जानिए आखिर कैसे बच्चों के फेवरेट मैथ टीचर से आतंकवादी बन गया रियाज नायकू

जानिए आखिर कैसे बच्चों के फेवरेट मैथ टीचर से आतंकवादी बन गया रियाज नायकू

बहुत ज्यादा प्रयत्न के बाद आखिरकार सुरक्षबलों को हिजबुल मुजाहिदीन (Hizbul Mujahideen) के कमांडर रियाज नायकू (Riyaz Naikoo) के सफाये में सफलता मिली। बुरहान वानी (Burhan Wani) के बाद नायकू ही घाटी के युवाओं के लिए पोस्टर बॉय बना हुआ था। यहां तक कि उसे A++ श्रेणी का आतंकवादी माना गया था, जिसपर 12 लाख का इनाम था। वर्षों तक चली लुकाछिपी के बाद पुलवामा (Pulwama) जिले के बेगपोरा में आतंक के इस पर्याय का खात्मा हो सका। जानते हैं, नायकू की पूरी कहानी।

नायकू की पैदाइश वर्ष 1985 में अवंतिपोरा के बेगोपोरा गांव में हुई। ये दक्षिण कश्मीर का भाग है। दर्जी पिता की संतान नायकू ने गणित से ग्रेजुएशन किया व उसके पास लोकल स्कूल में पढ़ाने भी लगा। बोला जाता है कि पढ़ाने व वार्ता के अपने ढंग के कारण नायकू जल्द ही स्कूल में बहुत ज्यादा लोकप्रिय हो गया। यहां तक कि वो गरीब बच्चों को मुफ्त में पढ़ाया करता था। लेकिन ये सिलसिला 2012 के 1 जून को एकाएक थम गया। मैथ टीचर गायब हो गया। गायब होने की वजह 2 वर्ष पहले घटी एक घटना थी। दरअसल घाटी में हो रहे एक प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने आंसू गैस का गोला छोड़ा, जिसके कारण 17 वर्ष के एक लड़के तफैल अहमद मट्टो की मृत्यु हो गई। इसके बाद बेगोपोरा में खासा हंगामा हुआ, जिसमें मैथ टीचर भी शामिल था। पुलिस ने दूसरे लोगों के साथ उसे भी हिरासत में लिया व बाद में छोड़ दिया। लेकिन इस घटना के कारण नायकू पूरी तरह से बदल चुका था।

मई 2012 के आखिर में नायकू ने अपने दर्जी पिता से कुछ पैसे मांगे। उसका बोलना था कि वो एक कोर्स में एडमिशन लेने जा रहा था। पैसे लेकर घर से निकला नायकू फिर मासूम टीचर की तरह नहीं लौटा। बाद में पता चला कि वो हिज्बुल मुजाहिदीन में शामिल हो चुका था। संगठन में उसका कद तेजी से बढ़ने लगा व 8 जुलाई 2016 को आतंकवादी कमांडर बुरहान वानी की मृत्यु के बाद वो कमांडर बन गया। माना जाता है कि एक अन्य प्रमुख आतंकवादी जाकिर मूसा के हिज्बुल से अलग होने के बाद संगठन को टूटने से बचाने के लिए नायकू ने बहुत ज्यादा कार्य किया था।

कश्मीर को लेकर पाक की नीतियों की जानकारी व खासकर नायकू के बोलने व सम्बोधन देने का अंदाज उसे मिलिटेंट्स में बहुत ज्यादा लोकप्रिय बनाने लगा। माना जाता है कि वुहान के जाने के बाद नायकू की वजह से बहुत ज्यादा कश्मीरी युवा हिज्बुल से जुड़े। पाक में बैठे संगठन के चीफ सैय्यद सलाहुद्दीन (Syed Salah-ud-din) के भी नायकू के बहुत ज्यादा अच्छे संबंध रहे थे।

कभी बच्चों को मुफ्त में गणित पढ़ाने वाला 36 वर्ष का ये शख्स इस कदर जहर से भर चुका था कि उसने नए मिलिटेंट्स की भर्ती पर सोशल मीडिया पर उनकी फोटोज़ डलवाता। नायकू ने ही अमरनाथ यात्रा करने वालों को अतिथि बताया था। इसके अतिरिक्त उसने कई नयी परंपराएं प्रारम्भ कीं। जैसे संगठन के किसी आतंकवादी की मृत्यु पर उसे बंदूकों से सलामी देना। जैसे 2016 में एक आतंकवादी शारिक अहमद भट की मृत्यु के बाद वो हाथों में क्लाशनिकोव (Kalashnikov) रायफल लेकर वहां पहुंचा व कई गोलियां दागकर उसे सलामी दी। इसके बाद से आतंकवादियों की मृत्यु पर सलामी देने का रिवाज चल निकला।

संगठन के लिए पैसे उगाही के कार्य के लिए भी नायकू की खास रणनीति थी। वो धनी किसानों के अतिरिक्त अफीम की खेती करने वालों से भी पैसे लिया करता था ताकि नए लोगों की भर्ती हो सके। यहां तक कि मादक पदार्थों की तस्करी में भी उसका हाथ था, जिससे आए पैसे संगठन को मिलते थे।

मोहम्मद बिन कासिम (Mohammad Bin Qasim) नाम के साथ कार्य करने वाले नायकू के खूंखार होने का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2018 में अपने पिता असदुल्लाह नायकू को हिरासत में लिए जाने के विरूद्ध उसने जम्मू और कश्मीर पुलिस के एक दर्जन से ज्यादा घरवालों को अगवा करवा लिया। ये सब आधे घंटे के भीतर हो गया। पुलिस के उसके पिता को छोड़ने के बाद ही पुलिसवालों के परिवार के लोग घर लौट सके। इसके बाद से नायकू का खौफ सबके मन में बैठ गया। जो वर्ष 2016 से अब तक चलता रहा।