लगातार दर्द वाली यह बीमारी जिसकी ज्यादातर महिलाएं होती हैं शिकार, जानिए

लगातार दर्द वाली यह बीमारी जिसकी ज्यादातर महिलाएं होती हैं शिकार, जानिए

कई बार शरीर की मांसपेशियों व हड्डियों में लगातार दर्द महसूस होता है, सोने के बाद भी थका हुआ महसूस होता है लेकिन इसे नजरअंदाज कर दिया जाता है व इस दर्द की आदत भी पड़ जाती है. खास बात तो यह है कि यह कोई रोजमर्रा की भागदौड़ के कारण नहीं बल्कि एक विकार है, जिसे फाइब्रोमायल्जिया कहते हैं. यह विकार पुरुषों की तुलना में स्त्रियों में ज्यादा नजर आता है. आर्थराइटिस इंडिया के अनुसार पूरी आबादी में से 0.5 से लेकर 2 फीसदी लोग ही इस बीमारी से जूझते हैं. महिलाएं, पुरुषों के मुकाबले तीन से सात गुना ज्यादा इस बीमारी की शिकार होती हैं.
 
एम्स के डाक्टर केएम नाधीर का बोलना है कि इस विकार में मांसपेशियों व हड्डियों में दर्द, थकान के अतिरिक्त मस्तिष्क व नींद से जु़ड़ी कई मुश्किलें आनी प्रारम्भ हो जाती है. शोधकर्ताओं का मानना है कि फाइब्रोमायल्जिया में मस्तिष्क के दर्द के संकेतों के प्रभावित होने से इस रोग के दर्द में सनसनी महसूस होती है. शोधकर्ता व चिकित्सक अभी तक यह पता नहीं लगा पाए हैं कि इस विकार का असल कारण क्या है. लेकिन दशकों के शोध के बाद कुछ कारकों को इसका जिम्मेदार ठहराया जाता है. इसमें किसी तरह का पहले से संक्रमण इस विकार का कारण बन सकता है व लक्षण बिगड़ सकते हैं. आनुवंशिक भी होने कि सम्भावना है, यानी परिवार में किसी आदमी को है तो इससे अन्य सदस्यों में होने का जोखिम बढ़ जाता है. किसी भावनात्मक या शारीरिक आघात से जूझ चुके लोगों को भी होने कि सम्भावना है. इस बीमारी के लक्षण 30 से 50 साल की आयु में दिखते हैं लेकिन बच्चों व बुजुर्गों सहित किसी भी आयु के लोगों में हो सकती है.
 
 एम्स के डाक्टर उमर अफरोज का बोलना है कि अस्वस्थ आहार, बदलती जीवनशैली, नींद की कमी, आर्थिक परेशानी, प्रियजन को खोना, वातावरण का प्रभाव, बेकार संबंध आदि तनाव का कारण बन सकते हैं. लंबे समय तक किसी बात का तनाव भी हार्मोनल गड़बड़ी कर सकता है व फाइब्रोमायल्जिया की वजह बन सकता है. फाइब्रोमायल्जिया से ग्रस्त दस में से नौ लोगों में अवसाद के लक्षण होते हैं व दस में से कम से कम छह लोगों को अपने जीवनकाल के दौरान एक गंभीर अवसाद का अनुभव होगा. रूमेटिक रोग से पीड़ित आदमी में फाइब्रोमायल्जिया विकसित होने की अधिक संभावना हो सकती है.
 
हालांकि, इस बीमारी का कोई उपचार नहीं है, लेकिन ऐसी कई दवाएं हैं जो इस बीमारी के लक्षणों को नियंत्रित करने में मदद कर सकती हैं. खासतौर पर आराम, व्यायाम व तनाव में कमी के तरीकों को अपनाकर फाइब्रोमायल्जिया के लक्षणों को नियंत्रित रखने रख सकते हैं. इससे बचाव के लिए आदमी को पर्याप्त नींद, भावनात्मक व मानसिक तनाव में कमी, नियमित रूप से व्यायाम, संतुलित आहार की आवश्यकता है. भरपूर आराम भी इसके लिए महत्वपूर्ण है. अपने कार्य को सारे दिन में बांट लें. अगर एक दिन में ही बहुत अधिक कार्य करने की प्रयास करते हैं, तो थका हुआ महसूस कर सकते हैं.