‘‘इस्लामी कट्टरपंथ’’ के बारे में मिली एक गुप्त सूचना के बाद छापेमारी

‘‘इस्लामी कट्टरपंथ’’ के बारे में मिली एक गुप्त सूचना के बाद छापेमारी

ढिल्लों के मुताबिक फुलवारीशरीफ में झारखंड के एक सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी के स्वामित्व वाले परिसर के अंदर ‘‘इस्लामी कट्टरपंथ’’ के बारे में मिली एक गुप्त सूचना के बाद छापेमारी की गई थी, जहां कई लोग जिनमें से कुछ प्रदेश के बाहर के भी थे, ने सशस्त्र प्रशिक्षण नहीं बल्कि सामान्य शारीरिक प्रशिक्षण प्राप्त किया था.

पटना|  बिहार पुलिस ने चरमपंथी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इण्डिया (पीएफआईं) के साथ संबंधों के आरोप में दो लोगों सहित तीन को अरैस्ट किया है.

इसकी जानकारी देते हुए पटना के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) मानवजीत सिंह ढिल्लों के पीएफआई की राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से तुलना की, जिसपर प्रदेश में सत्ताधारी बीजेपी ने कड़ी विरोध जताते हुए उनसे अपना बयान वापस लेने और माफी मांगने की मांग की.

पत्रकारों से बृहस्पतिवार को वार्ता के दौरान मानवजीत सिंह ढिल्लों ने पटना के फुलवारीशरीफ क्षेत्र में अरैस्ट संदिग्ध आतंकवादियों द्वारा युवाओं को शारीरिक प्रशिक्षण दिए जाने के बारे में बोला कि ‘‘जैसे आरएसएस अपनी शाखा आयोजित करता है और लाठी का प्रशिक्षण देता है, उसी प्रकार से ये लोग युवाओं को बुलाकर उन्हें शारीरिक प्रशिक्षण देते थे और उनका कथित ब्रेनवाश कर उनके माध्यम अपना एजेंडा लोगों तक पहुंचाने का काम करते थे.’’

भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपमुख्यमत्री सुशील कुमार मोदी ने पटना एसएसपी की उक्त टिप्पणी पर कड़ी विरोध जताते हुए बोला कि ‘‘धर्मनिरपेक्ष हिंदुस्तान को इस्लामी राष्ट्र बनाने की षड्यंत्र में लिप्त पीएफआई के संदिग्ध आतंकवादियों की गिरफ्तारी के बाद इस प्रतिबंधित संगठन से आरएसएस जैसे देशभक्त संगठन की तुलना करना नितांत निंदनीय और अज्ञानतापूर्ण है.’’

उन्होंने एक बयान जारी कर बोला कि पटना के एसएसपी को ऐसा बयान तुरंत वापस लेना चाहिए और इसके लिए माफी मांगनी चाहिए.
राज्यसभा सदस्य सुशील मोदी ने बोला कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ऐसा संगठन है, जो देशप्रेम, उच्च आदर्श और सर्वधर्म समभाव का प्रवर्तन करने में लगभग एक सदी से निष्ठापूर्वक लगा है.

उन्होंने बोला कि जिस संगठन ने अटल बिहारी वाजपेयी, नरेंद्र मोदी, अमित शाह, राजनाथ सिंह जैसे अनेक यशस्वी नेतृत्व राष्ट्र को दिये, उसकी तुलना आतंकवाद और कट्टरता को बढ़ावा देने वालों से एकदम नहीं की जा सकती.

पूर्व केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बोला कि पटना के एसएसपी का यह बोलना कि आरएसएस की गतिविधि और पीएफआई का प्रशिक्षण एक तरह का है, बहुत ही गैरजिम्मेदाराना, दुर्भाग्यपूर्ण और भर्त्सना योग्य है.

उन्होंने बोला कि ‘‘मैं इसकी पूरी भर्त्सना करता हूं. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एक प्रामाणिक राष्ट्रवादी संगठन है. राष्ट्र के विकास, संस्कृति, संस्कार को लेकर और आतंकवाद के विरूद्ध उसके स्वयंसेवक हमेशा खडे रहते हैं. हमें गर्व है, उनके काम पर. उसकी तुलना पीएफआई जैसे देश विरोधी संगठन से करना, इससे बड़ी कोई गैर जिम्मेदाराना बात हो नहीं सकती.’’
पटना साहिब के सांसद प्रसाद ने बोला कि उन्हें आश्वासन मिला है कि बिहार गवर्नमेंट का पुलिस महकमा इसपर उचित कार्रवाई करेगा.

