पुरुष को अपनी पत्नी से भी मिलते है दुर्भाग्य के 3 संकेत

पुरुष को अपनी पत्नी से भी मिलते है दुर्भाग्य के 3 संकेत

मानव के जीवन मे हर प्रकार की समस्यायें आती और जाती रहती हैं। हर प्रकार की परिस्थितियों में मानव यही सोंचता है कि यह समस्या भी उसके पास ज्यादा समय तक न रहे। लेकिन क्या आप जानते हैं मानव के जीवन मे तीन ऐसी परिस्थितियां जो उसके दुर्भाग्य को बढ़ाती हैं।

कौनसे है वो 3 काम:

# वृद्धावस्था में अगर किसी की पत्नी मर जाये तो उसके लिए बहुत दुर्भाग्य की निशानी होती है। पत्नी एक मित्र के रूप में व्यक्ति के सदैव पास रहती है इसलिए उसे कई परेशानियों से गुजरना पड़ता है अगर पुरुष की पत्नी मर जाये।

# अगर आपका धन किसी शत्रु के हाथों में चला गया तो आपको परेशानी होगी ही। एक तो आपका धन किसी अयोग्य के हाथ में चला गया दूसरा वो व्यक्ति आपके विरुद्ध ही आपके धन का उपयोग करेगा। 

# अगर कोई पुरुष किसी का गुलाम या दास है तो उसको अपनी इच्छा से कुछ भी करने की अनुमति नहीं होती। इससे बड़ा दुर्भाग्य मनुष्य का नहीं हो सकता जब उसका भोजन भी किसी के अधीन हो।


भगवान शिव और हनुमानजी की पूजा से शनि दोष से मिलता है छुटकारा

भगवान शिव और हनुमानजी की पूजा से शनि दोष से मिलता है छुटकारा

इस बार साल का आखिरी ग्रहण 04 दिसंबर 2021 को लगने जा रहा है। इस दिन शनि अमावस्या भी है। ज्योतिष की दृष्टि से सूर्यग्रहण और शनि अमावस्या का एक ही दिन पड़ना अद्भुत संयोग है, क्योंकि धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, शनि देव को सूर्य का पुत्र कहा जाता है। यदि सूर्य और शनि दोनों ग्रह एक साथ प्रसन्न हों तो बहुत ही उत्तम रहेगा। इसलिए शनि और सूर्य दोनों के लिए दान करना आवश्यक है। शनि के प्रभाव से पीड़ित लोगों के लिए यह अमावस्या बहुत महत्वपूर्ण है। पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर-जोधपुर के निदेशक ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास ने बताया कि मान्यता है कि इस दिन दान करने से पितरों को संतुष्टि मिलती है और हमारी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इस बार सूर्य ग्रहण और शनि अमावस्या एक साथ है। इसलिए यदि ग्रहण और शनि अमावस्या के दौरान कुछ उपाय किए जाएं तो दोनों ही ग्रहों को अनुकूल किया जा सकता है। मान्यता है कि इन उपायों को करने से जीवन में सभी प्रकार की परेशानियों से छुटकारा मिलता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास ने बताया कि 4 दिसंबर को अगहन मास की अमावस्या है। इस दिन मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष खत्म होगा और 5 तारीख से शुक्ल पक्ष शुरू हो जाएगा। 3 तारीख की शाम करीब 5 बजे से अमावस्या तिथि शुरू हो जाएगी, लेकिन ये पर्व 4 को मनाया जाएगा। ज्योतिषीयों के मुताबिक सूर्योदय जिस तिथि में होता है, उस दिन स्नान-दान और पितृ कर्म किए जाने चाहिए। 4 तारीख को सूर्योदय के वक्त अमावस्या तिथि रहेगी और दोपहर 1.15 पर मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा शुरू होगी। इसीलिए शनिवार को ही अमावस्या पर्व मनाया जाएगा और इसे शनिश्चरी अमावस्या कहा जाता है। 

ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास ने बताया कि 4 दिसंबर को अगहन महीने की अमावस्या शनि पूजा के लिए विशेष रहेगी। शनि को न्याय का देवता माना जाता है। साढ़ेसाती में अच्छे-बुरे कर्मों का फल मिलता है। इसलिए शनि को प्रसन्न करना जरूरी है। इसके लिए शनि अमावस्या पर महत्वपूर्ण विशेष पूजा जरूरी होती है। शनि अमावस्या यानि शनिश्चरी अमावस्या भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए खास दिन होता है। शनि भगवान को खुश करने के लिए शनि अमावस्या का दिन अच्छा होता है। इस दिन पूजा-अर्चना करने से शनि की वक्री दृष्टि का अशुभ असर भी कम हो जाता है और परेशानियों से छुटकारा मिलने लगता है।

ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास ने बताया कि खास बात है कि ये सूर्य ग्रहण भारत में नहीं दिखेगा। इसलिए इसका सूतक और धार्मिक महत्व भी नहीं रहेगा। जिससे शनैश्चरी अमावस्या पर स्नान-दान और पूजा-पाठ पूरे दिन की जा सकेगी। ये ग्रहण अन्टार्कटिका और दक्षिण महासागर से दिखाई देगा। आंशिक सूर्य ग्रहण अफ्रीकी महाद्वीप की कुछ जगहों से दिखेगा। खासतौर से दक्षिण अफ्रीका, नामिबिया, दक्षिण अमेरिका के कुछ दक्षिणी हिस्सों, हिन्द महासागर में कुछ जगह, दक्षिण अटलान्टिक महासागर और ऑस्ट्रेलियाई महाद्वीप के कुछ जगहों पर दिखाई देगा। 

