदोलन में भर्ती को बढ़ावा दे रहे थे.

एनआईए ने दावा किया था कि एल्गार परिषद मुद्दे में सबसे पहले गिरफ़्तार हुए रोना विल्सन के लैपटॉप से मिले मेल में राउत का नाम था. इस मुद्दे पर राउत के एडवोकेट विजय हिरेमठ ने अपनी दलील में बोला कि "अमेरिका के अर्सनाल डिजिटल फोरेंसिक प्रयोगशाला की रिपोर्ट में मेल को लेकर दावा किया गया था कि रोना विल्सन (Rona Wilson) के लैपटॉप से बरामद षड्यंत्र के मेल स्वयं उन्होंने नहीं लिखे थे, बल्कि इन्‍हें प्लांट करवाया गया था. इस रिपोर्ट आधार पर मुद्दे को पहले ही उच्च न्यायालय में चुनौती दी जा चुकी है. इस मेल में एक महेश और 5 लाख का उल्लेख है लेकिन एजेंसी पैसे का पता लगाने में विफल रही है. इसके साथ ही एजेंसी ये भी पता लगाने में विफल रही है कि जिस महेश का नाम मेल में है क्या महेश राउत वही महेश हैं या कोई और है. ये सभी आधारहीन आरोप हैं."

वहीं, दूसरी तरफ एनआईए की तरफ से पेश हुए एडवोकेट प्रकाश शेट्टी ने तर्क दिया कि राउत पहले ही पुणे की न्यायालय के समक्ष इस आधार पर जमानत की याचिका दायर कर चुके हैं. उस याचिका को न्यायालय ने खारिज कर दिया था. राउत द्वारा किये गए दावों पर पहले ही न्यायालय ने विचार कर जमानत याचिका खारिज कर दी थी.

राउत ने पहले ही पुणे की एक न्यायालय के समक्ष इसी तरह के आधार पर जमानत याचिका दायर की थी, जिसे खारिज कर दिया गया था और राउत जिन सभी दस्तावेजों का जिक्र कर रहे हैं, उनकी जमानत याचिका को खारिज करते हुए पुणे की न्यायालय ने पहले ही विचार कर लिया है.

इसके साथ ही एनआईए ने दावा किया कि रोना विल्सन के लैपटॉप से मिले मेल में महेश के नाम का उल्लेख है और महेश राउत ने ही अज्ञात चैनलों के माध्यम से सुधीर धावले, शोमा सेन और सुरेंद्र गाडलिंग को एल्गार परिषद प्रोग्राम के लिए ₹5 लाख दिए थे. आगे एजेंसी ने ये भी दावा किया कि पुणे पुलिस ने ही प्रारम्भ में इस मुद्दे की जाँच की थी. पुणे पुलिस ने भी आरोप लगाया था कि साल 2017 में राउत टीआईएसएस (TISS) के विद्यार्थियों को फरार चल रहे नक्सली नेताओं से मिलाने ले गए थे. राउत ने TISS के पूर्व विद्यार्थियों को नक्सली पार्टी मे भर्ती कराया था और उन विद्यार्थियों ने जंगलों में हथियारों का प्रशिक्षण लिया था.

बता दें कि महाराष्ट्र के भीमा-कोरेगांव हिंसा केस में एनआईए ने साल 2018 में महाराष्ट्र के नागपूर से पुणे पुलिस एडवोकेट सुरेंद्र गाडलिंग, कार्यकर्ता महेश राउत और शोमा सेन को हिरासत में लिया था.


Omicron in India: भारत में ओमीक्रॉन के 4 केस मिलने के बाद मचा हड़कंप

Omicron in India: भारत में ओमीक्रॉन के 4 केस मिलने के बाद मचा हड़कंप

Omicron Variant in India: कोरोना वायरस के नए वेरिएंट ओमीक्रॉन के अब तक चार मामले भारत में मिले हैं. जबकि कई सैंपल जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए भेजे गए हैं, जिनके नतीजों का अभी इंतजार किया जा रहा है. चार में से तीन मामलों में पता चल गया है कि यह ओमीक्रॉन से कैसे संक्रमित हुए क्योंकि इन्होंने ‘खतरे’ की श्रेणी वाले देशों की यात्रा की थी. चारों ही मरीज पुरुष हैं (Omicron Symptoms). इनमें बुजुर्ग और वयस्क दोनों शामिल हैं. वहीं एक मरीज का टीकाकरण नहीं हुआ है. सभी मामलों में एक चीज सामान्य है. इन मरीजों में संक्रमण के या तो हल्के लक्षण दिखे हैं या फिर कोई लक्षण नहीं दिखे. आज इन सबके बारे में विस्तार से जानते हैं.

