COVID-19: पुलिस प्रशासन तबलीगी जमात रोकने को में रहा नाकाम, इसलिए बेकार हुआ मामला

COVID-19: पुलिस प्रशासन तबलीगी जमात रोकने को में रहा नाकाम, इसलिए बेकार हुआ मामला

अशोक चांद. कहींभी धार्मिक स्थल पर जुटे लोगोंको वहां से हटाना बेहद संवेदनशीलमामला है. दिल्ली के निजामुद्दीन स्थिततबलीगी मरकज पर जुटे बड़ी संख्या मेंजमातियों को हटाने के लिए जो कार्यअब किया गया, उसे बहुत ज्यादा पहले कियाजाना चाहिए था. इसके लिए भारी संख्यामें पुलिस बल की आवश्यकता पड़ती, विवादभी होने कि सम्भावना था, लेकिन इन स्थितियों सेनिबटने के लिए ही पुलिस बल को तैयारकिया जाता है. प्रशासनिक अधिकारियोंको ऐसी ही स्थितियों से निपटने के लिएप्रशिक्षण दिया जाता है. सारे प्रकरण में अबतक एक बात तो सामने आ चुकी है किजो अब किया गया, वह पहले भी कियाजा सकता था. प्रशासन के साथ पुलिसअधिकारियों को चाहिए था कि लोग वहां एकत्र ही न हों.

मामला धार्मिक व्यवस्थासे जुड़े होने के कारण भले ही संवेदनशीलथा, लेकिन यह नहीं भूलना चाहिए किइस समय लोगों को कोरोना वायरस सेबचाने के लिए तमाम व्यवस्थाएं कीजा रही है. जो भी इन व्यवस्थाओं काउल्लंघन कर रहे हैं, उन सभी को कानूनकी जद में लाकर कार्रवाई करनी चाहिए.उल्लंघन एक स्थान होता है, लेकिन इससेअव्यवस्था बहुत ज्यादा दूर तक फैलती है.जब एक स्थान सख्ती बरती जाती है, तो उसका संदेश भी दूर तक जाता है.

ऐसानहीं है कि प्रशासन कोई कार्रवाई करने मेंसक्षम नहीं है, या फिर पुलिस के पास बलकी कमी है, कमी रह गई तो मुद्दे कीसंवेदनशीलता को देखते हुए त्वरित औरप्रभावी कार्रवाई करने की. पुलिस उनकेसाथ मीटिंग करती है, लेकिन पुलिस कीकार्रवाई सिर्फ मीटिंग तक ही सीमित रहजाती है. प्रशासन की कार्रवाई वहां कानिरीक्षण करने तक सिमट जाती है.

किसीभी स्तर पर ऐसा कोई प्रभावी कदम नहींउठाया गया, जिससे वहां लोगों को एकत्रहोने से रोका जा सके. जब मुद्दा हाथसे निकलता नजर आया तो पुलिस औरप्रशासन ने कार्रवाई की. अब सारे देश में उन लोगों की तलाश की जा रही है, जोयहां एकत्र हुए थे, अगर लोगों को एकत्रहोने से रोक दिया जाता, या समय रहतेसभी लोगों को क्वारंटाइन कर दिया जाता,तो शायद स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती.पुलिस को वहां के प्रबंधन से बातकरनी चाहिए थी. पहले यह सुनिश्चित करना चाहिए था कि लोग एकत्र ही न हो.