विद्यार्थियों और शिक्षकों से गुलजार रहने वाले लक्ष्मी नगर-मुखर्जी नगर में पसरा है सन्नाटा

विद्यार्थियों और शिक्षकों से गुलजार रहने वाले लक्ष्मी नगर-मुखर्जी नगर में पसरा है सन्नाटा

छात्रों से गुलजार रहने वाला इलाके में इनदिनों सन्नाटा पसरा हुआ है. वह चाय की दुकानों पर भी रौनक नहीं है जहां हिंदुस्तान ही नहीं सारे दुनिया की पॉलिटिक्स पर बहस छिड़ी रहती थी. जी हां, हम बात कर रहे हैं कि सिविल सेवा के लिए देश के बड़े कोचिंग हब मुखर्जी नगर की, युवाओं के मिनी हिंदुस्तान के तौर पर प्रसिद्ध यह क्षेत्र कोरोना वायरस के खौफ से वैसे सूनसान पड़ा है.

कोरोना वायरस जनित लॉकडाउन ने सबसे पहले कोचिंग का शटर गिराया. इससे बच्चे अपने गांव और शहर चले गए. नतीजन, पीजी बंद हुए, ढाबों पर ताले लग गए, चाय की दुकानें वीरान हो गईं, प्राइवेट लाइब्रेरी बंद हो गई.

कुल मिलाकर इसका प्रभाव तालाबांदी के तौर पर दिखा. अनलॉक के दो सीजन बीत जाने के बाद पुस्तकों की दुकानें खुलने के साथ रेहड़ी-पटरी वाले भी कार्य पर लौट आए हैं, लेकिन विद्यार्थियों की गैर-मौजूदगी कारोबार को रास्ते पर नहीं ला पाई है. 

नींद से जगने के बाद आसपास के इलाके के विद्यार्थी यहां कुल्हड़ वाले चाय की दुकान पर जरूर पहुंच जाते है. यही से प्रारम्भ होती है उनकी दिनचर्या. यहां प्रातः काल के वक्त ही अखबार पढने के साथ बहस छिड़ जाती है. बहस भी किसी ना किसी पढ़ाई से जुड़े विषय पर. गप्पे लड़ाते हुए विद्यार्थी कैरियर की ही चिंता जताते है तो आकस्मित से बहस हिंदुस्तान की विदेश नीति, अंतर्राष्ट्रीय विषय पर प्रारम्भ हो जाती है. लेकिन यह चाय की दुकान इनदिनों गुलजार नहीं हो रही. चाय पहुंचाने वाला छोटू कहता है कि मुझे तो अखबार पढने की आवश्यकता ही नहीं होती. भईया लोग ही इतना बक-बक करते रहते है देश-दुनिया की जानकारी मिल जाती है.

लाइब्रेरी भी हुई बंद

नेहरू विहार इलाका: प्रातः काल 9 बजे
मुखर्जी नगर के रिहायशी इलाके में जब से कोचिंग संस्थान बंद होने का फरमान आया तब से नेहरू विहार स्थित बर्धमान प्लाजा में रौनक आ गया था. पिछले वर्ष ज्यादातर कोचिंग संस्थान इसी प्लाजा में पढ़ाई कराना प्रारम्भ कर दिए. लेकिन यह स्थान भी सुनसान पड़ा है. सभी कोचिंग संस्थान के बाहर ताले लटक रहे तो कई कोचिंग वाले किराया नहीं देने की स्थिति में दुकान खाली कर रहे है.

प्राइवेट लाइब्रेरी भी बंद: प्रातः काल 10 बजे
श्रवण कुमार इनदिनों खासे परेशान है. नेहरू विहार स्थित अपने लाइब्रेरी प्रतिदिन जाते है. लाइब्रेरी की सीढिय़ों पर बैठकर रोजगार प्रारम्भ होने की बांट जोहते है. श्रवण कुमार की कठिन यह है कि प्राइवेट लाइब्रेरी को लेकर सरकार कोई बात ही नहीं करती. यही स्थिति रही तो शायद रोजगार ही छिन जाएगा. पिछले चार महीने से पांच लाख रुपया लाइब्रेरी के किराये का उधार हो गया है. ऐसे में बेहद ही कठिन है.

कंटेनमेंट जोन के कारण भी रोजगार प्रभावित: समय दोपहर 12 बजे
मुखर्जी नगर का व्यवसायिक क्षेत्र कंटनेमेंट जोन में आ गया है. एक मिठाई की दुकान में जैसे ही ही कोरोना वायरस से संक्रमितों की संख्या बढ़ी तो सारे इलाके को सील कर दिया है. लिहाजा इस जोन स्थित ढाबा, दवाई की दुकान, कॉस्मेटिक दुकान, बेकरी समेत सभी दुकाने बंद है. यहां के एक अन्य मिठाई की दुकान वाले का बोलना है कि एक आदमी की वजह से पूरा ही व्यापार चौपट हो गया है. स्टेशनरी दुकान वाले का बोलना है कि विद्यार्थियों के नहीं रहने से वैसे ही दुकान का रेंट देना भारी पड़ रहा है.