कर्नाटक में मिला पहला मरीज

भारत में ओमीक्रॉन का पहला मामला एक 66 वर्षीय दक्षिण अफ्रीकी (South Africa) नागरिक में मिला, जो अब भारत छोड़ चुका है. प्राइमरी और सेकेंडरी तौर पर उसके संपर्क में आए लोगों की जांच करने पर रिपोर्ट निगेटिव आई है. ये शख्स 20 नवंबर को बेंगलुरु पहुंचा और हवाई अड्डे पर उसकी जांच की गई (Karnataka Omicron Case). जैसे ही रिपोर्ट पॉजिटिव आई, उसे एक सरकारी डॉक्टर उस अस्पताल में ले गए जहां वह रह रहे थे और आइसोलेट होने की सलाह दी. मरीज का सैंपल फिर से लिया गया और जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए भेजा गया.

जब तक जीनोम सीक्वेंसिंग का रिजल्ट आया और यह पुष्टि हुई कि वह ओमीक्रॉन वेरिएंट से संक्रमित है, तब तक वह देश छोड़ चुका था. हुआ ये कि 23 नवंबर को उसने एक निजी लैब में फिर से जांच कराई थी, जहां उसका रिजल्ट निगेटिव आया. अब यहां से मरीज निगेटिव रिपोर्ट लेकर 27 नवंबर को दुबई के लिए रवाना हो गया. दक्षिण अफ्रीका के इस नागरिक का टीकाकरण हो चुका था. अब कर्नाटक सरकार ने उसकी निजी लैब वाली निगेटिव रिपोर्ट पर जांच करने का आदेश दिया है.

कर्नाटक में मिला दूसरा मरीज

भारत में ओमीक्रॉन वेरिएंट का दूसरा मामला भी कर्नाटक में मिला. एक 46 वर्षीय डॉक्टर इस वेरिएंट से संक्रमित पाया गया है. जिसकी कोई ट्रैवल हिस्ट्री नहीं है. एनेस्थिसियोलॉजिस्ट डॉक्टर ने 21 नवंबर को हल्के लक्षणों की सूचना दी और उनकी जांच की गई. चूंकि उनकी रिपोर्ट में बहुत अधिक वायरल लोड का संकेत देने वाली कम सीटी वैल्यू थी, इसलिए उनका सैंपल जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए भेजा गया और फिर ओमीक्रॉन की पुष्टि हुई.

डॉक्टर को फरवरी में कोविड की वैक्सीन लगाई गई थी. लेकिन एंटीबॉडी टेस्ट की रिपोर्ट में पता चला कि उनकी एंटीबॉडी का स्तर कम हो गया है (Vaccines on Omicron). उन्होंने कोई विदेश यात्रा नहीं की, इसलिए अभी तक यह पता नहीं चल पाया है कि वे ओमीक्रॉन से कहां से संक्रमित हुए. रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने 20 नवंबर को एक अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा सम्मेलन में भाग लिया था, जिसमें कई विदेशी प्रतिनिधी भी आए थे. लेकिन यह संभव हो सकता है कि सम्मेलन में भाग लेने से पहले ही वह वायरस के संपर्क में आए हों.

गुजरात में मिला तीसरा मामला

भारत में ओमीक्रॉन वेरिएंट का तीसरा मामला 72 वर्षीय व्यक्ति में मिला, जो जिम्बाब्वे से गुजरात के जामनगर पहुंचा था. वह 28 नवंबर को यहां पहुंचे और 2 दिसंबर को ओमीक्रॉन से संक्रमित मिले (Omicron Variant in Gujarat). उनका टीकाकरण पूरा हो चुका था. जहां तक ​​लक्षणों की बात है, तो उन्हें थोड़ी कमजोरी थी और गले में खराश थी. वह कई सालों से जिम्बाब्वे में रह रहे थे और अपने ससुर से मिलने गुजरात पहुंचे थे.

महाराष्ट्र में मिला चौथा मामला

भारत में ओमीक्रॉन वेरिएंट का चौथा मामला एक 33 साल से मरीन इंजीनियर में मिला. वह अप्रैल से ही जहाज पर थे इसलिए उनका टीकाकरण नहीं हुआ है (Maharashtra Omicron Case). इस बात की जानकारी कल्याण डोंबिवली नगर निगम अधिकारी ने दी है. वह नवंबर के आखिर तक जहाज पर थे और फिर दुबई के रास्ते दक्षिण अफ्रीका से दिल्ली हवाई अड्डे पहुंचे. अब उन्हें एहतियात के तौर पर कल्याण के एक कोविड सेंटर में रखा गया है. 24 नवंबर को उन्हें हल्का बुखार आया था. अधिकारियों के अनुसार, उनके संपर्क में आए सभी लोगों की जांच रिपोर्ट निगेटिव आई है.