भारत की मदद के लिए दुनिया ने उठाए हाथ, यूएस ने ऑक्सीजन सिलिंडर

भारत की मदद के लिए दुनिया ने उठाए हाथ, यूएस ने ऑक्सीजन सिलिंडर

कोरोना वायरस महामारी का सामना कर रहे भारत की मदद के लिए विभिन्न क्षेत्रों से हाथ उठ रहे हैं। अमेरिका ने राहत सामग्री की एक और खेप भारत भेजी है। ड्यूल्स अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से विमान राहत सामग्री लेकर रवाना हो चुका है और इस समय इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के रास्ते में है। इस अमेरिकी विमान में ऑक्सीजन सिलिंडर, टेस्ट किट और अन्य सामग्री हैं।

अमेरिका से चिकित्सा सामग्री की तीसरी खेप भारत के लिए रवाना 

इस विमान के जरिये अमेरिका मदद की तीसरी खेप भेज रहा है। एक अन्य विमान मदद की दूसरी खेप लेकर कुछ देर पहले कैलिफोर्निया से रवाना हुआ था। अधिकारियों का कहना है कि अगले कुछ दिनों तक भारत को अमेरिका से राहत सामग्री भेजने का सिलसिला जारी रहेगा।

व्हाइट हाउस ने कहा- भारत की जरूरतों को लेकर अमेरिका नई दिल्ली के संपर्क में

व्हाइट हाउस ने कहा है कि भारत की जरूरतों को लेकर अमेरिका लगातार उसके संपर्क में बना हुआ है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव जेन साकी ने कहा कि भारत की जरूरतों के लिए हम लगातार उनके संपर्क में बने रहेंगे।

सरकारी प्रयासों की समीक्षा के सिलसिले में ब्लिंकन ने की जयशंकर से फोन पर बातचीत

उन्होंने कहा कि सरकार के प्रयासों की समीक्षा के सिलसिले में विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने अपने भारतीय समकक्ष एस जयशंकर से फोन पर बातचीत की है।


यूनिसेफ ने 3,000 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर, टेस्ट किट और अन्य सामग्री भारत भेजी

इस बीच, यूनिसेफ ने 3,000 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर, टेस्ट किट और अन्य सामग्री भारत भेजी है। इसने यह भी कहा है कि टीकाकरण के काम में वह भारत की मदद करेगा।

कोरोना महामारी से उत्पन्न संकट के दौर में संयुक्त राष्ट्र भारत की जनता के साथ खड़ा

संयुक्त राष्ट्र महासचिव के उप प्रवक्ता फरहान हक ने संवाददाता सम्मेलन के दौरान एंतोनियो गुतेरस के एक ट्वीट का हवाला दिया। इस ट्वीट में गुतेरस ने कहा था कि कोरोना महामारी से उत्पन्न संकट के इस दौर में संयुक्त राष्ट्र भारत की जनता के साथ खड़ा है। यूनिसेफ पूर्वोत्तर और महाराष्ट्र में 25 ऑक्सीजन प्लांट खरीदने और उन्हें स्थापित करने में भी मदद कर रहा है।


बोइंग ने किया एक करोड़ डालर की मदद देने का एलान

जहाज निर्माता कंपनी बोइंग ने कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में भारत को एक करोड़ डालर (लगभग 74 करोड़ रुपये) की मदद करने का एलान किया है। कंपनी ने एक बयान में कहा कि यह राशि चिकित्सा आपूर्ति, आपातकालीन स्वास्थ्य सुविधा और लोगों की मदद कर रहे संगठनों को दी जाएगी। कंपनी ने कहा कि राहत कार्य के लिए वह स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय संगठनों से हाथ मिलाएगी। इसने अपने कर्मचारियों से कहा है कि वे व्यक्तिगत रूप से भी भारत में राहत कार्य कर रहे परोपकारी संगठनों को दान दे सकते हैं।