दक्षिण अफ्रीका में दिखेगा सूर्य ग्रहण

विश्वविख्यात भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि भारत को छोड़कर दक्षिण अफ्रीका में केपटाउन और जॉर्ज, नामिबिया में स्वाकोपमुण्ड और ऑस्ट्रेलिया में मेलबोर्न और होबार्ट में ये आंशिक सूर्य ग्रहण दिखाई देगा। बताया जा रहा है कि ये पूर्ण सूर्य ग्रहण भारतीय समय के मुताबिक सुबह 11 पर शुरू होगा। इस ग्रहण के मध्य का समय दोपहर 1.04 रहेगा। इसके बाद दोपहर 03.07 तक ये सूर्य ग्रहण खत्म हो जाएगा। इस ग्रहण की पूर्णता का समय 1 मिनट 57 सेकंड रहेगा। यानी इस अवधि में सूर्य पूरी तरह चंद्रमा की छाया में छिप जाएगा।

अमावस्या पर दान-पुण्य का विशेष महत्व

कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि हर महीने में कृष्ण पक्ष का आखिरी दिन यानी अमावस्या तिथि काफी अहम होती है। गरुड़, पद्म और ब्रह्मवैवर्त पुराण के मुताबिक हर महीने आने वाली अमावस्या तिथि पर पितरों के लिए श्राद्ध किया जाना चाहिए। इस दिन पितृदोष से मुक्ति पाने के लिए पितृ तर्पण, स्नान-दान इत्यादि करना बेहद जरूरी होता है। मान्यता है कि ऐसा करने से पुण्य फल मिलता है।

भगवान शिव और हनुमानजी की पूजा

विश्वविख्यात भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि शनि संबंधित सभी दोषों और कष्ट दूर करने के लिए शनि देवता के साथ भगवान शिव की भी आराधना करें। इसके लिए शिव सहस्रनाम और ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जाप करें। शनि दोष से छुटकारा पाने के लिए शिवजी के साथ हनुमानजी की पूजा भी फायदेमंद होती है। इसके लिए हनुमान मंदिर में गुलाब के फूल की माला चढ़ाएं और सरसों के तेल का दीपक लगाना चाहिए।

इनका करें दान 

भविष्यवक्ता अनीष व्यास ने बताया कि शनि अमावस्या और ग्रहण के दौरान निम्नलिखित चीजों का दान करने से दोनों ग्रह प्रसन्न रहेंगे। इन दान में धन वृद्धि के लिए अनाज, शत्रुओं के अंत के लिए काले तिल, विपत्ति से सुरक्षा के लिए छाता, पूर्वजों से मुक्ति के लिए उड़द की दाल, शनि के प्रभाव से मुक्ति के लिए सरसों का तेल दान करना चाहिए।

शमी-पेड़ की करें पूजा

भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि शनिअमावस्या और ग्रहण के दिन शनि-दोष से छुटकारा के लिए शमी-पेड़ की पूजा करें। ग्रहण समपट होने के बाद शाम के वक्त इस पेड़ के नीचे सरसों का दीया जलाएं। शनि अमावस्या के दिन इस उपाय से घर में सुख-शांति बनी रहती है। साथ ही शनि के बुरे प्रभावों से भी छुटकारा मिलता है। 

शनिदेव को चढ़ाएं सरसों का तेल 

कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि शनिश्चरी अमावस्या के शुभ योग में सुबह जल्दी स्नान आदि करने के बाद शनि मंदिर जाकर साफ-सफाई करें और शनिदेव को सरसों का तेल चढ़ाएं। नीले फूल अर्पित करें। इससे शनिदेव प्रसन्न होते हैं।

शिव सहस्त्रनाम का करें पाठ

विश्वविख्यात भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि शिव सहस्त्रनाम या शिव के पंचाक्षरी मंत्र का पाठ करने से शनि के प्रकोप का भय जाता रहता है और सभी बाधाएं दूर होती हैं।

शनि मंत्र का करें जाप

भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि शनिदेव के लिए तेल का दान करें। ऊँ शं शनैश्चराय नम: मंत्र का जाप करें। तिल के तेल या सरसों के तेल का दीपक जलाएं और मंत्र जाप कम से कम 108 बार करें। शनिदेव के लिए काले वस्त्र और काले कंबल का भी दान करना चाहिए।शनिदेव के प्रकोप को शांत करने के लिए यह मंत्र काफी प्रभावी है। शनिदेव को समर्पित इस मंत्र को श्रद्धा के साथ जपने से निश्चित रूप से आपको लाभ होगा।

सूर्य पुत्रो दीर्घ देहो विशालाक्ष: शिव प्रिय:।

मंदाचाराह प्रसन्नात्मा पीड़ां दहतु में शनि:।।

पितरों के लिए करें धूप-ध्यान

कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि अमावस्या की दोपहर करीब 12 बजे पितरों के लिए धूप-ध्यान करें। इसके लिए गोबर का कंडा जलाएं और जब धुआं निकलना बंद हो जाए, तब अंगारों पर गुड़-घी डालकर धूप दें। धूप देते समय पितरों का ध्यान करें। जरूरतमंद लोगों को खाना दान करें।

सूर्य ग्रहण का समय 

सूर्य ग्रहण का आरंभ: प्रातः11:00 बजे से 

सूर्य ग्रहण समाप्त: दोपहर 03:07 मिनट पर

शनि अमावस्या तिथि और समय 

अमावस्या आरंभ: 3 दिसंबर दोपहर 04:55  से 

अमावस्या समाप्त: 4 दिसंबर दोपहर 01: 12 मिनट तक