जानिए क्या होता है बाइपोलर डिसऑर्डर

जानिए क्या होता है बाइपोलर डिसऑर्डर

देश के जाने-माने रैपर (Rapper) व सिंगर हनी सिंह (Singer Honey Singh) बाइपोलर डिसऑर्डर (Bipolar Disorder) से जूझ चुके हैं। 18 महीने तक उन्होंने खुद को दुनिया से काट दिया था। हमेशा सुर्खियों में रहने वाले हनी सिंह के लिए एक समय ऐसा आया कि खुद को एक कमरे में बंद कर लिया था। हिंदुस्तान के राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण (National Mental Health Survey) के अनुसार प्रत्येक छठे भारतीय को मानसिक स्वास्थ्य को लेकर सहायता की आवश्यकता होती है। मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ा एक विकार बाइपोलर डिसऑर्डर एक तरह का गहरा अवसाद कहलाता है।

myUpchar के अनुसार यह अत्यधिक मूड स्विंग का कारण बनता है। इसमें भावों की उत्तेजना या तो उच्च स्तर पर होती है या फिर निम्न स्तर पर पहुंच जाती है। मूड स्विंग में आदमी खुद को निराश या उदास महसूस करता है व अधिकांश गतिविधियों से अपनी रुचि खो देता है। वहीं जब मूड दूसरी दिशा में बदलता है तो खुद को ऊर्जा से भरा महसूस करता है। मूड स्विंग आम लोगों के अनुभव की तुलना में बाइपोलर डिसऑर्डर से जूझ रहे लोगों में व ज्यादा गंभीर होता है जो कि निर्बल व असमर्थ कर देने वाला होता है। इस तरह के लक्षण दिखने लगते हैं
बाइपोलर डिसऑर्डर से जूझ रहे आदमी में कई लक्षण दिखाई देते हैं जैसे नींद में कमी, ऊर्जा में कमी, अजीबो-गरीब महसूस होना, बेवजह ज्यादा बातें करना या बोलना, कुछ न कुछ सोचते रहना, खूब व्याकुल होना, किसी भी बात का फैसला लेने में कठिनाई आदि। myUpchar से जुड़े डाक्टर प्रदीप जैन के अनुसार, बच्चों व किशोरों में यह समस्या अधिक रहती है।

जेनेटिक्स भी हो सकती है वजह
चिकित्सक इस विकार के पीछे के सटीक कारण का पता नहीं लगा पाए हैं, लेकिन उनका बोलना है कि यह मस्तिष्क में कुछ शारीरिक बदलावों के कारण होने कि सम्भावना है। इस स्थिति के लिए जेनेटिक्स भी जिम्मेदार हो सकते हैं, यानी आदमी के प्रभावित होने का खतरा बढ़ जाता है अगर माता-पिता या भाई-बहन को यह मानसिक विकार है। तनाव व शराब पीना जोखिम कारक को बढ़ाता है। इस समस्या को अनदेखा करते हैं, तो यह सुसाइड के प्रयास, संबंध के टूटने, कार्य में बेकार प्रदर्शन आदि जैसी जटिलताओं को जन्म दे सकती है।

नजरअंदाज न करें, दिखाएं चिकित्सक को
कठिनाई की बात यह है कि मूड के साथ ऐसे बदलावों के बावजूद लोग नहीं समझ पाते हैं कि वे बाइपोलर डिसऑर्डर से जूझ रहे हैं। वे खुद के व्यवहार को गुनाह देते हैं व इलाज की आवश्यकता नहीं समझते हैं, लेकिन अगर गहन अवसाद के लक्षण दिख रहे हों तो चिकित्सक या मानसिक स्वास्थ्य जानकार से जरूर जाँच करवा लेना चाहिए। यह बात ध्यान देने योग्य है कि बाइपोलर डिसऑर्डर में कभी भी अपने आप सुधार नहीं होता है। इलाज के जरिए ही इसके लक्षण नियंत्रित हो सकते हैं।

ऐसे संभव है इलाज
मनोचिकित्सक प्रारंभिक इलाज के तहत मूड को संतुलित करने के लिए दवाइयां देगा। लक्षण काबू में आने पर इसका लंबे समय का इलाज तलाशने में सहायता मिलेगी। इस बात का ख्याल रखना महत्वपूर्ण है कि इस डिसऑर्डर से पीड़ित आदमी को जीवनभर इलाज की आवश्यकता होती है, भले ही वह अच्छा महसूस कर रहा हो। चिकित्सक कॉग्निटिव बिहैवियरल थेरेपी, साइको एजुकेशन, इंट्रापर्सनल व सोशल रिदम थेरेपी से इलाज कर सकता है।

योग से मिलेगा फायदा
बायपोलर डिसऑर्डर के इलाज के साथ अगर योग भी जोड़ दिया जाए तो जल्द लाभ होने कि सम्भावना है। इस विकार से पीड़ित लोगों को योग एक सामान्य ज़िंदगी जीने में सहायता करेगा। यह बात जर्नल ऑफ साइकियाट्रिक प्रैक्टिस में प्रकाशित एक शोध में सामने आई है। योग में शामिल स्ट्रेचिंग, ब्रीदिंग टेक्निक, मेडिटेशन व बैलेंसिग वास्तव में शांत रख सकते हैं।

ये योगासन देंगे राहत
गरुडासन, उपविष्ठ कोणासन, दंडासन, पश्चिमोत्तानासन, मत्स्यासन, पर्वतासन, ब्रह्म मुद्रा आसन।