मास्टरकार्ड ने की 89 लाख डालर देने की घोषणा

दुनिया की प्रमुख भुगतान कंपनी मास्टरकार्ड ने न्यूयार्क स्थित गैरलाभकारी संस्था अमेरिकन इंडिया फाउंडेशन को 89 लाख डालर (लगभग 66 करोड़ रुपये) देने का एलान किया है। फाउंडेशन इस राशि से भारत में 2,000 पोर्टेबल बेड तैयार करेगा। इस कदम से देश को तत्काल स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों से निपटने में मदद मिलेगी। एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि हर बेड वेंटिलेटर से लैस होगा। इसमें चिकित्सा उपकरण और अन्य आपूर्ति भी सुनिश्चित की जाएगी।


डॉक्‍टर एंथनी फाउची ने कहा कि कोविड-19 महात्रासदी से जूझ रहा भारत, व्‍यापक टीकाकरण एकमात्र हल

डॉक्‍टर एंथनी फाउची ने कहा कि कोविड-19 महात्रासदी से जूझ रहा भारत, व्‍यापक टीकाकरण एकमात्र हल

अमेरिका के सबसे बड़े संक्रामक रोग जानकार डॉक्‍टर एंथनी फाउची ने बोला है कि हिंदुस्तान कोविड-19 वायरस महामारी के कहर से जूझ रहा है और दुनिया के अन्‍य राष्ट्रों को सहायता के लिए आगे आना चाहिए. फाउची ने बोला कि हिंदुस्तान अस्‍पताल के बिस्‍तरों, ऑक्‍सीजन की कमी, पीपीई किट और अन्‍य चिकित्‍सा उपकरणों की कमी से जूझ रहा है और अमेरिका जैसे राष्ट्रों की इसमें सहायता करनी चाहिए. उन्‍होंने बोला कि इस महासंकट से उबरने के लिए एकमात्र दीर्घकालिक तरीका बड़े पैमाने पर लोगों का टीकाकरण है.

डॉक्‍टर फाउची का यह बयान ऐसे समय पर आया है जब शनिवार को आधिकारिक आंकड़े के अनुसार इस महामारी से 4 हजार लोगों की मृत्यु हो गई. उन्होंने इस खतरनाक महामारी से निपटने के लिए घरेलू एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कोविड-रोधी टीके के उत्पादन को बढ़ाने पर जोर दिया. अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के प्रमुख चिकित्सा सलाहकार फाउची ने एबीसी न्यूज को दिए इंटरव्यू में कहा, 'इस महामारी का पूरी तरह से खात्मा करने के लिए लोगों का टीकाकरण किया जाना चाहिए.'


'टीका निर्माण के लिए हिंदुस्तान को सहायता देनी चाहिए'
फाउची ने बोला कि हिंदुस्तान दुनिया का सबसे बड़ा टीका निर्माता देश है. उन्हें अपने संसाधन मिल रहे हैं, न केवल भीतर से, बल्कि बाहर से भी. उन्होंने कहा, 'यही कारण है कि अन्य राष्ट्रों को या तो हिंदुस्तान को उनके यहां टीका निर्माण के लिए सहायता देनी चाहिए अथवा टीके दान देने चाहिए.' डाक्टर फाउची ने एक प्रश्न के उत्तर में बोला कि हिंदुस्तान को तत्काल अस्थायी हॉस्पिटल बनाने की आवश्यकता है, जिस तरह करीब एक वर्ष पहले चाइना ने किया था.

उन्होंने कहा, 'आपको ऐसा करना ही होगा. आप हॉस्पिटल में बिस्‍तर नहीं होने पर लोगों को गलियों में नहीं छोड़ सकते. ऑक्सीजन के दशा बहुत गम्भीर हैं. मेरा मतलब है कि लोगों को ऑक्सीजन नहीं मिल पाना वास्तव में दुखद है.' फाउची ने बोला कि तात्कालिक तौर पर हॉस्पिटल के बिस्तरों, ऑक्सीजन, पीपीई किट और अन्य चिकित्सा आपूर्ति की समस्या है. उन्होंने वायरस के प्रसार की रोकथाम के लिए देशव्यापी लॉकडाउन की आवश्यकता पर भी जोर दिया.


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