भाजपा विधायक हरिभूषण ठाकुर बचौल ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘यह दर्शाता है कि एसएसपी ने अपना मानसिक संतुलन खो दिया है. आप आरएसएस जैसे राष्ट्रवादी संगठन की तुलना पीएफआई से कैसे कर सकते हैं.’’

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि 2013 के सिलसिलेवार धमाकों से लेकर पीएम मोदी जब भी बिहार आए हैं, तब उन्हें इस्लामिक आतंकियों ने निशाना बनाया है.
गुजरात के तत्कालीन सीएम और बीजेपी के पीएम पद के उम्मीदवार मोदी ने अक्टूबर 2013 में पटना के गांधी मैदान में बिहार में अपनी पहली रैली को संबोधित किया था, तब कार्यक्रम स्थल पर कई बम धमाके हुए थे.

भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता और ओबीसी मोर्चा के राष्ट्रीय महासचिव निखिल आनंद ने आरोप लगाया कि पटना एसएसपी की जुबान नहीं फिसली बल्कि पूरे अधिकार, आत्मविश्वास और शांत ढंग से दिया गया बयान है, जो दुर्भाग्य पूर्ण है.

आनंद ने आरोप लगाया कि एसएसपी नेजानबूझकर अपनी सियासी आत्मीयता दिखाने और आकाओं को खुश करने के लिए यह बयान दिया.
उन्होंने कहा, ‘‘बिहार के सीएम और पुलिस महानिदेशक को उनके विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई करनी चाहिए.’’

पत्रकारों द्वारा संपर्क किए जाने पर अपर पुलिस महानिदेशक (मुख्यालय) जे एस गंगवार ने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि एसएसपी ने संदर्भ से बाहर जाकर बात की. एक संगठन की दूसरे से तुलना करना गलत है. हम उनसे इस मामले पर बात करेंगे और उन्हें मुद्दे की जांच पर ध्यान केंद्रित करने की राय देंगे.’’

पटना पुलिस ने बुधवार को फुलवारीशरीफ थाना भीतर नया टोला मुहल्ला में छापेमारी कर पीएफआई से कथित तौर पर जुडे़ झारखंड के सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी मोहम्मद जलालुद्दीन जिनके मकान में युवाओं को शारीरिक प्रशिक्षण के नाम पर उनका कथित ब्रेनवाश किया जाता था के साथ प्रतिबंधित संगठन सिम्मी के पूर्व कार्यकर्ता रहे अतहर परवेज को अरैस्ट किया था.
इसके बाद एक क्षेत्रीय निवासी और प्रशिक्षण आयोजित करने में सहायता करने वाले अरमान मलिक को अरैस्ट किया गया.

ढिल्लों ने बताया कि फुलवारीशरीफ मुद्दे में कुल 26 लोगों के विरूद्ध नामजद प्राथमिकी दर्ज की गयी है, जिसमें अधिकतर लोग बिहार के हैं और कुछ लोग कर्नाटक सहित बिहार के बाहर के निवासी हैं.
उन्होंने बताया कि पीएफआई से जुडे ये लोग मस्जिद और मदरसों में युवाओं को जुटाने और कट्टरता को लेकर लगातार एक्टिव थे.

ढिल्लों के मुताबिक फुलवारीशरीफ में झारखंड के एक सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी के स्वामित्व वाले परिसर के अंदर ‘‘इस्लामी कट्टरपंथ’’ के बारे में मिली एक गुप्त सूचना के बाद छापेमारी की गई थी, जहां कई लोग जिनमें से कुछ प्रदेश के बाहर के भी थे, ने सशस्त्र प्रशिक्षण नहीं बल्कि सामान्य शारीरिक प्रशिक्षण प्राप्त किया था.

एसएसपी ने नेटवर्क के किसी भी तरह से पाक से संबंध होने से इंकार किया, पर बोला कि ‘‘आतंकवाद के वित्तपोषण’’ के पहलुओं की जांच की जा रही है.

पुलिस के अनुसार उसने 12 जुलाई को पीएम मोदी के दौरे के मद्देनजर अपनी नज़र तेज कर दी थी, लेकिन ऐसे संकेत नहीं मिले हैं कि समूह का लक्ष्य वीआईपी कार्यक्रम को बाधित करना था.