जम्मू पहुंचे दलाई लामा, चीन को बड़ा संदेश, बोले...

जम्मू पहुंचे दलाई लामा, चीन को बड़ा संदेश, बोले...

  तिब्बती आध्यात्मिक गुरू लद्दाख का दौरा करने वाले हैं गुरुवार को दलाई लामा ( Tibetan spiritual leader the Dalai Lama ) जम्मू पहुंचे अगस्त 2019 में जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के बाद से दलाई लामा की यह पहली जम्मू कश्मीर यात्रा है दलाई लामा के लद्दाख दौरे से चीन को कई तरह की बड़ी परेशानियां हो सकती हैं

गुरुवार को जम्मू कश्मीर पहुंचने के बाद उन्होंने चीन को एक बड़ा संदेश देने की प्रयास की उन्होंने बोला कि वह तिब्बत के लिए पूर्ण स्वतंत्रता की मांग नहीं कर रहे बल्कि वह तिब्बती बौद्ध संस्कृति के संरक्षण और चीन में एक सार्थक स्वायत्तता चाहते हैं

तिब्बत के आध्यात्मिक नेता दलाई लामा ने बोला कि चीन में ऐसे लोगों की संख्या बढ़ रही है जिन्हें यह अहसास है कि वह ‘स्वतंत्रता’ की मांग नहीं कर रहे हैं बल्कि सार्थक स्वायत्तता और तिब्बती बौद्ध संस्कृति के संरक्षण की मांग कर रहे हैं

संकीर्ण विचारधारा से ऊपर उठने की है जरूरत
सभी विवादों का वार्ता के जरिए हल निकालने की पैरवी करते हुए दलाई लामा ने बोला कि सभी आदमी बराबर हैं और उन्हें ‘मेरा देश, मेरी विचारधारा’ वाली संकीर्ण सोच से ऊपर उठने की आवश्यकता है क्योंकि यही लोगों में लड़ाई का प्रमुख कारण है

दलाई लामा का यहां पहुंचने पर उनके अनुयायियों ने गर्मजोशी से स्वागत किया उनके अनुयायी भारी बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में इकट्ठा हुए बीते दो वर्ष में हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला से बाहर, उनकी यह पहली यात्रा है वह शुक्रवार को लद्दाख जा सकते हैं

कुछ लोग मुझे अलगाववादी समझते हैं
87 वर्षीय आध्यात्मिक नेता ने पत्रकारों से कहा, “ चीन के कुछ कट्टरपंथी मुझे अलगाववादी और सुधार का विरोधी समझते हैं और हमेशा मेरी आलोचना करते हैं लेकिन अब अधिक संख्या में चीन के लोगों को यह अहसास हो रहा है कि दलाई लामा स्वतंत्रता नहीं मांग रहे हैं और उनकी ख़्वाहिश केवल इतनी है कि चीन (तिब्बत को) सार्थक स्वायत्तता दे और तिब्बती बौद्ध संस्कृति का संरक्षण सुनिश्चित करे

उनकी यात्रा को लेकर चीन की विरोध के बारे में पूछे जाने पर दलाई लामा ने कहा, “ यह सामान्य है चीन के लोग आपत्ति नहीं कर रहे हैं… अधिक संख्या में लोग तिब्बती बौद्ध धर्म में रुचि दिखा रहे हैं उनके कुछ विद्वानों को अहसास हो रहा है कि तिब्बती बौद्ध धर्म बहुत वैज्ञानिक है चीज़ें बदल रही हैं” दलाई लामा का वास्तविक नाम तेंज़िन ग्यात्सो है और उन्हें 1989 में शांति का नोबेल पुरस्कार मिला था

इस महीने की आरंभ में, दलाई लामा के 87वें जन्मदिन पर उन्हें शुभकामनाएं देने के लिए चीन ने पीएम मोदी की आलोचना करते हुए बोला था कि हिंदुस्तान को चीन के आंतरिक मामलों में दखल देने के लिए तिब्बत संबंधी मुद्दों का उपयोग बंद करना चाहिए वहीं हिंदुस्तान ने चीन की आलोचना को खारिज करते हुए बोला था कि दलाई लामा राष्ट्र के सम्मानित मेहमान हैं

एक महीने से अधिक समय लद्दाख में बिता सकते हैं
आध्यात्मिक नेता लद्दाख जा सकते हैं जहां वह एक महीने से अधिक समय बिता सकते हैं इससे चीन और नाराज होगा क्योंकि पूर्वी लद्दाख में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच गतिरोध चल रहा है

दलाई लामा ने कहा, “ मैं कल (शुक्रवार को) लद्दाख जा रहा हूं जहां कुछ कार्यक्रमों में भाग लूंगा” उन्होंने श्रीलंका में मौजूदा संकट पर भी नाखुशी ज़ाहिर की उन्होंने कहा, “ लोगों को मेरा मुख्य संदेश यही है कि हम सब भाई और बहन हैं और लड़ने का कोई मतलब नहीं है… लड़ाई संकीर्ण मानसिकता की वजह से तब होती है जब वे ‘मेरा देश, मेरी विचारधारा’ सोचना प्रारम्भ करते हैं

दलाई लामा ने बोला कि मानवता का तकाज़ा है कि “हम सब साथ मिलकर रहें, चाहे हमें यह पसंद हो या नहीं परिवार की तरह इसमें कुछ कठिनाई हो सकती है जिन्हें वार्ता के जरिए सुझाया जा सकता है