ऑनलाइन की तरफ मुड़ रहे कोचिंग वाले
कोचिंग चलाने वाले अब ज्यादातर ऑन लाइन की तरफ रूख कर रहे है. छोटे कोचिंग इंस्टीट्यूट तो लगभग बंद होने के कगार पर है. कोचिंग चलाने वाले सुनील सिंह का बोलना है कि मुखर्जी नगर में कोचिंग के लिए स्थान किराया लेने पर कम से कम एक लाख रुपया प्रतिमाह देना होता है. कोरोना वायरस कबतक प्रभावित करेगा कोई नहीं जानता. ऐसे में औनलाइन प्लेटफार्म पर आकर पढ़ाना ही बेहतर है. उन्होंने औनलाइन पढ़ाई के फायदे को भी गिनाया. विद्यार्थी अनिश का बोलना है कि कोचिंग बंद होने से पढ़ाई प्रभावित हो रही है.

यह वही क्षेत्र है, जो वर्ष के 12 महीने व तकरीबन 24 घंटे गुलजार रहता था. यहां की गलियों में हमेशा विद्यार्थियों की रेलमपेल रहती थी. किताबों की दुकानों पर खड़े होने की  जगह नहीं रहती थी, लेकिन सोमवार करीब एक खंडेलवाल बुक शॉप पर सन्नाटा पसरा है. जी हां, हम बात कर रहे है कि लक्ष्मीनगर के सीए कोचिंग हब की, कोरोना की मार से जो अभी  तक नहीं उबर पाया है. अमर उजाला संवाददाता आदित्य पांडेय की रिपोर्ट

समय: करीब एक बजे
स्थान: लक्ष्मी नगर मेट्रो स्टेशन
खंडेलवाल बुक शॉप के मालिक राधेश्याम खंडेलवाल ने बताया कि वह पिछले 4 महीने से केवल टाइम पास कर रहे हैं. दिसंबर से एक पैसे का धंधा नहीं हो रहा है. वो सीए व प्रतियोगी परीक्षाओं से संबंधित किताबें बेचते हैं. फरवरी में जो माल उन्होंने मंगाया था अब तक वही नहीं बिका है. प्रातः काल से दोपहर तक उन्होंने कुल 120 रुपए की बिक्री की है. 

यहां की बड़ी किताबों की दुकान सरस्वती किताबों का मेला के मालिक मनोज कुमार जैन अकेले अपने बेटे के साथ दुकान में बैठे मिले. वार्ता के दौरान उन्होंने बताया की उनके पास सीए, कंपटीशन, एनसीईआरटी व इंटरनेट की वह किताबें उपलब्ध रहती हैं जो विद्यार्थियों को दूसरी जगहों पर कठिन से मिलती हैं. लेकिन लॉकडाउन के बाद से उनका व्यवसाय एक रुपए में केवल 10 पैसे ही रह गया है. वह तो औपचारिकता बस दुकान खोलकर प्रतिदिन बैठते हैं. 

सारे पीजी खाली, गलियों में पसरा सन्नाटा:
शकरपुर गली नंबर दो
समय 1.30 बजे

लक्ष्मी नगर व शकरपुर की लगभग दर्जनभर गलियों के अंदर सैकड़ों पीजी हैं. लोग बताते हैं इनमें करीब ढाई लाख सीए व प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थी रहते थे. लेकिन मौजूदा समय लगभग सारे पीजी व छात्रावासों में ताला लगा हुआ है. शकरपुर लक्ष्मी नगर की गली नंबर 2 में लाइन से पीजी बने हुए हैं. करीब 50 मीटर अंदर घुसने पर श्याम जी गर्ल पीजी का गेट खुला मिला. अंदर जाकर इसके मालिक मनोज गुप्ता से मुलाकात हुई. उन्होंने बताया कि सबसे ज्यादा इस समय उन्हें बिजली का बिल मार दे रहा है. पिछले 2 महीने में 80 हजार रुपए बिजली का बिल उन्होंने भरा है. पीजी के अंदर 50 में से केवल 4 बच्चे बचे हैं. उनका पूरा स्टाफ प्रतिदिन आता है. विद्यार्थियों के पीजी छोड़कर चले जाने के कारण उन्हें इसका संचालन करना कठिन हो रहा है.

लोगों ने जूस पीना भी छोड़ा, ढाबे रहते बंद
शकरपुर गली नबर-3
समय: 2.30 बजे

लगभग डेढ़ घंटे लक्ष्मी नगर व शकरपुर की गलियों में घूमने पर केवल एक जूस की दुकान खुली दिखी. यह वही गलियां हैं जहां आम दिनों रात के 12 बजे भी खाना पीना उपलब्ध होता था. जूस की दुकान पर भी अकेले अतुल कुमार मक्खियां उड़ाते नजर आए. उन्होंने बताया कि कोरोना वायरस के भय से लोगों ने जूस पीना छोड़ दिया है. पहले वह दिन भर में सौ-डेढ़ सौ गिलास जूस बेचा करते थे अब कठिन से 15 गिलास जूस बेच पाना कठिन है. इसका सीधा प्रभाव कमाई पर पड़ा है. उनका बोलना था कि लगर सारे दुकानदारों का यही हाल है. ढाबे और होटल बंद पड़े हैं, रेहड़ी-पटरी की दुकानों पर लोग भी आने से अभी बच रहे हैं.