ऊपरी सदन सीनेट में ट्रंप पर मुकदमा चलाया जाएगा

 ऊपरी सदन सीनेट में ट्रंप पर मुकदमा चलाया जाएगा

दुनिया के शक्तिशाली देश अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर महाभियोग चलाने की मंजूरी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेन्टेटिव से मिल गई है। अब ऊपरी सदन सीनेट में ट्रंप पर मुकदमा चलाया जाएगा। अमेरिका के इतिहास में ट्रंप ऐसे तीसरे राष्ट्रपति हैं जिनके विरूद्ध महाभियोग को मंजूरी दी गई है। डेमोक्रेट सांसदों के बहुमत वाले अमेरिकी संसद के निचले सदन ने 197 के मुकाबले 230 मतों से महाभियोग को मंजूरी दे दी। डोनाल्ड ट्रंप पर आरोप हैं कि उन्होंने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडीमिर जेलेंस्की पर 2020 में डेमोक्रेटिक पार्टी के संभावित उम्मीदवार जो बाइडेन व उनके बेटे के विरूद्ध करप्शन की जाँच के लिए दबाव बनाया है। बाइडेन के बेटे उक्रेन की एक ऊर्जा कंपनी में बड़े ऑफिसर हैं।

अमेरिका के इतिहास में ट्रंप से पहले केवल दो राष्ट्रपतियों के विरूद्ध महाभियोग लाया गया था, लेकिन उन्हें पद से हटाया नहीं जा सका.1886 में एंड्रयू जॉनसन व 1998 में बिल क्लिंटन के विरूद्ध महाभियोग लाया गया था.1974 में राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन पर अपने एक विरोधी की जासूसी करने का आरोप लगा था। इसे वॉटरगेट स्कैंडल का नाम दिया गया था। लेकिन महाभियोग चलाने से पहले उन्होंने इस्तीफ़ा दे दिया था।

 

आपकी जानकारी के लिए बता दे कि डोनाल्ड ट्रंप पर आरोप हैं कि उन्होंने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडीमिर जेलेंस्की पर 2020 में डेमोक्रेटिक पार्टी के संभावित उम्मीदवार जो बाइडेन व उनके बेटे के विरूद्ध करप्शन की जाँच के लिए दबाव बनाया है। बाइडेन के बेटे उक्रेन की एक ऊर्जा कंपनी में बड़े ऑफिसर हैं। महाभियोग प्रक्रिया के तहत ट्रंप व यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडीमिर जेलेंस्की के बीच हुई फोन बातचीत की जाँच हुई व डेमोक्रेटिक पार्टी के नियंत्रण वाली न्यायिक समिति ने उनके विरूद्ध औपचारिक आरोप तय कर दिए हैं। इस फोन बातचीत में राष्ट्रपति ट्रंप ने कथित तौर पर यूक्रेनी ऊर्जा कंपनी बुरिज्मा के लिए कार्य कर चुके जो बाइडेन व उनके बेटे हंटर बाइडेन के ख़िलाफ़ जाँच करने के लिए बोला था। न्यायिक समिति के चेयरमेन व डेमोक्रेटिक नेता जेरी नाडलेर के अनुसार ट्रंप के विरूद्ध दो मुख्य आरोप हैं। पहला कि ट्रंप ने सत्ता का दुरुपयोग किया है व दूसरा ये कि राष्ट्रपति ने संसद के कार्य में बाधा डाली। राष्ट्रपति पर आरोप है कि उन्होंने अपने सियासी फायदा के लिए यूक्रेन को मिलने वाली आर्थिक मदद को रोक दिया था।